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शनि. मई 16th, 2026

“पास नहीं हुआ… और जिंदगी से ही हार गया” बालोद ने झकझोर देने वाली घटना

न्यूज़ डेस्क बालोद।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिला से सामने आई यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। डौंडी क्षेत्र के 17 साल के छात्र राजवीर बघेल ने 10वीं की परीक्षा में असफल होने के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जिस उम्र में सपने बनने चाहिए, उस उम्र में एक बच्चा इतना टूट गया कि उसे जिंदगी ही बोझ लगने लगी।

बताया जा रहा है कि राजवीर कुछ दिन पहले अपनी मौसी के घर जगन्नाथपुर सांकरा गांव शादी में गया हुआ था। 29 अप्रैल को जब 10वीं-12वीं का रिजल्ट आया, तो उसने मोबाइल पर अपना परिणाम देखा। उसी पल से उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। वह चुप रहने लगा, उदास रहने लगा, लेकिन शायद किसी ने उस चुप्पी के पीछे छिपे तूफान को नहीं समझा।

अगले दिन वह अपने भाई के साथ घर लौट आया, लेकिन मन का बोझ उसके साथ ही आया। सुबह जब काफी देर तक उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों ने खिड़की से देखा… और जो सामने था, उसने सब कुछ खत्म कर दियाराजवीर फांसी के फंदे पर झूल चुका था। एक पल में पूरे परिवार की दुनिया उजड़ गई।

घर वालों के अनुसार, राजवीर पिछले साल भी 10वीं में असफल हुआ था और इस बार भी वह पास नहीं हो पाया। उसकी कॉपी से एक नोट भी मिला, जिसमें उसने अपने परिवार के लिए प्यार तो जताया, लेकिन साथ ही यह दर्द भी लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। यही सोच उसके लिए इतनी भारी हो गई कि उसने जिंदगी से ही हार मान ली।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है…

  • क्या सच में परीक्षा में फेल होना इतना बड़ा अपराध है?
  • क्या नंबर ही किसी की जिंदगी की कीमत तय करते हैं?

    आज भी हमारे समाज में अंक और रिजल्ट को इतना बड़ा बना दिया गया है कि बच्चे असफलता को सहन ही नहीं कर पाते।

सच्चाई यह है कि एक परीक्षा में फेल होना जिंदगी का अंत नहीं होता। हर साल लाखों बच्चे असफल होते हैं, लेकिन वही बच्चे आगे चलकर नई राह बनाते हैं, सफल होते हैं। असफलता सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। जरूरत है तो बच्चों को यह समझाने की कि गिरना गलत नहीं, गिरकर उठना जरूरी है।

माता-पिता और समाज को भी यह समझना होगा कि बच्चों को दबाव नहीं, सहारा चाहिए। उन्हें डर नहीं, हौसला चाहिए। क्योंकि कई बार एक छोटी सी उम्मीद, एक समझदारी भरी बात… किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।

राजवीर अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन उसकी यह दर्दनाक कहानी शायद किसी और बच्चे को टूटने से बचा ले… यही इस खबर का सबसे बड़ा संदेश है।

BALOD: “11 निजी स्कूलों को नोटिस, लेकिन सरकारी स्कूलों पर चुप्पी क्यों?

बालोद। जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के खराब परिणामों के बाद 11 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर निजी स्कूलों पर सख्ती दिखाई गई है, किन्तु सरकारी स्कूलों का क्या.? दोहरे मापदंड के आरोप लगने लगे हैं।

जिले में इस वर्ष परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं।
इतना ही नहीं, करीब 13 साल बाद पहली बार बालोद जिला 10वीं और 12वीं की टॉप-10 मेरिट सूची से बाहर हो गया है, जिसे जिले के लिए बड़ा शैक्षणिक झटका माना जा रहा है।

इन खराब परिणामों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा 11 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। नोटिस में संबंधित स्कूल प्रबंधन से कमजोर परिणामों का कारण पूछते हुए भविष्य में सुधार के लिए ठोस योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मान्यता समाप्त करने तक की चेतावनी भी दी गई है।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि जब हजारों छात्र फेल हुए हैं, तो जिम्मेदारी केवल निजी स्कूलों की ही क्यों तय की जा रही है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में भी शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहां शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और निगरानी की कमजोर व्यवस्था जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं।

निलिमा श्याम जिला स्थायी शिक्षा समिति सदस्य

जिला स्थायी शिक्षा समिति सदस्य निलिमा श्याम ने विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था का प्रतिबिंब होता है, ऐसे में केवल निजी स्कूलों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी-दोनों प्रकार के स्कूलों की समान रूप से समीक्षा और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

इन निजी स्कूलों को जारी हुआ नोटिस
सर्वोदय अंग्रेजी माध्यम हाई स्कूल गुरुर, साई शिशु मंदिर गुण्डरदेही, नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय अर्जुंदा, नेहरू विद्यालय भाठागांव, श्री राम विद्या मंदिर पैरी, गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यापीठ बालोद, गुरुनानक विद्यालय दल्ली राजहरा, साई शिशु मंदिर दल्ली राजहरा, गांधी विद्या मंदिर दल्ली राजहरा तथा विवेकानंद हाई स्कूल डौण्डी।

