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शनि. मई 16th, 2026

मदर्स डे स्पेशल: माँ की ममता को लकड़ी में उकेरने वाले शिल्पी, एक ही लकड़ी से गढ़ दी माँ-बेटे के प्रेम की जीवंत कहानी

माँ… केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह एहसास है जिसमें संसार की सारी ममता, त्याग, स्नेह और अपनापन समाया होता है। बच्चे की पहली मुस्कान से लेकर उसके हर दर्द तक, माँ अपने जीवन का हर पल अपने बच्चे के नाम कर देती है। इसी निश्छल प्रेम और अटूट रिश्ते को छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर के मशहूर काष्ठ शिल्पी श्रवण चोपकर ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से लकड़ी में जीवंत कर दिया है।

इस्पात नगरी भिलाई के सेक्टर-02 निवासी 84 वर्षीय श्रवण चोपकर ने मदर्स डे के अवसर पर शीशम की एक ही लकड़ी से ऐसा अनोखा शिल्प तैयार किया है, जिसे देखकर हर किसी की आंखों में माँ के प्रति सम्मान और भावनाओं की लहर दौड़ जाती है। यह सिर्फ एक लकड़ी की मूर्ति नहीं, बल्कि माँ और बच्चे के बीच के उस पवित्र रिश्ते की कहानी है, जो जन्म से लेकर जीवनभर सांसों की तरह साथ चलता है।

करीब 18 इंच लंबी, 8 इंच चौड़ी और डेढ़ इंच मोटी शीशम की लकड़ी को ढाई महीने की अथक मेहनत और बारीक कारीगरी से तराशकर श्रवण चोपकर ने “ममता की मूरत” का रूप दिया है। इस अद्भुत कृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कहीं भी किसी प्रकार का जोड़, कील या फेविकोल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पूरी कलाकृति एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई है, जिसमें माँ और बच्चे के वात्सल्य भरे नौ अलग-अलग रूपों को मूवमेंट के जरिए दर्शाया गया है।

इस कलाकृति में माँ द्वारा बच्चे को नहलाना, सिर पर पानी डालना, गोद में झुलाना, खाना खिलाना और अपने आंचल में सहेज लेना जैसे दृश्य इतने जीवंत लगते हैं, मानो लकड़ी नहीं बल्कि ममता खुद सांस ले रही हो। हर आकृति में माँ के चेहरे का स्नेह और बच्चे की मासूमियत साफ दिखाई देती है। शिल्प को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे माँ का प्यार समय और शब्दों से कहीं बड़ा होता है।

श्रवण चोपकर ने इस शिल्प में “चेन कटिंग” तकनीक का उपयोग करते हुए माँ की चोटी को विशेष रूप दिया है, जो उनकी कला की अलग पहचान बन चुकी है। लकड़ी के भीतर इतनी महीन कटिंग और मूवमेंट देना तकनीकी रूप से बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन दशकों के अनुभव और कला के प्रति समर्पण ने उनकी इस रचना को अद्वितीय बना दिया।

श्रवण चोपकर बताते हैं कि उनका उद्देश्य केवल एक कलाकृति बनाना नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस संस्कृति और पारिवारिक भावनाओं को दुनिया के सामने लाना था, जहां माँ और बच्चे का रिश्ता सबसे पवित्र माना जाता है। उनका कहना है कि आज के आधुनिक दौर में भी माँ की ममता और संस्कार ही परिवार को जोड़े रखते हैं, और यही संदेश वह अपनी कला के माध्यम से देना चाहते हैं।

काष्ठ कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके श्रवण चोपकर का नाम वर्ष 2012 में Limca Book of Records और India Book of Records में भी दर्ज हो चुका है। उनकी कलाकृतियां केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में सराही जाती रही हैं।

मदर्स डे पर तैयार की गई यह अनूठी कृति आज लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जो भी इस शिल्प को देखता है, वह कुछ क्षणों के लिए अपनी माँ की यादों में खो जाता है। यह कला केवल लकड़ी की नक्काशी नहीं, बल्कि उस भावना की अभिव्यक्ति है, जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता — माँ की ममता।

बिलासपुर-जबलपुर हाईवे पर देर रात हादसा, घंटों जाम में फंसे रहे वाहन

राकेश मिश्रा पेंड्रा 

पेंड्रा/बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे पर रविवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कारीआम गांव के पास निर्माणाधीन पुल पर कोयले से भरा एक हाइवा अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया और घंटों तक आवागमन बाधित रहा।

