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शनि. मई 16th, 2026

IED ब्लास्ट: 4 जवान शहीद, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने दी थी इनपुट

कांकेर/नारायणपुर।
बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चल रहे डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए भीषण आईईडी विस्फोट में चार बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवा दी। यह हादसा थाना छोटेबेठिया क्षेत्र के अंतर्गत कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर हुआ।

शनिवार सुबह डीआरजी (District Reserve Guard) की टीम एरिया डॉमिनेशन और सर्च ऑपरेशन के लिए जंगलों की ओर रवाना हुई थी। टीम आत्मसमर्पित नक्सलियों के बताए ठिकाने पर डंप बारूद बरामद करने पहुँची थी। जवान बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे थे, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इलाके में हर कदम पर खतरा छिपा हो सकता है।

इसी दौरान, जैसे ही टीम एक संदिग्ध स्थान पर पहुँची और वहां छिपाए गए विस्फोटक डंप को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की, तभी अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भयानक था कि पूरा इलाका दहल उठा।

इस दर्दनाक घटना में मौके पर ही तीन जवान — इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले -शहीद हो गए। वहीं, गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा को एयरलिफ्ट कर रायपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर कई आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किए गए हैं। इससे साफ है कि माओवादी अब भी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जंगलों में छिपाकर रख रहे हैं।

यह घटना इस बात का भी संकेत है कि भले ही कई नक्सली आत्मसमर्पण कर अहम जानकारी दे रहे हैं, लेकिन जंगलों में पहले से छिपाए गए आईईडी अब भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बल लगातार ऐसे छिपे हुए बारूदी जाल को खोजकर निष्क्रिय करने में जुटे हैं।

CG: “शहादत की मिट्टी से उठी आवाज, सुकमा ने फिर लिखा इतिहास”

सुकमा शहादत की नींव पर खड़ा हुआ नक्सल मुक्त भविष्य दोरनापाल में ‘शहीद स्मारक’ का लोकार्पण
बुरकापाल के अमर शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, डीआईजी और कलेक्टर ने वीरों के बलिदान को किया नमन

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ सुकमा जिला आज नक्सलवाद के काले साये से मुक्त होकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। इस शांति और सुरक्षा के पीछे उन वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान है, जिन्होंने बुरकापाल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में राष्ट्र की एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसी कड़ी में आज शुक्रवार को 74वीं बटालियन मुख्यालय, दोरनापाल में वर्ष 2017 की बुरकापाल घटना में शहीद हुए 25 वीर जवानों की स्मृति में नवनिर्मित शहीद स्मारक का गरिमामय लोकार्पण किया गया।

सम्मान और गौरव का पल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित ने विधिवत पूजा-अर्चना कर स्मारक का अनावरण किया। इस दौरान वातावरण अत्यंत भावुक और श्रद्धामय रहा। उपस्थित अधिकारियों और जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने वीर साथियों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखकर उनकी अमर स्मृति को नमन किया।

संघर्ष से शांति तक का सफर
लोकार्पण के अवसर पर वर्ष 2017 की उस हृदयविदारक घटना को याद किया गया, जब दोरनापाल-जगरगुंडा मार्ग निर्माण के दौरान नक्सलियों ने कायराना हमला किया था। अधिकारियों ने बताया कि एक समय यह क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ था, जहाँ सड़क बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था।

आज अगर सुकमा नक्सल मुक्ति की दिशा में खड़ा है, तो इसका श्रेय उन जवानों को जाता है जिन्होंने जगरगुंडा मार्ग के पत्थर-पत्थर को अपने खून से सींचा है।

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कहा कि सुकमा अब नक्सलवाद के दंश से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे जवानों ने जो शहादत दी है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज बुरकापाल के वीरों की याद में स्मारक का लोकार्पण कर हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं

बुरकापाल घटनास्थल पर भी दी श्रद्धांजलि
दोरनापाल में कार्यक्रम के पश्चात डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, कमांडेंट हिमांशु पांडे और कमांडेंट कुमार मयंक सीधे बुरकापाल स्थित वास्तविक घटनास्थल पर पहुँचे। वहां स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को याद किया गया। उपस्थित सभी जवानों ने संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

