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शनि. मई 16th, 2026

IED ब्लास्ट: 4 जवान शहीद, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने दी थी इनपुट

कांकेर/नारायणपुर।
बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चल रहे डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए भीषण आईईडी विस्फोट में चार बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवा दी। यह हादसा थाना छोटेबेठिया क्षेत्र के अंतर्गत कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर हुआ।

शनिवार सुबह डीआरजी (District Reserve Guard) की टीम एरिया डॉमिनेशन और सर्च ऑपरेशन के लिए जंगलों की ओर रवाना हुई थी। टीम आत्मसमर्पित नक्सलियों के बताए ठिकाने पर डंप बारूद बरामद करने पहुँची थी। जवान बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे थे, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इलाके में हर कदम पर खतरा छिपा हो सकता है।

इसी दौरान, जैसे ही टीम एक संदिग्ध स्थान पर पहुँची और वहां छिपाए गए विस्फोटक डंप को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की, तभी अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भयानक था कि पूरा इलाका दहल उठा।

इस दर्दनाक घटना में मौके पर ही तीन जवान — इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले -शहीद हो गए। वहीं, गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा को एयरलिफ्ट कर रायपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर कई आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किए गए हैं। इससे साफ है कि माओवादी अब भी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जंगलों में छिपाकर रख रहे हैं।

यह घटना इस बात का भी संकेत है कि भले ही कई नक्सली आत्मसमर्पण कर अहम जानकारी दे रहे हैं, लेकिन जंगलों में पहले से छिपाए गए आईईडी अब भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बल लगातार ऐसे छिपे हुए बारूदी जाल को खोजकर निष्क्रिय करने में जुटे हैं।

MP: डैम की लहरों में समाई कई जिंदगियां, मां-बेटे की आई तस्वीर ने देश को झकझोरा

CG: “आंसुओं से मुस्कान तक: सरपंच ने मजदूरों को दिया जिंदगी का सबसे बड़ा गिफ्ट”

जिन्होंने कभी हवाई जहाज को दूर से देखा था… आज उसी में बैठकर भगवान के दर पहुंचे

अर्जुन्दा/बालोद 

छत्तीसगढ़: बालोद जिले के ग्राम टिकरी से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां की सरपंच ललिता रितेश देवांगन ने मजदूर दिवस (1 मई) के अवसर पर एक अनूठी पहल करते हुए गांव के पांच गरीब मजदूरों को हवाई जहाज से उड़ीसा स्थित जगन्नाथ पुरी मंदिर के दर्शन के लिए भेजा। खास बात यह है कि अब ये सभी मजदूर सुरक्षित पुरी पहुंच भी चुके हैं और अपने जीवन के इस खास पल को जी रहे हैं।

गांव के जिन मजदूरों ने अब तक हवाई जहाज को सिर्फ आसमान में उड़ते देखा था, उनके लिए यह यात्रा किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों के लिए हवाई यात्रा करना लगभग असंभव था, लेकिन सरपंच की इस पहल ने उनके जीवन में खुशी और आत्मसम्मान की नई रोशनी भर दी है।

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पूरी यात्रा का खर्च सरपंच ललिता रितेश देवांगन स्वयं अपने मानदेय से वहन कर रही हैं। यह न केवल उनकी सेवा भावना को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि जनप्रतिनिधि अगर चाहें तो अपने स्तर पर भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

यह पहल केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मजदूरों के सम्मान और उनके योगदान को पहचान देने की एक सार्थक कोशिश है। रोजमर्रा की कठिन मेहनत के बीच इन मजदूरों को एक ऐसा अवसर मिला है, जो उनके जीवन की यादगार बन गया है।

 

सरपंच ललिता देवांगन इससे पहले भी अपने “मिशन अनमोल मुस्कान” के जरिए गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। इस मिशन के तहत बच्चों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई सकारात्मक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे गांव में जागरूकता और विकास का माहौल बना है।

सरपंच की इस पहल की चर्चा अब पूरे छत्तीसगढ़ में हो रही है। लोग इसे एक आदर्श जनसेवा और संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण मान रहे हैं। यह पहल यह संदेश देती है कि अगर नीयत साफ हो और सोच सकारात्मक हो, तो छोटे से गांव से भी बड़े बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