जानकारी के अनुसार, रात करीब 2 बजे कोयला लोड हाइवा कारीआम गांव के पास निर्माणाधीन पुल से गुजर रहा था। इसी दौरान वाहन अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। हाइवा के पलटते ही पुल के पास सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई, जिससे हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

घटना के चलते यात्री बसें, ट्रक, निजी वाहन समेत कई गाड़ियां जाम में फंस गईं। कई वाहन चालक वैकल्पिक मार्ग तलाशते नजर आए, लेकिन आसपास सुगम रास्ता नहीं होने के कारण अधिकांश लोगों को घंटों हाईवे पर ही इंतजार करना पड़ा।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि निर्माणाधीन पुल और संकरी सड़क के कारण यहां लगातार हादसे की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि हल्की बारिश के दौरान सड़क की खामियां और निर्माण कार्य में अनियमितताएं भी सामने आने लगती हैं, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी हो जाती है।

सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची और और वाहनों को एक एक के निकालने में जुटी हुई है फिलहाल छोटी गाड़ियों को निकाला जा रहा है पर अभी भी बड़े वाहनों को निकलने नहीं दिया जा रहा है जिसके चलते अभी भी वाहनों की कतारें दोनों तरफ बने हुए हैं

हालांकि हादसे में किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने निर्माणाधीन पुल की सुरक्षा व्यवस्था और सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई महिला पर भालू का हमला, हालत गंभीर

राकेश मिश्रा पेंड्रा

पेंड्रा-मरवाही जिले के धरहर गांव में तेंदू पत्ता तोड़ने जंगल गई एक 60 वर्षीय महिला पर भालू ने हमला कर दिया। इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही में भर्ती कराया गया है। यह घटना दिनांक 09 मई 2026 को हुई।

 

जानकारी के अनुसार, धरहर निवासी मनकी बाई प्रजापति (पति महाराजी लाल, उम्र 60 वर्ष) तेंदू पत्ता तोड़ने के लिए जंगल गई थीं। तभी एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। उनके साथ मौजूद अन्य महिलाओं ने शोर मचाया, जिसके बाद भालू जंगल की ओर भाग गया।

 

महिला की गंभीर हालत देखते हुए किसी ने तत्काल आपातकालीन सेवा डायल 108 को सूचना दी। ड्यूटी पर तैनात आपातकालीन स्टाफ ईएमटी गणेश्वर प्रसाद और पायलट दयाशंकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने डॉ. हिमांशु नहरेल के मार्गदर्शन में महिला को जीवन रक्षक दवाइयां दीं और प्राथमिक उपचार प्रदान किया।

 

इसके बाद, घायल महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

 

 

बड़ी खबर: 136 नग चिरान और 11 लट्ठे बरामद, हिरासत में दो आरोपी

राकेश मिश्रा पेंड्रा

मरवाही वनमंडल में लकड़ी तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर भारी मात्रा में अवैध साल की लकड़ी जब्त की है।

 

यह कार्रवाई मरवाही वनमंडल के गौरेला रेंज में की गई। विभाग को सूचना मिली थी कि पिपरखुंटी बीट के पास जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई कर लकड़ी छिपाई गई है।

सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने दो घरों में सर्च वारंट के साथ छापा मारा। इस दौरान लगभग 2 लाख रुपये मूल्य की 136 नग साल के चिरान (कटी हुई लकड़ी) और 11 बड़े लट्ठे बरामद किए गए।

 

इसके साथ ही, लकड़ी काटने में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक मशीन (चेनसॉ), हाथ आरी और कुल्हाड़ियां भी जब्त की गईं। विभाग ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है, जिन पर वन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

 

वन अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी भी जारी है और जब्त लकड़ी की मात्रा बढ़ सकती है। इस आधी रात की कार्रवाई को डीएफओ ग्रीष्मी चांद सहित वन विभाग के उड़नदस्ते ने अंजाम दिया।

CRIME: एंबुलेंस में मरीज की जगह गांजा मिलते ही पुलिस ने किया तगड़ा ऑपरेशन.?

