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शनि. मई 16th, 2026

जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गई महिला पर भालू का हमला, हालत गंभीर

राकेश मिश्रा पेंड्रा

पेंड्रा-मरवाही जिले के धरहर गांव में तेंदू पत्ता तोड़ने जंगल गई एक 60 वर्षीय महिला पर भालू ने हमला कर दिया। इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही में भर्ती कराया गया है। यह घटना दिनांक 09 मई 2026 को हुई।

 

जानकारी के अनुसार, धरहर निवासी मनकी बाई प्रजापति (पति महाराजी लाल, उम्र 60 वर्ष) तेंदू पत्ता तोड़ने के लिए जंगल गई थीं। तभी एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। उनके साथ मौजूद अन्य महिलाओं ने शोर मचाया, जिसके बाद भालू जंगल की ओर भाग गया।

 

महिला की गंभीर हालत देखते हुए किसी ने तत्काल आपातकालीन सेवा डायल 108 को सूचना दी। ड्यूटी पर तैनात आपातकालीन स्टाफ ईएमटी गणेश्वर प्रसाद और पायलट दयाशंकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने डॉ. हिमांशु नहरेल के मार्गदर्शन में महिला को जीवन रक्षक दवाइयां दीं और प्राथमिक उपचार प्रदान किया।

 

इसके बाद, घायल महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरवाही में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उनका इलाज जारी है और उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

 

 

जिंदगी और सिस्टम के बीच 17 KM की दूरी

राहुल ठाकुर गरियाबंद

गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली का आलम इस तस्वीर से साफ झलकता है।


तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के दूरस्थ अंचल में बसे भालुडिग्गी गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं नाम मात्र की भी नहीं हैं।

यही वजह है कि ग्रामीणों को 17 किलोमीटर की कठिन और दुर्गम पहाड़ी, कंटीले जंगलों को पार कर बीमार मन्नू नेताम को खाट-कांवड़ नुमा बिस्तर में लादकर पैदल ले जाना पड़ा। ग्रामीण किसी तरह 17 किलोमीटर का सफर तय कर कुल्हाड़ीघाट पहुंचे।

समय रहते सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण मरीज को निजी वाहन से मैनपुर स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर कर भर्ती किया गया।

एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारें मुफ्त चिकित्सा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां करती है। यह साफ दर्शाता है कि सरकारी दावे केवल कागजों और वाहवाही तक ही सीमित रह जाते हैं।

बहरहाल, क्षेत्र के विधायक जनक राम ध्रुव ने भी सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इलाके में सड़क, शिक्षा, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर कई बार आमजन और जनप्रतिनिधियों द्वारा मांग और प्रदर्शन किए गए, लेकिन अब तक इन मांगों पर न तो अमल हुआ और न ही ग्रामीणों की सुध ली गई।

नतीजा सबके सामने है। अब इसे सिस्टम की नाकामी कहें या जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया।

वहीं इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी यू.एस. नवरत्न का कहना है कि भालुडिग्गी एक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र है, जहां न सड़क है और न ही मोबाइल कनेक्टिविटी। यही कारण है कि वहां एम्बुलेंस या 108 वाहन का पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने जल्द ही पहाड़ी के नीचे बसे गांव कुल्हाड़ीघाट में स्थायी रूप से 108 एम्बुलेंस तैनात करने की बात कही है।

फिलहाल, बीमार मन्नू राम नेताम का इलाज गरियाबंद जिला अस्पताल में जारी है।

बालोद में ‘मुरुम घोटाला’! किसानों के श्रमदान पर फर्जी बिल, 3.17 लाख की बंदरबांट का आरोप

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत और श्रमदान से तैयार हुए धान खरीदी केंद्र को कागजों में ‘घोटाले’ में बदल देने का आरोप लगा है।

मामला भर्रीटोला (43) सेवा सहकारी समिति से जुड़ा है, जहां समिति प्रबंधक भिखम लाल साहू और प्राधिकृत अधिकारी कुसुमकसा भाजपा नेता योगेंद्र सिन्हा पर पद के दुरुपयोग का आरोप है। बताया जा रहा है कि समिति के प्रबंधक के साथ मिलीभगत कर 3 लाख 17 हजार रुपये का फर्जी बिल लगाया गया और रकम निकाल ली गई।

 कैसे हुआ ‘खेल’?