जहाँ कभी खामोशी में गूंजती थी गोलियों की आवाज… अब वहीं गूंजेगा भक्ति का शंखनाद

“डर से विश्वास तक की यात्रा”।

धर्मेन्द्र सिंग बीजापुर…

छत्तीसगढ़/बीजापुर के घने जंगल जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चा में रहते थे अब एक नई पहचान गढ़ने जा रहे हैं।
यहां लगने वाला “सकल नारायण मेला” अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बदलाव, विश्वास और शांति की मिसाल बनता जा रहा है।

नक्सल साये से आस्था के उजाले तक

एक समय था जब इन जंगलों में कदम रखना भी खतरे से खाली नहीं था। नक्सल प्रभाव के चलते यह इलाका लंबे समय तक भय और असुरक्षा का केंद्र बना रहा।
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, सुरक्षा बलों की सक्रियता और प्रशासन की रणनीति के चलते नक्सल असर कम हुआ है।

और इसी बदलाव के बीच अब यहां हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने वाला है।

🕉️ क्या है सकल नारायण मेला?

यह मेला भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा को समर्पित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहाड़ी पर स्थित गुफा में विशेष शक्ति है, जहां भीषण गर्मी में भी गुफा के भीतर ठंडक बनी रहती है, गुफा की मिट्टी को चमत्कारी माना जाता है, दूर-दराज से श्रद्धालु मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं, यही रहस्य और आस्था का संगम इस मेले को खास बनाता है।

रहस्यमयी गुफा: आस्था का केंद्र

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है पहाड़ी पर बनी वह प्राचीन गुफा, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन विश्वास उन्हें हर मुश्किल पार करा देता है। लोगों का मानना है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मेले को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है,और सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती कर पहाड़ी रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, हर स्तर पर कोशिश है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिले।

तीन राज्यों से उमड़ेगा जनसैलाब

इस बार मेले में सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और तेलंगाना से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। नक्सल प्रभाव कम होने के कारण इस बार भीड़ पहले से ज्यादा होने के आसार हैं।

बदलाव की नई कहानी

सकल नारायण मेला अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जहां डर की जगह विश्वास ने ले रही है।

👉 जहां कभी नक्सलियों का साया था…
👉 वहीं अब आस्था, शांति और एकता का सबसे बड़ा मेला सजने जा रहा है।

बीजापुर के जंगल अब एक नई पहचान बना रहे हैं ।

जब कलेक्टर खुद पहुंचे महुआ बीन रही ‘मंगली’ के द्वार

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ बस्तर के सुदूर अंचलों में शिक्षा की लौ जलाने के लिए प्रशासन अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर भविष्य संवारने में जुटा है। कलेक्टर अमित कुमार के हालिया दौरे में एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि एक संवेदनशील नेतृत्व किस तरह बदलाव की नींव रखता है।

 

खेतों के बीच रुका काफिला, जागा भविष्य

गुरुवार को जब कलेक्टर मारोकी, मानकापाल, परिया और कुचारास जैसे दूरस्थ गाँवों के दौरे पर थे, तब उनकी नजर सड़क किनारे महुआ बीनती एक छोटी बच्ची पर पड़ी। भीषण गर्मी में जहां बच्चे महुआ इकट्ठा करने में व्यस्त थे, कलेक्टर ने अपना काफिला रुकवाया और सीधे खेतों के बीच पेड़ के पास पहुंच गए। कलेक्टर ने बड़े ही आत्मीय भाव से बच्ची से बात की। बच्ची ने अपना नाम मड़कामी मंगली बताया। जब उससे स्कूल न जाने का कारण पूछा गया, तो मासूमियत और अभाव की कहानी सामने आई।

 

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों या जागरूकता के अभाव में शिक्षा की मुख्यधारा से न छूटे। महुआ बीनने वाले हाथ कलम थामेंगे, तभी सुकमा का असली विकास होगा। लगातार पालक-शिक्षक बैठक आयोजित किया जा रहा है। शिक्षक भी लगातार ड्राप आउट बच्चों के घर जाकर समझा रहे हैं।

 

चौपाल नहीं, सीधा घर तक पहुंची सरकार

प्रशासन का मानवीय चेहरा तब और प्रखर हुआ जब कलेक्टर मंगली से बात कर नहीं रुके, बल्कि उसके माता-पिता से मिलने सीधे उसके घर पहुंच गए।

 संवाद और संवेदनशीलता उन्होंने पालकों को समझाया कि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे उनके बच्चों का जीवन संवर सकता है।

 समस्या का समाधान उन्होंने पालक से पूछा कि बच्चे को स्कूल भेजने में कोई दिक्कत है क्या! 

