Breaking
शनि. मई 16th, 2026

जिंदगी और सिस्टम के बीच 17 KM की दूरी

राहुल ठाकुर गरियाबंद

गरियाबंद जिले में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली का आलम इस तस्वीर से साफ झलकता है।


तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के दूरस्थ अंचल में बसे भालुडिग्गी गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं नाम मात्र की भी नहीं हैं।

यही वजह है कि ग्रामीणों को 17 किलोमीटर की कठिन और दुर्गम पहाड़ी, कंटीले जंगलों को पार कर बीमार मन्नू नेताम को खाट-कांवड़ नुमा बिस्तर में लादकर पैदल ले जाना पड़ा। ग्रामीण किसी तरह 17 किलोमीटर का सफर तय कर कुल्हाड़ीघाट पहुंचे।

समय रहते सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण मरीज को निजी वाहन से मैनपुर स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर कर भर्ती किया गया।

एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारें मुफ्त चिकित्सा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां करती है। यह साफ दर्शाता है कि सरकारी दावे केवल कागजों और वाहवाही तक ही सीमित रह जाते हैं।

बहरहाल, क्षेत्र के विधायक जनक राम ध्रुव ने भी सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इलाके में सड़क, शिक्षा, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर कई बार आमजन और जनप्रतिनिधियों द्वारा मांग और प्रदर्शन किए गए, लेकिन अब तक इन मांगों पर न तो अमल हुआ और न ही ग्रामीणों की सुध ली गई।

नतीजा सबके सामने है। अब इसे सिस्टम की नाकामी कहें या जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया।

वहीं इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी यू.एस. नवरत्न का कहना है कि भालुडिग्गी एक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र है, जहां न सड़क है और न ही मोबाइल कनेक्टिविटी। यही कारण है कि वहां एम्बुलेंस या 108 वाहन का पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने जल्द ही पहाड़ी के नीचे बसे गांव कुल्हाड़ीघाट में स्थायी रूप से 108 एम्बुलेंस तैनात करने की बात कही है।

फिलहाल, बीमार मन्नू राम नेताम का इलाज गरियाबंद जिला अस्पताल में जारी है।

जिला अस्पताल पहुँचे संभाग आयुक्त, वार्ड-ओपीडी का लिया जायजा, मरीजों से की बातचीत

बालोद | दुर्ग संभाग के संभाग आयुक्त S. N. Rathore ने शुक्रवार को जिला चिकित्सालय बालोद का आकस्मिक निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों और कक्षों में पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर कलेक्टर Divya Umesh Mishra, एसडीएम Nutan Kanwar, मुख्य अस्पताल अधीक्षक Dr. R. K. Shrimali सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान संभाग आयुक्त ने जिला चिकित्सालय के ओपीडी, सामान्य रोगी कक्ष, नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग, आपातकालीन कक्ष, पुरुष एवं महिला मेडिकल वार्ड सहित कई विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने ईएनटी विभाग के ओपीडी में उपस्थित चिकित्सकों से मरीजों की जांच के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी भी ली।

राठौर ने पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने मरीज निर्मल से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों और अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारियों को मरीजों का समुचित उपचार करने के साथ उनके प्रति मधुर और आत्मीय व्यवहार रखने की भी समझाइश दी।

निरीक्षण के दौरान संभाग आयुक्त ने अधिकारियों को जिला चिकित्सालय परिसर में प्रतीक्षालय और कैंटीन निर्माण के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

नवीन सुरक्षा कैम्प पल्लेवाया – अबूझमाड़ में विकास व सुरक्षा की नई राह

दंतेवाड़ा @ अति नक्सल प्रभावित बीजापुर व अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम पल्लेवाया में दंतेवाड़ा पुलिस एवं CRPF की 165वीं बटालियन द्वारा नया फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (F.O.B.) स्थापित किया गया है। यह कदम लंबे समय से नक्सलियों के कोर जोन रहे इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास की नई शुरुआत माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजना “नियद नेल्लानार” के तहत इस कैंप की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना तथा शासन की योजनाओं का लाभ दूर-दराज आबादी तक पहुंचाना है।

पल्लेवाया में बनाए गए इस सुरक्षा कैम्प से बीजापुर और नारायणपुर जिले के अब तक पहुंचविहीन कई गांव अब सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस दुकानें, शिक्षा सहित सभी मूलभूत सुविधाओं से बेहतर रूप से जुड़ सकेंगे।

