दीपावली पर बाजार में बिखरेगा महिलाओं के हुनर का उजाला, मिट्टी के दीयों से लेकर डिजाइनर झूमर तक कर रहीं तैयारियां

बैकुंठपुर में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने संभाली दीपावली की कमान, 10 से 12 महिलाएं 15-20 दिनों से जुटीं तैयारी में, पिछले साल 40 हजार की बिक्री और 25 हजार रुपये का लाभ; इस बार नई वैरायटी से बढ़ी उम्मीदें।

 

बैकुंठपुर। दीपावली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। घरों को रोशन करने के लिए लोग जहां रंग-बिरंगी लाइटों और सजावटी सामानों की खरीदारी में जुटने लगे हैं, वहीं कोरिया जिले के बैकुंठपुर में स्व-सहायता समूह की महिलाएं अपने हुनर और मेहनत से दीपावली को खास बनाने की तैयारी में जुटी हैं। यहां महिलाएं सिर्फ मिट्टी के दीये ही नहीं बना रहीं, बल्कि अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल से ऐसे आकर्षक सजावटी उत्पाद तैयार कर रही हैं, जो बाजार में ग्राहकों का ध्यान खींचने को तैयार हैं।

खास बात यह है कि इन महिलाओं की तैयारी महज एक-दो दिन की नहीं, बल्कि पिछले 15 से 20 दिनों से लगातार चल रही है। दो स्व-सहायता समूहों की करीब 10 से 12 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर दीपावली के लिए एक से बढ़कर एक आकर्षक सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। इस बार बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक दीयों के साथ आधुनिक डिजाइन और नई वैरायटी भी शामिल की गई है।

महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहे मिट्टी के रंग-बिरंगे दीये, हाथी वाले दीये, कमल के फूल, डिजाइनर दीये, आकर्षक झालर, झूमर, लटकन, माता लक्ष्मी के पदचिह्न और मिट्टी के कलश जैसे कई उत्पाद दीपावली की सजावट में चार चांद लगाने को तैयार हैं। खास बात यह है कि साधारण मिट्टी के दीयों को भी रंगों और आकर्षक सजावट से नया रूप दिया जा रहा है।

मेहनत का मिला फल, पिछले साल 40 हजार की बिक्री से 25 हजार का लाभ

इन महिलाओं के लिए यह काम केवल दीपावली की तैयारी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और अतिरिक्त आमदनी का एक मजबूत जरिया भी बन चुका है। स्व-सहायता समूह की महिला शीतल साहू, निवासी बड़गांव, बताती हैं कि समूह की महिलाएं मिलकर दीपावली के सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। पिछले साल भी उन्होंने इसी तरह उत्पाद बनाकर बाजार में बेचे थे, जिससे अच्छी आमदनी हुई थी। इसी उत्साह के साथ इस बार झूमर, झालर और लटकन सहित कई नए डिजाइन तैयार किए गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिलेगा और समूह की आमदनी में बढ़ोतरी होगी।

वहीं समूह की महिला सावित्री यादव बताती हैं कि वे पिछले 15 से 20 दिनों से दीपावली की तैयारी में जुटी हैं। मिट्टी के दीयों को आकर्षक रंगों से सजाने के साथ कमल के फूल, झूमर और अन्य सजावटी सामान तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को बाजार में बेचकर महिलाओं को अच्छी आमदनी होती है। उनके मुताबिक, इस काम से महिलाओं को अपनी मेहनत का फल मिलने के साथ आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी मिलता है।

6-7 साल से दीपावली पर दिख रहा महिलाओं के हुनर का कमाल

इस पहल को लेकर बैकुंठपुर विकासखंड की परियोजना प्रबंधक कल्पना देवांगन बताती हैं कि पिछले 6 से 7 वर्षों से स्व-सहायता समूह की महिलाएं हर दीपावली पर सजावटी दीये, रंगीन दीये और झूमर सहित कई तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं। इस बार बाजार की मांग को देखते हुए चार से पांच तरह की दीयों की वैरायटी तैयार की गई है। मिट्टी के पारंपरिक दीयों को सजाने के साथ डिजाइनर दीयों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

उन्होंने बताया कि इस काम में शामिल महिलाएं पिछले 4 से 5 वर्षों से लगातार जुड़ी हुई हैं। अब उन्हें इस काम का अच्छा अनुभव हो चुका है। नए डिजाइन और उत्पाद तैयार करने के लिए उन्हें मार्गदर्शन भी दिया जाता है, जिससे महिलाएं धीरे-धीरे अपने हुनर को और निखार रही हैं। पिछले वर्ष समूह की कुल बिक्री लगभग 40 हजार रुपये रही थी, जिसमें करीब 25 हजार रुपये का लाभ हुआ था। इस बार पहले से अधिक वैरायटी और बेहतर तैयारी के चलते अच्छी बिक्री की उम्मीद है। तैयार उत्पादों को मुख्य बाजार में बिक्री के लिए लगाया जा रहा है।

सिर्फ दीये नहीं, आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी जला रहीं महिलाएं

बैकुंठपुर की इन महिलाओं की कहानी बताती है कि अगर हुनर को सही दिशा और मेहनत को बाजार मिल जाए, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ी आर्थिक संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। मिट्टी के दीयों में रंग भरती इन महिलाओं के सपनों में भी आत्मनिर्भरता के रंग नजर आ रहे हैं। दीपावली पर इनके बनाए सजावटी सामान जहां लोगों के घरों को रोशन करेंगे, वहीं इनकी मेहनत परिवार की आर्थिक खुशहाली में भी योगदान देगी।

इस बार दीपावली पर बैकुंठपुर के बाजार में सिर्फ रोशनी ही नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं के हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता की चमक भी देखने को मिलेगी।

Nbcindia24

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