 

ग्रामीणों के अनुसार, भर्रीटोला समेत आसपास के गांवों—रजहिं, ककरेल, देवपांडुम, चिपरा और जुनवानी—के करीब 815 किसान कुसुमकसा स्थित सेवा सहकारी समिति में धान बेचने जाते हैं। दूरी ज्यादा होने से परेशान किसानों ने अपने गांव में ही खरीदी केंद्र खोलने की मांग की थी।

मांग पूरी होने पर किसानों ने खुद चंदा इकट्ठा किया, मुरुम मंगवाया और श्रमदान कर जमीन समतल की। यानी पूरा काम गांव वालों ने अपने दम पर किया।

लेकिन आरोप है कि इसी काम के नाम पर समिति प्रबंधक ने योगेन्द्र सिन्हा फर्म के नाम से 3.17 लाख रुपये का फर्जी बिल लगाकर चेक जारी कर दिया।

खुलासा और फिर ‘डैमेज कंट्रोल’

जब यह मामला ग्रामीणों के बीच उजागर हुआ तो विवाद बढ़ने लगा। दबाव बढ़ते ही प्रबंधक भिखम लाल साहू ने रकम वापस समिति के खाते में जमा करा दी। लेकिन सवाल यह है कि अगर गड़बड़ी नहीं थी, तो पैसे लौटाने की नौबत क्यों आई?

किसानों का आरोप

ग्रामीणों का साफ कहना है—

“जब हमने खुद चंदा और श्रमदान से काम किया, तो फिर लाखों रुपये का भुगतान किस बात का किया गया? यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है, इसकी जांच होनी चाहिए।”

प्रबंधक की सफाई

समिति प्रबंधक का कहना है कि उन्हें प्राधिकृत अधिकारी योगेंद्र सिन्हा द्वारा चेक दिया गया था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि मुरुम ग्रामीणों ने खुद डलवाया है। बाद में जानकारी मिलने पर राशि वापस जमा कर दी गई।

बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि सहकारी समितियों में संभावित भ्रष्टाचार के उस मॉडल की झलक है, जहां
👉 कागजों में काम दिखाकर पैसे निकाले जाते हैं
👉 ग्रामीणों की मेहनत पर ‘फर्जी बिल’ बनते हैं

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फिर से ‘रफा-दफा’ कर दिया जाएगा।

जिला अस्पताल पहुँचे संभाग आयुक्त, वार्ड-ओपीडी का लिया जायजा, मरीजों से की बातचीत

बालोद | दुर्ग संभाग के संभाग आयुक्त S. N. Rathore ने शुक्रवार को जिला चिकित्सालय बालोद का आकस्मिक निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों और कक्षों में पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर कलेक्टर Divya Umesh Mishra, एसडीएम Nutan Kanwar, मुख्य अस्पताल अधीक्षक Dr. R. K. Shrimali सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान संभाग आयुक्त ने जिला चिकित्सालय के ओपीडी, सामान्य रोगी कक्ष, नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग, आपातकालीन कक्ष, पुरुष एवं महिला मेडिकल वार्ड सहित कई विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने ईएनटी विभाग के ओपीडी में उपस्थित चिकित्सकों से मरीजों की जांच के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी भी ली।

राठौर ने पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने मरीज निर्मल से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों और अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारियों को मरीजों का समुचित उपचार करने के साथ उनके प्रति मधुर और आत्मीय व्यवहार रखने की भी समझाइश दी।

निरीक्षण के दौरान संभाग आयुक्त ने अधिकारियों को जिला चिकित्सालय परिसर में प्रतीक्षालय और कैंटीन निर्माण के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

बिग ब्रेकिंग: बालोद में स्कूल वैन हादसा, एक बच्ची की मौत, कई घायल

जानकारी के अनुसार, आजाद पब्लिक स्कूल डौण्डी की वैन छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने मरारटोला जा रही थी। इसी दौरान मरारटोला नाला के पास पुल से वैन नीचे गिर गई। वैन में कुल 21 बच्चे सवार थे।

🚨 नशे में क्लीनर चला रहा था वैन

प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि वैन चालक की जगह क्लीनर वाहन चला रहा था, जो शराब के नशे में था। इस गंभीर लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

🏥 108 से पहुंचाया गया अस्पताल

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को 108 एंबुलेंस के माध्यम से डौण्डी उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

⚫ मृत बच्ची की पहचान

हादसे में जान गंवाने वाली बालिका की पहचान वेदांसी, पिता स्वर्गीय चिम्मन लाल साहू के रूप में हुई है। मासूम की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

👮 पुलिस जांच में जुटी

डौण्डी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक की भूमिका की भी जांच होगी।