यह महत्वपूर्ण स्थापना बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., सीआरपीएफ के पुलिस महानिरीक्षक श्री शालीन, दंतेवाड़ा रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक कमलोचन कश्यप, तथा सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों— राकेश चौधरी, मृत्युंजय कुमार, विवेकानंद सिंह, राजन कुमार, डॉक्टर आशीष शांडिल्य एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राम कुमार बर्मन के निर्देशन में पूरी हुई।

इस अभियान में दंतेवाड़ा और बीजापुर पुलिस, CRPF की 165वीं बटालियन, कोबरा 201 वाहिनी तथा यंग प्लाटून 231, 111 और 165 वाहिनी के जवानों की सक्रिय व संयुक्त भागीदारी रही।

बताया गया कि 4 दिसम्बर 2025 को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद सुरक्षा बलों ने अथक प्रयास कर कैम्प की स्थापना की। इस दौरान क्षेत्र में स्थित नक्सली स्मारकों को भी ध्वस्त किया गया। जवानों ने स्थानीय जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए दिन-रात लगातार निर्माण कार्य जारी रखा। यह F.O.B. सुरक्षा बलों की असाधारण वीरता, दृढ़ इच्छाशक्ति और पेशेवर क्षमता का प्रतीक बताया जा रहा है।

पल्लेवाया में स्थापित यह नया सुरक्षा कैम्प अबूझमाड़ के भीतरी इलाकों में सुरक्षा और शासन की पहुँच मजबूत करेगा। इससे क्षेत्र में शांति, विश्वास एवं विकास के नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है। यह पहल केंद्र सरकार के उस लक्ष्य को भी गति प्रदान करती है, जिसके तहत वर्ष 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पल्लेवाया FOB की स्थापना “विकास ही सुरक्षा” की नीति को मजबूत करते हुए अबूझमाड़ में स्थायी शांति, समृद्धि और प्रगति की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

समोदा रोड हादसा : दो बाइकों की आमने–सामने भिड़ंत, एक युवक गंभीर रूप से घायल

समोदा @ क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को समोदा मार्ग पर एक बार फिर दो बाइकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ़्तार में आ रही दोनों मोटरसाइकिलें अचानक आमने-सामने भिड़ गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन सड़क पर दूर तक घिसटते चले गए। हादसे में एक युवक को गम्भीर चोटें आईं, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया। दूसरे बाइक सवार को भी हल्की चोटें आई हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि समोदा रोड पर एक भी जगह गतिवरोधक नहीं होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं। लोगों ने प्रशासन से अपील की है इस सड़क पर स्कूल कॉलेज व हॉस्टल संचालित है जिसको देखते हुए यहां जल्द से जल्द गतिवरोधक बनाने की मांग की है।

देशी उपचार और झोला छाप डॉक्टर के चक्कर में फंसे एक ही परिवार के 3 मासूम बच्चों के मौत का मामला

राहुल ठाकुर गरियाबंद @ देशी उपचार और झोला छाप डॉक्टर के चक्कर में फंसे एक ही परिवार के 3 मासूम बच्चों के मौत का मामला सामने आया है, मामला अमलीपदर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन आने वाले ग्राम धनौरा का है, यहां रहने वाले डमरूधर नागेश मक्का तुड़ाई के लिए उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में मौजूद अपने ससुराल साहेबीनकछार गया हुआ था।

सप्ताह भर रहा और बच्चों के तबियत बिगड़ने पर लौट आया, साथ में गए तीनों बच्चे को बुखार आया, उसी इलाके में पहले झोलाछाप से इलाज कराया, गांव लौटा तो झाड़ फूंक कराता रहा, गांव की मितानीन को भनक लगी तो उसने अस्पताल चलने कहा, पर नागेश परिवार अंतिम सांस चलने तक उपचार के दूसरे तरीकों का सहारा लेता रहा, पहली मौत 11 नवंबर को 8 साल की बेटी अनिता का हुआ, मां के आंखों से आंसू थमें ही नहीं थे, कि 13 नवम्बर को दूसरी मौत 7 साल के बेटा बालक का और इसी दिन कुछ घंटे बाद 4 साल के बेटे गोरेश्वर की भी सांसे थम गई, एक ही परिवार के तीनों चिराग बुझने की इस घटना ने जहां झकझोर कर रख दिया है।

वहीं इस जानलेवा बिमारी से ग्रामीणों में दहशत भी बना हुआ है, मौतों की जानकारी लगने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी यू एस नवरत्न ने 3 सदस्यी जांच दल गठित कर दिया है, टीम गांव पहुंच कर अब कारण जानने में जुटी हुई है, इस इलाके में आधी अधूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते आधुनिक चिकित्सा पर भरोसा उठ गया है, पहले भी इस गांव में सर्प दंश के चलते एक ही परिवार के 2 सदस्यों की मौत झड़फूक से हुई थी, वनांचल में झोलाछाप डॉक्टर भी सक्रिय है, जो स्वास्थ्य विभाग के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