महासमुंद जिले में पुलिस ने गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंबुलेंस की आड़ में चल रहे अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और कोमाखान थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में करीब 38 लाख 50 हजार रुपये कीमत का 77 किलो गांजा जब्त किया गया है।

 

बताया जा रहा है कि तस्कर एंबुलेंस का इस्तेमाल कर गांजा की खेप को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचा रहे थे ताकि पुलिस और जांच एजेंसियों को शक न हो। मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के 5 अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है।

 

पुलिस के मुताबिक आरोपी उड़ीसा से गांजा लेकर महाराष्ट्र के सोलापुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान कोमाखान थाना क्षेत्र में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर कार्रवाई की। जांच के दौरान एंबुलेंस से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तस्करी के इस नेटवर्क में सिर्फ एंबुलेंस ही नहीं, बल्कि एक पायलेटिंग कार का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि पायलेटिंग कार आगे चलकर रास्ते की निगरानी करती थी और पुलिस चेकिंग की जानकारी पीछे चल रही एंबुलेंस तक पहुंचाती थी।

 

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गांजा परिवहन में इस्तेमाल एंबुलेंस, पायलेटिंग कार और 5 मोबाइल फोन समेत करीब 50 लाख 45 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस कार्रवाई को जिले में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।

 

एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और महासमुंद पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई के बाद अब कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पूरा मामला कोमाखान थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

 

 

गुंडरदेही के कृषि विस्तार अधिकारी को बलात्कार मामले में आजीवन कारावास, रायपुर कोर्ट का बड़ा फैसला

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से जुड़ी एक गंभीर आपराधिक मामला में रायपुर की अदालत ने एक कृषि विस्तार अधिकारी को बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी देवनारायण साहू बालोद जिले के गुंडरदेही क्षेत्र के निवासी हैं।

शिकायत के अनुसार मामला उस समय का है जब आरोपी और पीड़िता की पहचान पढ़ाई के दौरान हुई थी। इसी दौरान आरोपी ने युवती से विवाह करने का वादा किया और संबंध बनाए। बाद में आरोपी अपने वादे से मुकर गया और शादी करने से इंकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद फरवरी 2026 में न्यायालय में चालान पेश किया। लंबी सुनवाई के बाद रायपुर की अदालत में न्यायाधीश पंकज सिन्हा ने आरोपी  कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

कवर्धा में भीषण सड़क हादसा: पुल से गिरी तेज रफ्तार कार, 4 युवकों की दर्दनाक मौत

छत्तीसगढ़/ कबीरधाम जिले के कवर्धा से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पांडातराई थाना क्षेत्र के अंतर्गत गड़ाई के पास फोक नदी पर बने पुल पर देर रात एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर नीचे जा गिरी। इस भयावह दुर्घटना में कार सवार चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

हादसा उस वक्त हुआ जब कार में सवार सभी युवक एक शादी समारोह में शामिल होकर रायपुर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि वाहन की रफ्तार काफी तेज थी और पुल के पास अचानक चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद कार सीधे नीचे नदी क्षेत्र में जा गिरी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और अंदर बैठे लोग बाहर निकलने की स्थिति में भी नहीं रहे।

दुर्घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों ने शोर सुनकर तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को किसी तरह बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायल दोनों युवकों को पहले जिला अस्पताल भेजा गया, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल रेफर किया गया है।

मृतकों की पहचान अरमान खान, सौंफ, अनस और कौनेन के रूप में हुई है, जबकि घायल युवकों में जुनैद रज़ा और आरज़ू खान शामिल हैं। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।

प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।

“पास नहीं हुआ… और जिंदगी से ही हार गया” बालोद ने झकझोर देने वाली घटना

न्यूज़ डेस्क बालोद।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिला से सामने आई यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। डौंडी क्षेत्र के 17 साल के छात्र राजवीर बघेल ने 10वीं की परीक्षा में असफल होने के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जिस उम्र में सपने बनने चाहिए, उस उम्र में एक बच्चा इतना टूट गया कि उसे जिंदगी ही बोझ लगने लगी।

बताया जा रहा है कि राजवीर कुछ दिन पहले अपनी मौसी के घर जगन्नाथपुर सांकरा गांव शादी में गया हुआ था। 29 अप्रैल को जब 10वीं-12वीं का रिजल्ट आया, तो उसने मोबाइल पर अपना परिणाम देखा। उसी पल से उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। वह चुप रहने लगा, उदास रहने लगा, लेकिन शायद किसी ने उस चुप्पी के पीछे छिपे तूफान को नहीं समझा।

अगले दिन वह अपने भाई के साथ घर लौट आया, लेकिन मन का बोझ उसके साथ ही आया। सुबह जब काफी देर तक उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों ने खिड़की से देखा… और जो सामने था, उसने सब कुछ खत्म कर दियाराजवीर फांसी के फंदे पर झूल चुका था। एक पल में पूरे परिवार की दुनिया उजड़ गई।