 सकारात्मक परिणाम कलेक्टर की समझाइश और आत्मीयता का असर यह हुआ कि मंगली के माता-पिता उसे तुरंत स्कूल भेजने के लिए राजी हो गए।

 

मौके पर ही दिए दाखिले के निर्देश

कलेक्टर अमित कुमार ने केवल संवाद नहीं किया, बल्कि तत्काल समाधान भी सुनिश्चित किया। उन्होंने मौके पर मौजूद बीआरसी को निर्देश दिए कि मंगली के साथ-साथ वहां मौजूद एक अन्य बालक माड़वी देवा का भी नियमित स्कूल जाना सुनिश्चित किया जाए और उन्हें आवासीय विद्यालय में भर्ती किया जाए। इस अवसर पर जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर भी उपस्थित थे। प्रशासन के इस जमीनी और भावनात्मक प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

बालोद में जंगली सुवर का हमला, दंपत्ति गंभीर घायल.. आत्मरक्षा में सुवर की मौत

बालोद। जिले के गुरूर वन परिक्षेत्र अंतर्गत भानपूरी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब खेत में काम कर रहे पति-पत्नी पर अचानक एक जंगली सुवर ने हमला कर दिया। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

मिली जानकारी के अनुसार दंपत्ति अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी जंगल की ओर से आए जंगली सुवर ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से घबराए दंपत्ति ने अपनी जान बचाने के लिए सुवर से संघर्ष किया और किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की। इसी दौरान हुए संघर्ष में जंगली सुवर की मौके पर ही मौत हो गई।

 

घटना के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल दंपत्ति को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरूर ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण दोनों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

 

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

नक्सल प्रभावित सुकमा से उभरी सफलता की नई किरण “अदिति राम” ने सीए फाउंडेशन प्रथम प्रयास में किया उत्तीर्ण

धर्मेंद्र सिंह

Chhattisgarh सुकमा/ वर्षों तक नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान से जूझते रहे सुकमा जिले से अब सफलता की प्रेरक कहानियां सामने आने लगी हैं। इसी कड़ी में सुकमा निवासी शिक्षक अगस्टीन राम की पुत्री कु. अदिति राम ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की प्रतिष्ठित सीए फाउंडेशन परीक्षा प्रथम प्रयास में उत्तीर्ण कर जिले का नाम रोशन किया है।

 

अदिति राम की इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अदिति ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और कड़ी मेहनत, अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के बल पर यह सफलता हासिल की।

 

अदिति के पिता अगस्टीन राम, जो स्वयं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, ने भावुक होकर कहा कि यह उनकी बेटी की मेहनत और लगन का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि अदिति आगे भी सीए की आगामी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर परिवार और सुकमा जिले का नाम देशभर में रोशन करेंगी।

 

गौरतलब है कि सुकमा जिला लंबे समय तक नक्सल हिंसा और शैक्षणिक पिछड़ेपन की पहचान से जूझता रहा है, लेकिन अब यहां के युवा शिक्षा के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। अदिति राम की यह सफलता इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल है।

 

अदिति की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि उनकी सफलता सुकमा के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

लाल आतंक का अंधेरा छंटा: गोगुंडा में पहली बार जला बल्ब, 78 साल बाद पहुँची बिजली

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की दुर्गम पहाड़ियों पर बसा गोगुंडा गांव आज ऐतिहासिक पल का गवाह बना। आजादी के 78 वर्ष बाद, करीब 650 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गांव में पहली बार बिजली का बल्ब जला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि चार दशकों से विकास से कटे इस क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण भी है।

अंधेरे का अंत: ढिबरी से बिजली तक

सूरज ढलते ही जो गांव कभी घने जंगलों और नक्सलियों के सन्नाटे में डूब जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई और घरों की रौनक लौट आई है। मिट्टी के तेल की ढिबरी और टॉर्च के सहारे जीवन बिताने वाले ग्रामीणों की आंखों में आज खुशी के आंसू हैं।

गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का ने भावुक होकर कहा,
“हमने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीते जी गांव में बिजली देख पाएंगे। आज लगता है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर है।”

सुरक्षा और विकास का संगम

यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे सुरक्षाबलों और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा।

  • सुरक्षा कवच: Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) की 74वीं बटालियन और पुलिस के सहयोग से क्षेत्र में कैंप स्थापित किया गया, जिससे नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना ध्वस्त हुआ।

