Breaking
शनि. मई 16th, 2026

मदर्स डे स्पेशल: माँ की ममता को लकड़ी में उकेरने वाले शिल्पी, एक ही लकड़ी से गढ़ दी माँ-बेटे के प्रेम की जीवंत कहानी

माँ… केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह एहसास है जिसमें संसार की सारी ममता, त्याग, स्नेह और अपनापन समाया होता है। बच्चे की पहली मुस्कान से लेकर उसके हर दर्द तक, माँ अपने जीवन का हर पल अपने बच्चे के नाम कर देती है। इसी निश्छल प्रेम और अटूट रिश्ते को छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर के मशहूर काष्ठ शिल्पी श्रवण चोपकर ने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से लकड़ी में जीवंत कर दिया है।

इस्पात नगरी भिलाई के सेक्टर-02 निवासी 84 वर्षीय श्रवण चोपकर ने मदर्स डे के अवसर पर शीशम की एक ही लकड़ी से ऐसा अनोखा शिल्प तैयार किया है, जिसे देखकर हर किसी की आंखों में माँ के प्रति सम्मान और भावनाओं की लहर दौड़ जाती है। यह सिर्फ एक लकड़ी की मूर्ति नहीं, बल्कि माँ और बच्चे के बीच के उस पवित्र रिश्ते की कहानी है, जो जन्म से लेकर जीवनभर सांसों की तरह साथ चलता है।

करीब 18 इंच लंबी, 8 इंच चौड़ी और डेढ़ इंच मोटी शीशम की लकड़ी को ढाई महीने की अथक मेहनत और बारीक कारीगरी से तराशकर श्रवण चोपकर ने “ममता की मूरत” का रूप दिया है। इस अद्भुत कृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कहीं भी किसी प्रकार का जोड़, कील या फेविकोल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पूरी कलाकृति एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई है, जिसमें माँ और बच्चे के वात्सल्य भरे नौ अलग-अलग रूपों को मूवमेंट के जरिए दर्शाया गया है।

इस कलाकृति में माँ द्वारा बच्चे को नहलाना, सिर पर पानी डालना, गोद में झुलाना, खाना खिलाना और अपने आंचल में सहेज लेना जैसे दृश्य इतने जीवंत लगते हैं, मानो लकड़ी नहीं बल्कि ममता खुद सांस ले रही हो। हर आकृति में माँ के चेहरे का स्नेह और बच्चे की मासूमियत साफ दिखाई देती है। शिल्प को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे माँ का प्यार समय और शब्दों से कहीं बड़ा होता है।

श्रवण चोपकर ने इस शिल्प में “चेन कटिंग” तकनीक का उपयोग करते हुए माँ की चोटी को विशेष रूप दिया है, जो उनकी कला की अलग पहचान बन चुकी है। लकड़ी के भीतर इतनी महीन कटिंग और मूवमेंट देना तकनीकी रूप से बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन दशकों के अनुभव और कला के प्रति समर्पण ने उनकी इस रचना को अद्वितीय बना दिया।

श्रवण चोपकर बताते हैं कि उनका उद्देश्य केवल एक कलाकृति बनाना नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस संस्कृति और पारिवारिक भावनाओं को दुनिया के सामने लाना था, जहां माँ और बच्चे का रिश्ता सबसे पवित्र माना जाता है। उनका कहना है कि आज के आधुनिक दौर में भी माँ की ममता और संस्कार ही परिवार को जोड़े रखते हैं, और यही संदेश वह अपनी कला के माध्यम से देना चाहते हैं।

काष्ठ कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके श्रवण चोपकर का नाम वर्ष 2012 में Limca Book of Records और India Book of Records में भी दर्ज हो चुका है। उनकी कलाकृतियां केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में सराही जाती रही हैं।

मदर्स डे पर तैयार की गई यह अनूठी कृति आज लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जो भी इस शिल्प को देखता है, वह कुछ क्षणों के लिए अपनी माँ की यादों में खो जाता है। यह कला केवल लकड़ी की नक्काशी नहीं, बल्कि उस भावना की अभिव्यक्ति है, जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं किया जा सकता — माँ की ममता।

CRIME: एंबुलेंस में मरीज की जगह गांजा मिलते ही पुलिस ने किया तगड़ा ऑपरेशन.?