घर वालों के अनुसार, राजवीर पिछले साल भी 10वीं में असफल हुआ था और इस बार भी वह पास नहीं हो पाया। उसकी कॉपी से एक नोट भी मिला, जिसमें उसने अपने परिवार के लिए प्यार तो जताया, लेकिन साथ ही यह दर्द भी लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। यही सोच उसके लिए इतनी भारी हो गई कि उसने जिंदगी से ही हार मान ली।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है…

  • क्या सच में परीक्षा में फेल होना इतना बड़ा अपराध है?
  • क्या नंबर ही किसी की जिंदगी की कीमत तय करते हैं?

    आज भी हमारे समाज में अंक और रिजल्ट को इतना बड़ा बना दिया गया है कि बच्चे असफलता को सहन ही नहीं कर पाते।

सच्चाई यह है कि एक परीक्षा में फेल होना जिंदगी का अंत नहीं होता। हर साल लाखों बच्चे असफल होते हैं, लेकिन वही बच्चे आगे चलकर नई राह बनाते हैं, सफल होते हैं। असफलता सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। जरूरत है तो बच्चों को यह समझाने की कि गिरना गलत नहीं, गिरकर उठना जरूरी है।

माता-पिता और समाज को भी यह समझना होगा कि बच्चों को दबाव नहीं, सहारा चाहिए। उन्हें डर नहीं, हौसला चाहिए। क्योंकि कई बार एक छोटी सी उम्मीद, एक समझदारी भरी बात… किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।

राजवीर अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन उसकी यह दर्दनाक कहानी शायद किसी और बच्चे को टूटने से बचा ले… यही इस खबर का सबसे बड़ा संदेश है।

BALOD: “11 निजी स्कूलों को नोटिस, लेकिन सरकारी स्कूलों पर चुप्पी क्यों?

बालोद। जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के खराब परिणामों के बाद 11 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर निजी स्कूलों पर सख्ती दिखाई गई है, किन्तु सरकारी स्कूलों का क्या.? दोहरे मापदंड के आरोप लगने लगे हैं।

जिले में इस वर्ष परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं।
इतना ही नहीं, करीब 13 साल बाद पहली बार बालोद जिला 10वीं और 12वीं की टॉप-10 मेरिट सूची से बाहर हो गया है, जिसे जिले के लिए बड़ा शैक्षणिक झटका माना जा रहा है।

इन खराब परिणामों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा 11 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। नोटिस में संबंधित स्कूल प्रबंधन से कमजोर परिणामों का कारण पूछते हुए भविष्य में सुधार के लिए ठोस योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मान्यता समाप्त करने तक की चेतावनी भी दी गई है।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि जब हजारों छात्र फेल हुए हैं, तो जिम्मेदारी केवल निजी स्कूलों की ही क्यों तय की जा रही है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में भी शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहां शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और निगरानी की कमजोर व्यवस्था जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं।

निलिमा श्याम जिला स्थायी शिक्षा समिति सदस्य

जिला स्थायी शिक्षा समिति सदस्य निलिमा श्याम ने विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था का प्रतिबिंब होता है, ऐसे में केवल निजी स्कूलों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी-दोनों प्रकार के स्कूलों की समान रूप से समीक्षा और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

इन निजी स्कूलों को जारी हुआ नोटिस
सर्वोदय अंग्रेजी माध्यम हाई स्कूल गुरुर, साई शिशु मंदिर गुण्डरदेही, नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय अर्जुंदा, नेहरू विद्यालय भाठागांव, श्री राम विद्या मंदिर पैरी, गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यापीठ बालोद, गुरुनानक विद्यालय दल्ली राजहरा, साई शिशु मंदिर दल्ली राजहरा, गांधी विद्या मंदिर दल्ली राजहरा तथा विवेकानंद हाई स्कूल डौण्डी।

इस पूरे मामले के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विभाग ने पूरे सत्र के दौरान प्रभावी मॉनिटरिंग की थी या फिर परिणाम आने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल, जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की भी जवाबदेही तय की जाएगी या यह कार्रवाई केवल निजी स्कूलों तक ही सीमित रह जाएगी।

 

 

“आंधी-तूफान का कहर: 17 राज्यों में हाई अलर्ट, 70KM/h की रफ्तार से चलेंगी हवाएं!”