  • दुर्गम राहें हुईं आसान: जहां पहले 5 घंटे पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता था, अब वहां विकास कार्यों की गाड़ियां पहुंच रही हैं।

  • प्रशासनिक पहल: कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से शुरू की गईं।

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना सामाजिक और आर्थिक बदलाव की शुरुआत है।
“हमारा लक्ष्य जिले के अंतिम छोर तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाना है। सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।”

वहीं 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे ने बताया कि कैंप स्थापना के बाद क्षेत्र में स्थायित्व आया है और यह रोशनी शांति और प्रगति का नया अध्याय लिखेगी।

एक नई सुबह की शुरुआत

गोगुंडा में जला यह पहला बल्ब केवल बिजली का प्रतीक नहीं, बल्कि दशकों के भय और अलगाव पर लोकतंत्र की जीत का संकेत है। बस्तर के बदलते स्वरूप की यह कहानी बताती है कि जब सुरक्षा और विकास साथ चलते हैं, तो सबसे दुर्गम पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।

अब गोगुंडा का अंधेरा स्थायी रूप से छंट चुका है—और वहां बस भविष्य की चमक बाकी है।

आकांक्षा’ के तहत 35 युवा चेन्नई रवाना

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह।

नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक सकारात्मक और प्रेरक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व और कलेक्टर Amit Kumar के मार्गदर्शन में संचालित ‘आकांक्षा – सशक्त युवा, सशक्त सुकमा’ परियोजना के तहत जिले के 35 युवा (16 युवतियां एवं 19 युवक) प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार हेतु चेन्नई के लिए रवाना हुए।

 

लाइवलीहुड कॉलेज परिसर से हरी झंडी दिखाकर युवाओं के दल को विदा किया गया। इस अवसर पर परिसर में उत्साह, आत्मविश्वास और नए सपनों की चमक साफ नजर आई।

 

एमओयू से खुला वैश्विक अवसरों का द्वार

 

जिला प्रशासन ने निजी क्षेत्र में ठोस रोजगार अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्राइव मैनेजमेंट सर्विसेज, चेन्नई के साथ विशेष एमओयू किया है। इस साझेदारी के माध्यम से सुदूर वनांचल के युवाओं को अब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की कंपनियों में कार्य करने का अवसर मिल रहा है।

 

यह पहल उन युवाओं के लिए नई राह खोल रही है, जो अब तक संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे रह जाते थे।

 

मुख्य बिंदु – एक नजर में

 

महिला सशक्तिकरण: चयनित 35 युवाओं में 16 युवतियों की भागीदारी, आत्मनिर्भर नारी की दिशा में मजबूत कदम।

 

आर्थिक सशक्तिकरण: जिले से बाहर पहली बार रोजगार का अवसर, जिससे स्थायी आय और आत्मसम्मान दोनों मिलेंगे।

 

प्रशासनिक दूरदर्शिता: कलेक्टर अमित कुमार ने इसे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव बताया।

 

कलेक्टर ने सभी चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल नौकरी दिलाने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान देने की पहल है। हमारा लक्ष्य है कि जिले का हर युवा हुनरमंद बने और उसे आजीविका के लिए श्रेष्ठ मंच मिले।

 

युवाओं की जुबानी – उम्मीद और गर्व

दूरस्थ अंचलों से आए युवाओं में इस अवसर को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।

 

सोड़ी बसंती (ग्राम आसिरगुड़ा, कोंटा) ने कहा, “मैं पहली बार घर से दूर जा रही हूं। अब मुझे रोजगार मिल गया है और मैं अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पाऊंगी। यह मेरे जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण है।”

 

सोनिया नुप्पो (बोरगुड़ा) ने बताया, “जिला प्रशासन की यह पहल बहुत सराहनीय है। हम मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासन के आभारी हैं, जिन्होंने हमारे भविष्य के बारे में सोचा।”

 

भविष्य की दिशा

 

सुकमा जिला प्रशासन आने वाले समय में रोजगार मेलों, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ नई साझेदारियों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला सुकमा अब “सशक्त, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे जिले” की नई पहचान गढ़ रहा है।

 

इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर, लाइवलीहुड कॉलेज के प्रभारी अधिकारी कैलाश कश्यप एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

दोरनापाल की गलियों में जब खुद उतरा ‘प्रशासन’