महासमुंद जिले में पुलिस ने गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंबुलेंस की आड़ में चल रहे अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और कोमाखान थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में करीब 38 लाख 50 हजार रुपये कीमत का 77 किलो गांजा जब्त किया गया है।

 

बताया जा रहा है कि तस्कर एंबुलेंस का इस्तेमाल कर गांजा की खेप को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचा रहे थे ताकि पुलिस और जांच एजेंसियों को शक न हो। मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के 5 अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है।

 

पुलिस के मुताबिक आरोपी उड़ीसा से गांजा लेकर महाराष्ट्र के सोलापुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान कोमाखान थाना क्षेत्र में मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर कार्रवाई की। जांच के दौरान एंबुलेंस से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।

 

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तस्करी के इस नेटवर्क में सिर्फ एंबुलेंस ही नहीं, बल्कि एक पायलेटिंग कार का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि पायलेटिंग कार आगे चलकर रास्ते की निगरानी करती थी और पुलिस चेकिंग की जानकारी पीछे चल रही एंबुलेंस तक पहुंचाती थी।

 

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गांजा परिवहन में इस्तेमाल एंबुलेंस, पायलेटिंग कार और 5 मोबाइल फोन समेत करीब 50 लाख 45 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस कार्रवाई को जिले में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।

 

एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स और महासमुंद पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई के बाद अब कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पूरा मामला कोमाखान थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

 

 

गुंडरदेही के कृषि विस्तार अधिकारी को बलात्कार मामले में आजीवन कारावास, रायपुर कोर्ट का बड़ा फैसला

रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से जुड़ी एक गंभीर आपराधिक मामला में रायपुर की अदालत ने एक कृषि विस्तार अधिकारी को बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी देवनारायण साहू बालोद जिले के गुंडरदेही क्षेत्र के निवासी हैं।

शिकायत के अनुसार मामला उस समय का है जब आरोपी और पीड़िता की पहचान पढ़ाई के दौरान हुई थी। इसी दौरान आरोपी ने युवती से विवाह करने का वादा किया और संबंध बनाए। बाद में आरोपी अपने वादे से मुकर गया और शादी करने से इंकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद फरवरी 2026 में न्यायालय में चालान पेश किया। लंबी सुनवाई के बाद रायपुर की अदालत में न्यायाधीश पंकज सिन्हा ने आरोपी  कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

“पास नहीं हुआ… और जिंदगी से ही हार गया” बालोद ने झकझोर देने वाली घटना

न्यूज़ डेस्क बालोद।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिला से सामने आई यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। डौंडी क्षेत्र के 17 साल के छात्र राजवीर बघेल ने 10वीं की परीक्षा में असफल होने के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जिस उम्र में सपने बनने चाहिए, उस उम्र में एक बच्चा इतना टूट गया कि उसे जिंदगी ही बोझ लगने लगी।

बताया जा रहा है कि राजवीर कुछ दिन पहले अपनी मौसी के घर जगन्नाथपुर सांकरा गांव शादी में गया हुआ था। 29 अप्रैल को जब 10वीं-12वीं का रिजल्ट आया, तो उसने मोबाइल पर अपना परिणाम देखा। उसी पल से उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। वह चुप रहने लगा, उदास रहने लगा, लेकिन शायद किसी ने उस चुप्पी के पीछे छिपे तूफान को नहीं समझा।

अगले दिन वह अपने भाई के साथ घर लौट आया, लेकिन मन का बोझ उसके साथ ही आया। सुबह जब काफी देर तक उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों ने खिड़की से देखा… और जो सामने था, उसने सब कुछ खत्म कर दियाराजवीर फांसी के फंदे पर झूल चुका था। एक पल में पूरे परिवार की दुनिया उजड़ गई।

घर वालों के अनुसार, राजवीर पिछले साल भी 10वीं में असफल हुआ था और इस बार भी वह पास नहीं हो पाया। उसकी कॉपी से एक नोट भी मिला, जिसमें उसने अपने परिवार के लिए प्यार तो जताया, लेकिन साथ ही यह दर्द भी लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। यही सोच उसके लिए इतनी भारी हो गई कि उसने जिंदगी से ही हार मान ली।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है…

  • क्या सच में परीक्षा में फेल होना इतना बड़ा अपराध है?
  • क्या नंबर ही किसी की जिंदगी की कीमत तय करते हैं?