वहीं जिले के सीएमएचओ ने विभागीय जांच की बात कही है, साथ ही रायपुर से एक टीम भी इस गांव में पहुंचकर जांच करेगी जहां एक ही परिवार के तीन बच्चों की अचानक मौत हुई है, मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा साथ ही जनजागरूकता कार्यक्रम उस क्षेत्र में चलाया जाएगा, उसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी बात कर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्वास्थ विभाग लोगों को मेडिकल साइंस के प्रति विश्वास जगाने कार्यक्रम आयोजित करेगी।

बस का इंतजार कर रहे यात्रियों में जा घुसी अनियंत्रित कार, 1 की मौत 2 घायल, घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी

पेंड्रा @ जिले के सिवनी मझगवां गांव के मुख्य मार्ग पर शनिवार सुबह एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बस का इंतजार कर रहे लोगों में जा घुसी। इस हादसे में एक अधेड़ व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।हादसे में एक महिला और एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार चालक नशे में धुत था। हादसे के बाद ग्रामीणों ने आरोपी चालक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद आक्रोशित लोगों ने मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। थाना प्रभारी रणछोड़ सिंह सेंगर ने बताया कि हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई है और घायलों को अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि घायल कार चालक का भी इलाज कराया जा रहा है।

बस्तर में 210 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, मुख्यधारा में लौटे कदम

जगदलपुर @ सरकार की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति के परिणामस्वरूप दण्डकारण्य क्षेत्र के लगभग 210 माओवादी कैडर, जिनमें कई बड़े सदस्य भी शामिल हैं, हिंसा का मार्ग छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।यह कदम सरकार के मार्गदर्शन में पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और जागरूक समाज के निरंतर एवं ईमानदार प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।शांति, संवाद और विकास पर केंद्रित पहल ने अनेक कैडरों को सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर किया है।

इन कैडरों के औपचारिक पुनर्समावेशन समारोह का आयोजन शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11 बजे, रिजर्व पुलिस लाइन, जगदलपुर (जिला बस्तर) में किया जाएगा।इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री, माननीय उपमुख्यमंत्री एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री/गृहमंत्री छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पत्रकार वार्ता आयोजित की जाएगी।

सरकार ने इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों और नागरिक समाज का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने शांतिपूर्ण और समृद्ध बस्तर की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाई है।

नकली कफ सिरप बेचने वाले कुलेश्वर नाथ मेडिकल स्टोर्स को खाद्य एवं औषधीय विभाग द्वारा किया गया सिल

गरियाबंद @ जिले के राजिम में नकली कफ सिरप बेचने वाले कुलेश्वर नाथ मेडिकल स्टोर्स को खाद्य एवं औषधीय विभाग द्वारा सिल कर दिया गया है, मेडिकल का लायसेंस रद्द करने के अलावा विभाग जल्द ही कोर्ट में परिवाद पेश कर संचालक के खिलाफ बड़ी कार्यवाही करने की तैयारी कर रही है।

दरअसल विभाग को सूचना मिली थी, कि संचालक एक्सपायरी दवाओं पर रि टैगिंग कर बेचता है, जुलाई माह में ड्रग इंस्पेक्टर की जंबो टिम ने छापा मारा तो नशीली टेबलेट के अलावा कई बिंदुओं में व्यापक अनियमितता मिली थी, इस दरम्यान एक कफ सिरप भी जप्त किया, जिसकी जांच कराई गई, 11 अक्टूबर को आई रिपोर्ट चौंकाने वाला था, सिरप के लेबल में उल्लेख कंटेंट जांच में अमानक मिले, मात्रा भी कम पाया गया।

इसके अलावा फर्म ने जांच के दरम्यान जिस डिस्टुब्टर का बिल लगाया था, वह भी फर्जी निकला, अब खाद्य औषधि प्रशासन मामले से जुड़ी बारीकियों की जांच में जुट गई है, पता लगा रही है, कि ये दवा किस जगह से आ रहा था, या मेडिकल संचालक खुद बना रहा था, जिले में और कितनी जगह बांट दी गई उसकी जांच भी अफसर कर रहे हैं।

इस योजना से नया जीवन दिया दिव्यांग शंकर को,घर लौटते समय सड़क दुर्घटना में हुआ था घायल,आइये जाने किस योजना से हुआ निःशुल्क उपचार