बालोद के टिकरी गांव से निकली यह कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है-जो यह सिखाती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल और सच्ची नीयत की जरूरत होती है।

CG: “शहादत की मिट्टी से उठी आवाज, सुकमा ने फिर लिखा इतिहास”

सुकमा शहादत की नींव पर खड़ा हुआ नक्सल मुक्त भविष्य दोरनापाल में ‘शहीद स्मारक’ का लोकार्पण
बुरकापाल के अमर शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, डीआईजी और कलेक्टर ने वीरों के बलिदान को किया नमन

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ सुकमा जिला आज नक्सलवाद के काले साये से मुक्त होकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। इस शांति और सुरक्षा के पीछे उन वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान है, जिन्होंने बुरकापाल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में राष्ट्र की एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसी कड़ी में आज शुक्रवार को 74वीं बटालियन मुख्यालय, दोरनापाल में वर्ष 2017 की बुरकापाल घटना में शहीद हुए 25 वीर जवानों की स्मृति में नवनिर्मित शहीद स्मारक का गरिमामय लोकार्पण किया गया।

सम्मान और गौरव का पल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित ने विधिवत पूजा-अर्चना कर स्मारक का अनावरण किया। इस दौरान वातावरण अत्यंत भावुक और श्रद्धामय रहा। उपस्थित अधिकारियों और जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने वीर साथियों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखकर उनकी अमर स्मृति को नमन किया।

संघर्ष से शांति तक का सफर
लोकार्पण के अवसर पर वर्ष 2017 की उस हृदयविदारक घटना को याद किया गया, जब दोरनापाल-जगरगुंडा मार्ग निर्माण के दौरान नक्सलियों ने कायराना हमला किया था। अधिकारियों ने बताया कि एक समय यह क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ था, जहाँ सड़क बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था।

आज अगर सुकमा नक्सल मुक्ति की दिशा में खड़ा है, तो इसका श्रेय उन जवानों को जाता है जिन्होंने जगरगुंडा मार्ग के पत्थर-पत्थर को अपने खून से सींचा है।

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कहा कि सुकमा अब नक्सलवाद के दंश से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे जवानों ने जो शहादत दी है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज बुरकापाल के वीरों की याद में स्मारक का लोकार्पण कर हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं

बुरकापाल घटनास्थल पर भी दी श्रद्धांजलि
दोरनापाल में कार्यक्रम के पश्चात डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, कमांडेंट हिमांशु पांडे और कमांडेंट कुमार मयंक सीधे बुरकापाल स्थित वास्तविक घटनास्थल पर पहुँचे। वहां स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को याद किया गया। उपस्थित सभी जवानों ने संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

बी.एड स्टूडेंट की हत्या: अफेयर के शक में ब्वॉयफ्रेंड बना कातिल

छत्तीसगढ़
दुर्ग से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां बी.एड की पढ़ाई के दौरान पनपे प्रेम संबंध का अंत दर्दनाक वारदात में हुआ। प्रेमी ने अपनी गर्लफ्रेंड की गला दबाकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला

मृत युवती की पहचान यूनेश्वरी वर्मा (26) के रूप में हुई है, जो खैरागढ़ जिले के चिचोला की रहने वाली थी और दुर्ग में रहकर पढ़ाई कर रही थी। आरोपी कार्तिक राम साहू (27) बालोद जिले का निवासी है।

दोनों की मुलाकात दुर्ग-बालोद रोड स्थित बी.एम. कॉलेज में बी.एड की पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, लेकिन पिछले कुछ समय से रिश्ते में शक ने जगह बना ली थी।

शक बना हत्या की वजह

बताया जा रहा है कि आरोपी को संदेह था कि युवती का किसी और के साथ संबंध है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

घटना के दिन आरोपी कार्तिक युवती को अपने कमरे पर ले गया, जहां फिर से विवाद हुआ। गुस्से में आकर उसने युवती का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

खुद ही पुलिस को दी सूचना

घटना के बाद आरोपी ने डायल-112 पर कॉल कर युवती के बेहोश होने की सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया है। शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और आगे की जांच जारी है।