    आज भी हमारे समाज में अंक और रिजल्ट को इतना बड़ा बना दिया गया है कि बच्चे असफलता को सहन ही नहीं कर पाते।

सच्चाई यह है कि एक परीक्षा में फेल होना जिंदगी का अंत नहीं होता। हर साल लाखों बच्चे असफल होते हैं, लेकिन वही बच्चे आगे चलकर नई राह बनाते हैं, सफल होते हैं। असफलता सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। जरूरत है तो बच्चों को यह समझाने की कि गिरना गलत नहीं, गिरकर उठना जरूरी है।

माता-पिता और समाज को भी यह समझना होगा कि बच्चों को दबाव नहीं, सहारा चाहिए। उन्हें डर नहीं, हौसला चाहिए। क्योंकि कई बार एक छोटी सी उम्मीद, एक समझदारी भरी बात… किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।

राजवीर अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन उसकी यह दर्दनाक कहानी शायद किसी और बच्चे को टूटने से बचा ले… यही इस खबर का सबसे बड़ा संदेश है।

“आंधी-तूफान का कहर: 17 राज्यों में हाई अलर्ट, 70KM/h की रफ्तार से चलेंगी हवाएं!”

IED ब्लास्ट: 4 जवान शहीद, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने दी थी इनपुट

कांकेर/नारायणपुर।
बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चल रहे डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए भीषण आईईडी विस्फोट में चार बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवा दी। यह हादसा थाना छोटेबेठिया क्षेत्र के अंतर्गत कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर हुआ।

शनिवार सुबह डीआरजी (District Reserve Guard) की टीम एरिया डॉमिनेशन और सर्च ऑपरेशन के लिए जंगलों की ओर रवाना हुई थी। टीम आत्मसमर्पित नक्सलियों के बताए ठिकाने पर डंप बारूद बरामद करने पहुँची थी। जवान बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे थे, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इलाके में हर कदम पर खतरा छिपा हो सकता है।

इसी दौरान, जैसे ही टीम एक संदिग्ध स्थान पर पहुँची और वहां छिपाए गए विस्फोटक डंप को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की, तभी अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भयानक था कि पूरा इलाका दहल उठा।

इस दर्दनाक घटना में मौके पर ही तीन जवान — इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले -शहीद हो गए। वहीं, गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा को एयरलिफ्ट कर रायपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर कई आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किए गए हैं। इससे साफ है कि माओवादी अब भी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जंगलों में छिपाकर रख रहे हैं।

यह घटना इस बात का भी संकेत है कि भले ही कई नक्सली आत्मसमर्पण कर अहम जानकारी दे रहे हैं, लेकिन जंगलों में पहले से छिपाए गए आईईडी अब भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बल लगातार ऐसे छिपे हुए बारूदी जाल को खोजकर निष्क्रिय करने में जुटे हैं।

MP: डैम की लहरों में समाई कई जिंदगियां, मां-बेटे की आई तस्वीर ने देश को झकझोरा

CG: “आंसुओं से मुस्कान तक: सरपंच ने मजदूरों को दिया जिंदगी का सबसे बड़ा गिफ्ट”

जिन्होंने कभी हवाई जहाज को दूर से देखा था… आज उसी में बैठकर भगवान के दर पहुंचे

अर्जुन्दा/बालोद 

छत्तीसगढ़: बालोद जिले के ग्राम टिकरी से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां की सरपंच ललिता रितेश देवांगन ने मजदूर दिवस (1 मई) के अवसर पर एक अनूठी पहल करते हुए गांव के पांच गरीब मजदूरों को हवाई जहाज से उड़ीसा स्थित जगन्नाथ पुरी मंदिर के दर्शन के लिए भेजा। खास बात यह है कि अब ये सभी मजदूर सुरक्षित पुरी पहुंच भी चुके हैं और अपने जीवन के इस खास पल को जी रहे हैं।

गांव के जिन मजदूरों ने अब तक हवाई जहाज को सिर्फ आसमान में उड़ते देखा था, उनके लिए यह यात्रा किसी सपने के साकार होने से कम नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों के लिए हवाई यात्रा करना लगभग असंभव था, लेकिन सरपंच की इस पहल ने उनके जीवन में खुशी और आत्मसम्मान की नई रोशनी भर दी है।

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पूरी यात्रा का खर्च सरपंच ललिता रितेश देवांगन स्वयं अपने मानदेय से वहन कर रही हैं। यह न केवल उनकी सेवा भावना को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि जनप्रतिनिधि अगर चाहें तो अपने स्तर पर भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

यह पहल केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मजदूरों के सम्मान और उनके योगदान को पहचान देने की एक सार्थक कोशिश है। रोजमर्रा की कठिन मेहनत के बीच इन मजदूरों को एक ऐसा अवसर मिला है, जो उनके जीवन की यादगार बन गया है।

 

सरपंच ललिता देवांगन इससे पहले भी अपने “मिशन अनमोल मुस्कान” के जरिए गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। इस मिशन के तहत बच्चों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई सकारात्मक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे गांव में जागरूकता और विकास का माहौल बना है।