यह हादसा एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

फिल्मी कहानी जैसी हकीकत: जेल की सलाखों के बीच जन्मी नई ज़िंदगी

CHHATTISGARH/ अक्सर बॉलीवुड फिल्मों में ऐसी कहानी देखने को मिलती है, जहां किसी अपराध के आरोप में जेल गई नायिका सलाखों के पीछे बच्चे को जन्म देती है। दर्शक इसे पर्दे की कहानी समझकर भावुक हो जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हकीकत में सामने आया है, जिसने कानून, कर्तव्य और संवेदनाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

दुर्ग के मोहन नगर थाने में पदस्थ रही बर्खास्त प्रधान महिला आरक्षक मोनिका गुप्ता को गबन के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। गिरफ्तारी के समय वह नौ माह की गर्भवती थीं। जेल में रहते हुए उन्होंने एक नवजात बच्चे को जन्म दिया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस थाने में वह कभी ड्यूटी करती थीं, उसी पुलिस महकमे ने कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा।

 

क्या है पूरा मामला?

मामला 4 जुलाई 2022 का है, जब सिंधिया नगर निवासी सोनाली द्विवेदी के घर से 79 ग्राम सोने के गहनों की चोरी हुई थी। इस पर मोहन नगर थाने में अपराध क्रमांक 226/2022 दर्ज किया गया। जांच की जिम्मेदारी प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता को सौंपी गई थी।

 

30 जून 2023 को पुलिस ने आरोपी पीतांबर राव को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब 79 ग्राम सोने के आभूषण और सिक्का बरामद किया। आरोप है कि जब्त माल को थाने के मालखाने में जमा किया जाना था, लेकिन मोनिका ने उसे जमा नहीं कराया और अपने पास रख लिया।

 

जब पीड़िता ने कोर्ट के माध्यम से गहनों की सुपुर्दगी के लिए आवेदन किया और थाने पहुंची, तब खुलासा हुआ कि जब्त जेवर मालखाने में जमा ही नहीं हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बावजूद गहने वापस नहीं किए गए।

 

FIR, फरारी और गिरफ्तारी

मार्च 2025 में मोनिका गुप्ता के खिलाफ साक्ष्य छिपाने और अमानत में खयानत की धाराओं में FIR दर्ज की गई। इसके बाद से वह फरार चल रही थीं। कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद 2 फरवरी 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

 

जेल प्रशासन के अनुसार गर्भवती होने के कारण उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा और देखभाल उपलब्ध कराई गई। इसी दौरान उन्होंने जेल में बच्चे को जन्म दिया।

 

पहले भी विवादों में रही

बताया जा रहा है कि अगस्त 2024 में भिलाई के छावनी थाने में उनके खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज हुआ था। इन प्रकरणों के बाद उन्हें पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिया गया था।

 

भावनात्मक सवाल

यह घटना एक संवेदनशील प्रश्न खड़ा करती है—क्या मां की गलती की सजा उस नवजात को भी भुगतनी पड़ रही है, जिसने अभी दुनिया में कदम रखा है?

 

भावनात्मक सवाल

यह मामला कानून और संवेदनाओं के बीच खड़ी एक सच्चाई को सामने लाता है। एक ओर कानून अपना काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जेल में जन्मे उस नवजात को लेकर समाज में भावनात्मक चर्चा भी शुरू हो गई है।

 

फिलहाल आरोपी महिला न्यायिक हिरासत में हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

 

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ब्रेकिंग बालोद : इंग्लिश टीचर की अनुपस्थिति से नाराज़ ग्रामीणों ने स्कूल में जड़ा ताला

ग्रामीणों का आरोप है कि दल्ली राजहरा से आने वाली इंग्लिश शिक्षिका तवीसी अंसारी नियमित रूप से स्कूल नहीं आतीं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस संबंध में कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों के साथ छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर खुले आसमान और पेड़ के नीचे बैठकर विरोध जता रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि वर्तमान इंग्लिश टीचर को हटाकर नए शिक्षक की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।

मामले में शिक्षा विभाग और प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है।

गरियाबंद ब्रेकिंग@ अमलीपदर इलाके से पुलिस ने तीन वाहनों से जब्त किया 142 किवंटल धान

गरियाबंद ब्रेकिंग @ गरियाबंद के अमलीपदर इलाके से पुलिस ने तीन वाहनों से जब्त किया 142 किवंटल धान.जब्त धान की कीमत 4 लाख 40 हजार 200 रुपए.दो ट्रैक्टर को पुलिस ने ध्रुवापथरा के नदी से पकड़ा, जबकि 1109 को बिरिघाट में एक खेत से पकड़ा गया.