रायपुर @ 32 वर्षीय शंकर गुप्ता पहले से ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। रोज़ की तरह वे घर लौट रहे थे, इस दौरान आकस्मिक दुर्घटना में शंकर के पैर की हड्डियाँ चार जगहों से टूट गईं जिनमें घुटने का पटेला, फीमर और लांग बोन क्षति हुई। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने बताया कि स्थिति गंभीर है और सर्जरी ही एकमात्र उपाय है। आयुष्मान भारत योजना से शंकर का निःशुल्क उपचार हुआ, जिससे उसे नया जीवन मिला।

जिले के विकासखण्ड रामचन्द्रपुर अंतर्गत ग्राम चाकी निवासी 32 वर्षीय शंकर गुप्ता  का इलाज का अनुमानित खर्च लगभग 80 हजार रुपये बताया गया। सीमित साधनों वाला परिवार असमंजस में था कि इतनी बड़ी रकम ईलाज के लिए कहाँ से लाए। ऐसी स्थिति में आयुष्मान भारत योजना उनके लिए संजीवनी बनकर आई। योजना के अंतर्गत उनका पूरा ईलाज निःशुल्क हुआ। सर्जरी, सीटी स्कैन और दवाइयाँ सभी इसी योजना के तहत कवर हुईं। सर्जरी सफल रही और अब शंकर की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। चिकित्सकों की निगरानी में वे पुनः खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं।

ईलाज पूरा होने के बाद शंकर भावुक स्वर में कहते हैं, मैं पहले से दिव्यांग हूँ, दुर्घटना के बाद लगा कि अब शायद जीवनभर चल नहीं पाऊँगा। लेकिन आयुष्मान योजना मेरे लिए वरदान बन गई। यदि आयुष्मान योजना न होती तो मेरा ईलाज संभव नहीं था। सरकार की इस योजना ने मुझे न सिर्फ ईलाज, बल्कि दोबारा जीने का हौसला दिया है। शंकर गुप्ता की यह कहानी बताती है कि जब सरकारी योजनाएं सही जरूरतमंद तक पहुँचती हैं, तो वे किसी के लिए नया जीवन बन जाती हैं।

आंगनबाड़ी सेवाओं से कुपोषित शिवांश हुआ स्वस्थ,समन्वित प्रयासों और संतुलित आहार से मिला कुपोषण पर विजय

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी @ कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में चल रहे प्रयासों का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिख रहा है। मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के ग्राम चौनपुर के आंगनबाड़ी केन्द्र नवापारा से जुड़े बालक शिवांश ने आंगनबाड़ी सेवाओं और परिवार के समन्वित प्रयासों से कुपोषण पर विजय पाई।

शिवांश का जन्म 12 जुलाई 2024 को हुआ था। जन्म के समय उसका वजन 2.700 किलोग्राम था। जन्म के बाद  पोषण की उचित देखभाल न होने से उसका वजन घटकर कुपोषण की श्रेणी में पहुँच गया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन ने नियमित वजन मापन के दौरान स्थिति की पहचान की और तत्काल गृहभेंट कर परिवार को उचित परामर्श दिया।लालसा कुमारी को समझाया गया कि वे अपने भोजन में अंकुरित अनाज, मौसमी फल, मुनगा भाजी, दूध, हरी सब्जियाँ और प्रोटीनयुक्त भोजन शामिल करें। बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी आहार जैसे दलिया, खिचड़ी, गाढ़ी दाल, पंजीरी, लपशी और हलुआ प्रतिदिन 4-5 बार हल्के रूप में देने की सलाह दी गई। आंगनबाड़ी केन्द्र से मिलने वाले रेडी टू ईट आहार का नियमित सेवन कराया गया। साथ ही परिवार को स्वच्छता, टीकाकरण और समय पर वजन मापन के लिए प्रेरित किया गया।

शिशु अवस्था के दौरान तेज़ी से विकास और वृद्धि के लिए उचित पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने के बाद, स्तनपान बंद करने वाले या पूरक आहार देना ज़रूरी है। ये आहार पोषक तत्वों से भरपूर होने चाहिए, जिनमें मसले हुए फल, सब्ज़ियाँ और अनाज शामिल हों, ताकि शिशु को पर्याप्त विटामिन और खनिज मिल सकें। लगातार देखरेख और पौष्टिक आहार के सेवन से शिवांश का वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगा। कुछ ही महीनों में उसका वजन सामान्य श्रेणी में पहुँच गया। अब वह स्वस्थ और सक्रिय है।

यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि आंगनबाड़ी की सेवाओं, मितानिन और परिवार को संयुक्त प्रयास करने से कुपोषण जैसी चुनौती पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि शिवांश जैसी प्रेरक कहानियाँ बताती हैं कि जागरूकता, सामुदायिक सहयोग और पोषण आहार के नियमित उपयोग से “सुपोषित छत्तीसगढ़” का सपना साकार हो रहा है।