सरपंच की इस पहल की चर्चा अब पूरे छत्तीसगढ़ में हो रही है। लोग इसे एक आदर्श जनसेवा और संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण मान रहे हैं। यह पहल यह संदेश देती है कि अगर नीयत साफ हो और सोच सकारात्मक हो, तो छोटे से गांव से भी बड़े बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

बालोद के टिकरी गांव से निकली यह कहानी सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है-जो यह सिखाती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल और सच्ची नीयत की जरूरत होती है।

CG: “शहादत की मिट्टी से उठी आवाज, सुकमा ने फिर लिखा इतिहास”

सुकमा शहादत की नींव पर खड़ा हुआ नक्सल मुक्त भविष्य दोरनापाल में ‘शहीद स्मारक’ का लोकार्पण
बुरकापाल के अमर शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, डीआईजी और कलेक्टर ने वीरों के बलिदान को किया नमन

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ सुकमा जिला आज नक्सलवाद के काले साये से मुक्त होकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। इस शांति और सुरक्षा के पीछे उन वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान है, जिन्होंने बुरकापाल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में राष्ट्र की एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसी कड़ी में आज शुक्रवार को 74वीं बटालियन मुख्यालय, दोरनापाल में वर्ष 2017 की बुरकापाल घटना में शहीद हुए 25 वीर जवानों की स्मृति में नवनिर्मित शहीद स्मारक का गरिमामय लोकार्पण किया गया।

सम्मान और गौरव का पल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित ने विधिवत पूजा-अर्चना कर स्मारक का अनावरण किया। इस दौरान वातावरण अत्यंत भावुक और श्रद्धामय रहा। उपस्थित अधिकारियों और जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने वीर साथियों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखकर उनकी अमर स्मृति को नमन किया।

संघर्ष से शांति तक का सफर
लोकार्पण के अवसर पर वर्ष 2017 की उस हृदयविदारक घटना को याद किया गया, जब दोरनापाल-जगरगुंडा मार्ग निर्माण के दौरान नक्सलियों ने कायराना हमला किया था। अधिकारियों ने बताया कि एक समय यह क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ था, जहाँ सड़क बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था।

आज अगर सुकमा नक्सल मुक्ति की दिशा में खड़ा है, तो इसका श्रेय उन जवानों को जाता है जिन्होंने जगरगुंडा मार्ग के पत्थर-पत्थर को अपने खून से सींचा है।

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कहा कि सुकमा अब नक्सलवाद के दंश से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे जवानों ने जो शहादत दी है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज बुरकापाल के वीरों की याद में स्मारक का लोकार्पण कर हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं

बुरकापाल घटनास्थल पर भी दी श्रद्धांजलि
दोरनापाल में कार्यक्रम के पश्चात डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, कमांडेंट हिमांशु पांडे और कमांडेंट कुमार मयंक सीधे बुरकापाल स्थित वास्तविक घटनास्थल पर पहुँचे। वहां स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को याद किया गया। उपस्थित सभी जवानों ने संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

बी.एड स्टूडेंट की हत्या: अफेयर के शक में ब्वॉयफ्रेंड बना कातिल

छत्तीसगढ़
दुर्ग से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां बी.एड की पढ़ाई के दौरान पनपे प्रेम संबंध का अंत दर्दनाक वारदात में हुआ। प्रेमी ने अपनी गर्लफ्रेंड की गला दबाकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला

मृत युवती की पहचान यूनेश्वरी वर्मा (26) के रूप में हुई है, जो खैरागढ़ जिले के चिचोला की रहने वाली थी और दुर्ग में रहकर पढ़ाई कर रही थी। आरोपी कार्तिक राम साहू (27) बालोद जिले का निवासी है।

दोनों की मुलाकात दुर्ग-बालोद रोड स्थित बी.एम. कॉलेज में बी.एड की पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई, लेकिन पिछले कुछ समय से रिश्ते में शक ने जगह बना ली थी।

शक बना हत्या की वजह

बताया जा रहा है कि आरोपी को संदेह था कि युवती का किसी और के साथ संबंध है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

घटना के दिन आरोपी कार्तिक युवती को अपने कमरे पर ले गया, जहां फिर से विवाद हुआ। गुस्से में आकर उसने युवती का गला दबा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

खुद ही पुलिस को दी सूचना

घटना के बाद आरोपी ने डायल-112 पर कॉल कर युवती के बेहोश होने की सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवती को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया है। शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और आगे की जांच जारी है।