खिल उठे बच्चों के चेहरे, जगी विकास की नई उम्मीद

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। दोरनापाल। आमतौर पर रविवार विश्राम का दिन माना जाता है, लेकिन सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के लिए यह दिन भी जनसेवा को समर्पित रहा। अवकाश के दिन उन्होंने दोरनापाल का मैदानी दौरा कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब प्रशासन फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरता है, तो विकास की रफ्तार स्वतः तेज हो जाती है।


अस्पताल में सख्ती भी, संवेदनशीलता भी

दोरनापाल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोरनापाल के औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर का व्यक्तित्व एक सख्त प्रशासक और जिम्मेदार अभिभावक—दोनों रूपों में नजर आया।

उन्होंने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, बिजली-पानी और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। भीषण गर्मी को देखते हुए मरीजों के लिए कूलर की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा लंबित जननी सुरक्षा योजना (JSY) भुगतान में तेजी लाने को कहा।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इलाज के लिए आए किसी भी जरूरतमंद को असुविधा न हो। साथ ही शत-प्रतिशत टीकाकरण और सुरक्षित संस्थागत प्रसव पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “स्वस्थ भविष्य की नींव आज की सजगता से ही रखी जाती है।”


आंगनबाड़ी में दिखी आत्मीयता

दौरे का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब कलेक्टर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे। यहां उन्होंने औपचारिकता से हटकर बच्चे ‘प्रियल’ का वजन स्वयं जांचा। बच्चों के बीच बैठकर उनसे बातचीत की और चॉकलेट बांटकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।

‘तिरंगा भोजन’ और ‘सुपोषण चौपाल’ की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले का कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार न हो, यह प्रशासन की प्राथमिकता है। जर्जर आंगनबाड़ी भवनों के जीर्णोद्धार के निर्देश देते हुए बच्चों की सुरक्षा और पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।


पीडीएस गोदाम और राजस्व व्यवस्था पर पैनी नजर

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) गोदाम में चावल की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की। स्टैक की गई बोरियों का सैंपल चेक कर शत-प्रतिशत भंडारण और ई-केवाईसी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण राशन मिल सके।

राजस्व विभाग के निरीक्षण में नए तहसील कार्यालय के लिए उपयुक्त स्थान चयन की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा गया।


सजग और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

गोदामों में अनाज की गुणवत्ता से लेकर अस्पताल की सुविधाओं और बच्चों के पोषण तक—हर स्तर पर की गई यह पहल जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर प्रस्तुत करती है। दोरनापाल की गलियों में प्रशासन की यह मौजूदगी न सिर्फ व्यवस्था की सख्ती दिखाती है, बल्कि विकास की नई उम्मीद भी जगाती है।


निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी

दौरे के दौरान तहसीलदार योपेन्द्र पात्रे, सीएमएचओ डॉ. आर.के. सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

पुलवामा के अमर शहीदों को CRPF ने दी श्रद्धांजलि, रक्तदान कर जवानों ने किया नमन

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा/ 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा के कायराना आतंकी हमले में शहीद हुए देश के 40 वीर जवानों की स्मृति में शनिवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा श्रद्धांजलि सभा एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। CRPF हर वर्ष 14 फरवरी को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाकर अपने शहीद साथियों की शहादत को नमन करता है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने अर्पित की पुष्पांजलि

पुलिस उपमहानिरीक्षक (रेंज) के दिशा-निर्देश पर 228 बटालियन के कैंप फंदीगुड़ा (कोंटा) में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई। अधिकारियों एवं जवानों ने दो मिनट का मौन रखकर मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

रक्तदान के माध्यम से दी सेवा-अंजलि

पुलवामा हमले की त्रासदी को स्मरण करते हुए CRPF जवानों ने सेवा भाव का परिचय दिया। 228 बटालियन के कमांडेंट की देखरेख में आयोजित रक्तदान शिविर में कुल 200 अधिकारियों एवं जवानों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे

 

राजेश पांडे, डीआईजी (कोंटा रेंज)

लतीफ साहू, कमांडेंट (228 बटालियन)

दीपक कुमार श्रीवास्तव, कमांडेंट (212 बटालियन)

दिनेश कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी (212 बटालियन)

गौरव शर्मा, उप कमांडेंट (212 बटालियन)

शिविर में 212 बटालियन के 18 जवानों सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। अधिकारियों ने कहा कि रक्तदान के माध्यम से दी गई यह सेवा शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।