CG: अवैध रेत उत्खनन के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, 12 हाइवा वाहन रुकवाए

अनियंत्रित रेत से भरा ट्रेलर पेड़ और खंभे से टकराया, ट्रेलर के उड़े परखच्चे

 राकेश मिश्रा ​पेंड्रा/ जिले के  दुबटिया कुडकई गांव में बीती देर रात एक भीषण सड़क हादसा घटित हुआ, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। रेत से लदा एक तेज रफ्तार ट्रेलर अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे जबरदस्त ढंग से दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

चश्मदीदों के अनुसार, अनियंत्रित ट्रेलर की रफ्तार इतनी अधिक थी कि वह सबसे पहले एक विशाल पेड़ से टकराया और उसके बाद रास्ते में आने वाले बिजली के खंभे और तारों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करते हुए पलट गया।

​हादसा इतना भयानक था कि ट्रेलर के परखच्चे उड़ गए और वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया। इस टक्कर के कारण बिजली के खंभे और हाई-टेंशन तार टूटकर जमीन पर आ गिरे, जिससे दुबटिया कुडकई और आसपास के ग्रामीणों इलाकों की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। गनीमत यह रही कि इतने भीषण हादसे के बावजूद चालक की जान बच गई और उसे केवल मामूली चोटें आई हैं। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और प्रशासन को इसकी सूचना दी। फिलहाल बिजली विभाग की टीम टूटे हुए तारों और खंभों की मरम्मत में जुटी है ताकि क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति को दोबारा बहाल किया जा सके।

ACCIDENT: तेज रफ्तार कार का कहर, मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी की कार में जमकर की तोड़फोड़ ।।

दुर्गेश यादव/ जांजगीर-चांपा

सक्ती जिले के फगुरम गांव में तेज रफ्तार कार ने एक मासूम बच्ची को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।मृत बच्ची की पहचान रितिका निराला के रूप में हुई है। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी की कार में जमकर तोड़फोड़ की और मौके पर भारी भीड़ जुट गई।हादसे की सूचना मिलते ही फगुरम चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गई। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर मौजूद हैं।बताया जा रहा है कि हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पुलिस द्वारा हालात को नियंत्रण में लेने और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता स्थिति को शांत करना और आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ना है।

फगुरम गांव में हुए दर्दनाक सड़क हादसे को लेकर सक्ती एडिशनल एसपी पंकज पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि—“तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से एक मासूम बच्ची की मौत हुई है। घटना के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया है, जिसकी तलाश के लिए टीम गठित कर दी गई है।“पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर चुकी है, हालांकि ग्रामीणों में आक्रोश है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।”आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामले में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”“परिजनों को हर संभव मदद और न्याय दिलाने का भरोसा पुलिस प्रशासन की ओर से दिया गया है।” फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

छत्तीसगढ़ में साड़ी वितरण पर सियासत तेज: गुणवत्ता पर सवाल

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वितरित की गई साड़ियों को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। साड़ी वितरण योजना की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद अब यह मामला सियासी रंग ले चुका है।

राज्य के कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि वितरित की गई साड़ियाँ खराब क्वालिटी की हैं और उपयोग के लायक नहीं हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि साड़ियों का कपड़ा कमजोर है और उनका आकार भी मानक के अनुसार नहीं है।

इन आरोपों के बीच महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सफाई देते हुए कहा कि सभी साड़ियाँ खराब नहीं हैं, लेकिन कुछ जगहों से गुणवत्ता को लेकर शिकायतें जरूर मिली हैं। वही मंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और कांग्रेस के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उनके समय भी साड़ी वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप लगते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “कांग्रेस शासन में जो साड़ियाँ आती थीं, वे पहनने लायक नहीं होती थीं, बल्कि मछली पकड़ने के काम आती थीं।”

वहीं, कांग्रेस ने मंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए वर्तमान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है और लगभग हर विभाग में कमीशनखोरी हो रही है।

कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जो साड़ियाँ दी गई हैं, उनकी लंबाई करीब 4.5 मीटर है, जबकि सामान्य साड़ी की लंबाई 5.5 से 6 मीटर होती है। ऐसे में महिलाएं इन साड़ियों का उपयोग सही तरीके से नहीं कर पा रही हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद में बड़े स्तर पर अनियमितता और कमीशनखोरी हो रही है।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और घमासान देखने को मिल सकता है।

जहां गूंजी थीं गोलियां, अब गूंजा भारत माता की जय का नारा सम्मानः ताड़मेटला में शहीद स्मारक का लोकार्पण  

76 शहीदों की स्मृति में बना गौरव स्मारक, सीआरपीएफ डीजी ने किया उद्घाटन

नक्सलवाद के काले साये से आज़ाद हुआ सुकमा: ताड़मेटला में शहीदों की याद में बना स्मारक

 

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह

सुकमा जिले के ताड़मेटला क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बदलते बस्तर और जीतते लोकतंत्र की कहानी बयां कर रही है। सोमवार को ताड़मेटला में उन 76 वीर जवानों की स्मृति में नवनिर्मित शहीद स्मारक का उद्घाटन किया गया, जिन्होंने 2010 के भीषण नक्सली हमले में देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

दहशत के केंद्र में अब ‘शौर्य’ का प्रतीक

यह वही ताड़मेटला है, जिसे कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था। इसी क्षेत्र के पास सुकमा के पहले कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने बंधक बनाकर रखा था, जिससे पूरा देश दहल उठा था। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।

कलेक्टर की मौजूदगी: विकास की नई दस्तक

नक्सल मुक्त होने के बाद पहली बार वर्तमान कलेक्टर अमित कुमार स्वयं इस संवेदनशील क्षेत्र में पहुँचे। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी

 

यह स्मारक हमारे जवानों के अदम्य साहस और ग्रामीणों के विश्वास की जीत है। सुकमा अब विकास और शांति की नई इबारत लिख रहा है।”

 

ऐतिहासिक संदर्भ: 2010 के हमले में शहीद हुए 76 जवानों को समर्पित।

सफलता: सुरक्षाबलों के निरंतर प्रयास से ताड़मेटला अब नक्सलियों के प्रभाव से मुक्त।

प्रशासनिक पहुँच: सालों बाद किसी उच्च अधिकारी का बिना किसी बड़े सैन्य तामझाम के गाँव पहुँचना क्षेत्र में लौटी शांति का प्रमाण है।

अब सुकमा की पहचान गोलियों की गूँज से नहीं, बल्कि विकास की पदचापों से हो रही है। ताड़मेटला का यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को जवानों की शहादत और क्षेत्र की बहादुरी की याद दिलाता रहेगा।

 

 

सुकमा जिले के ताड़मेटला इलाके में 2010 में नक्सली हमले में जान गंवाने वाले 76 सुरक्षाकर्मियों को समर्पित एक शहीद स्मारक का उद्घाटन सोमवार को किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।इस शहीद स्मारक का लोकार्पण छत्तीसगढ़ को सशस्त्र नक्सलियों से मुक्त घोषित किए जाने के लगभग एक सप्ताह बाद किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि यह स्मारक हमले वाली जगह के करीब, गडगडमेटा गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर के नजदीक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, राज्य के अतिरिक्त महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर क्षेत्र) सुंदरराज पट्टिलिंगम और सीआरपीएफ, राज्य पुलिस तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने हमले की बरसी पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और औपचारिक रूप से इस स्मारक को जनता को समर्पित किया।सबसे

घातक सुरक्षा हमलों में से एक06 अप्रैल 2010 को तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले (यह इलाका अब सुकमा जिले में आता है) के गडगडमेटा और ताड़मेटला गांवों के मध्य जंगलों में हुए एक नक्सली हमले में 76 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। इनमें सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के 75 जवान और राज्य पुलिस का एक हवलदार शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक था। सुंदरराज ने बताया कि जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर इस स्मारक का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि सुकमा सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ, अन्य केंद्रीय सशस्त्र बलों और स्थानीय निवासियों ने सर्वोच्च बलिदान दिए हैं। छत्तीसगढ़ को विशेष रूप से चार दशकों से भी अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जूझ रहे बस्तर क्षेत्र को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित कर दिया गया।