1109 में 200 बोरी धान, एक ट्रेक्टर में 60 बोरी, जबकि दूसरे ट्रैक्टर में 54 बोरी धान लोड था.ओडिशा के व्यापारी धान को अवैध तरीके से छत्तीसगढ़ में खपाने की फिराक में थे.नदियों के रास्ते ओड़िशा से छत्तीसगढ़ लाया जा रहा था अवैध धान का बड़ा खेप.तस्करों के मंसूबे को पुलिस ने किया नाकाम.पुलिस ने धान सहित तीन वाहनों को किया जब्त.

स्कूल का मैदान बना मदिराप्रेमियों का अड्डा, स्थानीय लोग परेशान

रायपुर /समोदा @ नवीन नगरपंचायत समोदा के शासकीय प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालय का मैदान इन दिनों मदिराप्रेमियों का अड्डा बनता जा रहा है। देर शाम से लेकर रात तक मैदान में शराब पीने, गुटखा–सिगरेट पीने और आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त लोगों का जमावड़ा देखा जा रहा है। इससे स्कूल परिसर की सुरक्षा और माहौल दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि रोज़ाना नशे में धुत व्यक्तियों के जमने से बच्चों में भय का माहौल बन गया है। सुबह स्कूल आने वाले छात्रों को मैदान में जगह-जगह खाली शराब की बोतलें, डिस्पोज़ल गिलास तथा सिगरेट के अवशेष दिखाई देते हैं, जिससे स्वच्छता भी प्रभावित हो रही है।ग्रामीणों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए स्थानीय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा का वातावरण और स्कूल की गरिमा पर गंभीर असर पड़ेगा।

स्कूल प्रबंधन ने भी इस समस्या की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है और मैदान में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल्द ही क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए और ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों के लिए स्कूल का वातावरण सुरक्षित और स्वच्छ बना रहे।

नवीन सुरक्षा कैम्प पल्लेवाया – अबूझमाड़ में विकास व सुरक्षा की नई राह

दंतेवाड़ा @ अति नक्सल प्रभावित बीजापुर व अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम पल्लेवाया में दंतेवाड़ा पुलिस एवं CRPF की 165वीं बटालियन द्वारा नया फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (F.O.B.) स्थापित किया गया है। यह कदम लंबे समय से नक्सलियों के कोर जोन रहे इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की नई शुरुआत माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजना “नियद नेल्लानार” के तहत इस कैंप की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना तथा शासन की योजनाओं का लाभ दूर-दराज आबादी तक पहुंचाना है।

पल्लेवाया में बनाए गए इस सुरक्षा कैम्प से बीजापुर और नारायणपुर जिले के अब तक पहुंचविहीन कई गांव अब सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस दुकानें, शिक्षा सहित सभी मूलभूत सुविधाओं से बेहतर रूप से जुड़ सकेंगे।

यह महत्वपूर्ण स्थापना बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., सीआरपीएफ के पुलिस महानिरीक्षक श्री शालीन, दंतेवाड़ा रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक कमलोचन कश्यप, तथा सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों— राकेश चौधरी, मृत्युंजय कुमार, विवेकानंद सिंह, राजन कुमार, डॉक्टर आशीष शांडिल्य एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राम कुमार बर्मन के निर्देशन में पूरी हुई।

इस अभियान में दंतेवाड़ा और बीजापुर पुलिस, CRPF की 165वीं बटालियन, कोबरा 201 वाहिनी तथा यंग प्लाटून 231, 111 और 165 वाहिनी के जवानों की सक्रिय व संयुक्त भागीदारी रही।

बताया गया कि 4 दिसम्बर 2025 को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद सुरक्षा बलों ने अथक प्रयास कर कैम्प की स्थापना की। इस दौरान क्षेत्र में स्थित नक्सली स्मारकों को भी ध्वस्त किया गया। जवानों ने स्थानीय जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए दिन-रात लगातार निर्माण कार्य जारी रखा। यह F.O.B. सुरक्षा बलों की असाधारण वीरता, दृढ़ इच्छाशक्ति और पेशेवर क्षमता का प्रतीक बताया जा रहा है।

पल्लेवाया में स्थापित यह नया सुरक्षा कैम्प अबूझमाड़ के भीतरी इलाकों में सुरक्षा और शासन की पहुँच मजबूत करेगा। इससे क्षेत्र में शांति, विश्वास एवं विकास के नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है। यह पहल केंद्र सरकार के उस लक्ष्य को भी गति प्रदान करती है, जिसके तहत वर्ष 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पल्लेवाया FOB की स्थापना “विकास ही सुरक्षा” की नीति को मजबूत करते हुए अबूझमाड़ में स्थायी शांति, समृद्धि और प्रगति की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।