इस पूरे मामले के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विभाग ने पूरे सत्र के दौरान प्रभावी मॉनिटरिंग की थी या फिर परिणाम आने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल, जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की भी जवाबदेही तय की जाएगी या यह कार्रवाई केवल निजी स्कूलों तक ही सीमित रह जाएगी।

 

 

CG:आम चोरी के आरोप में नाबालिग को तालिबानी सजा..? Video वायरल

नाबालिग से बेरहमी: सिक्योरिटी गार्ड पर पटक-पटक कर मारने का आरोप, वीडियो वायरल

बलौदाबाजार जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग बच्चे के साथ कथित रूप से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना रवान स्थित अंबुजा अडानी सीमेंट प्लांट की है।

आरोप है कि प्लांट में तैनात एक सिक्योरिटी गार्ड ने नाबालिग बच्चे को बेरहमी से उठाकर जमीन पर पटक-पटक कर मारा। वायरल वीडियो में युवक को बार-बार उठाकर पटकते हुए देखा जा सकता है, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई।

 सोशल मीडिया में वायरल वीडियो👆

घटना के बाद परिजन सिटी कोतवाली थाना पहुंचे और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। घायल नाबालिग को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

पीड़ित नाबालिग के बड़े भाई का आरोप है कि उसके भाई को “आम तोड़ने” की वजह से सिक्योरिटी गार्ड द्वारा तालिबानी अंदाज में सजा दी गई। आरोप है कि गार्ड ने बच्चे को बार-बार उठाकर जमीन पर पटकते हुए बुरी तरह पीटा।

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या इस पूरे मामले के लिए कंपनी जिम्मेदार है, या फिर यह सिक्योरिटी गार्ड की व्यक्तिगत क्रूरता का मामला है? फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

बालोद में मधुमक्खियों का हमला: महुआ बीनने गए बुजुर्ग की मौत, पत्नी गंभीर

बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत गोटूलमुड़ा गांव से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां मधुमक्खियों के झुंड ने एक दंपति पर हमला कर दिया। इस हमले में 65 वर्षीय चम्पूलाल गोयल की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी सुमित्रा गंभीर रूप से घायल हो गई हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चम्पूलाल गोयल अपनी पत्नी के साथ जंगल में महुआ बीनने गए थे। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। हमले से दोनों बुरी तरह घायल हो गए। किसी तरह सुमित्रा ने अपनी जान बचाई, लेकिन चम्पूलाल को नहीं बचाया जा सका।

घायल सुमित्रा को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

NH-30 पर हादसा: मरकाटोला घाट में ट्रक, इनोवा और आयरन ओर गाड़ी की टक्कर

बालोद जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 पर स्थित मरकाटोला घाट के पास एक के बाद एक तीन गाड़ियां दुर्घटना का शिकार हो गईं। हादसे में दो लोग घायल हो गए हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

मिली जानकारी के अनुसार, सबसे पहले चावल से भरी एक ट्रक घाट में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसी दौरान मार्ग से गुजर रही एक इनोवा वाहन ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को देखकर अचानक अपनी रफ्तार धीमी कर दी।

इसी बीच पीछे से आ रही कच्चे लोहे (आयरन ओर) से भरी गाड़ी ने इनोवा को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे इनोवा वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार दो लोग घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सुचारु करने में जुट गई। यह पूरा मामला पुरुर थाना क्षेत्र के मरकटोला घाट का है।

पुलिस ने इनोवा चालक की शिकायत के आधार पर आयरन ओर से भरी गाड़ी के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

CRIME BALOD: खेत की मेड़ बना खूनी विवाद, चचेरे भाई ने किया जानलेवा हमला

CHHATTISGARH/ बालोद जिले के गुरूर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां खेत जाने के दौरान एक बुजुर्ग दम्पति पर प्राणघातक हमला कर दिया गया। इस हमले में 65 वर्षीय पुरुषोत्तम साहू गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

 

जानकारी के मुताबिक, गुरूर थाना क्षेत्र के बगदई गांव में उस समय विवाद हिंसक हो गया, जब बुजुर्ग दम्पति अपने खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनके ही चचेरे भाई हुलस्तनंदन साहू (45) ने रास्ता रोकते हुए सवाल किया—“मेरे खेत की मेड़ पर क्यों चल रहे हो?” देखते ही देखते कहासुनी बढ़ी और आरोपी ने गुस्से में आकर बुजुर्ग पर प्राणघातक हमला कर दिया।

 

घटना में घायल पुरुषोत्तम साहू को तत्काल गुरूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए धमतरी रेफर कर दिया गया।

 

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी हुलस्तनंदन साहू को हिरासत में ले लिया है। मामले की जांच जारी है।

रिश्तेदारों ने ही रची चोरी की साजिश: 2.21 लाख के जेवर और नगदी पार, 6 आरोपी गिरफ्तार

डौण्डीलोहारा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, रिश्ते के भाइयों ने दिया था वारदात को अंजाम

 

बालोद जिले के डौण्डीलोहारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कसही में हुई चोरी की घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। खास बात यह है कि चोरी की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी पीड़ित के रिश्तेदार ही निकले।

 

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थी नेमीचंद साहू अपने परिवार के साथ 20 जून 2025 को अपने पुराने गांव तिलईरवार गए हुए थे। अगले दिन जब वे वापस लौटे तो घर का ताला टूटा मिला और कमरे में रखी आलमारी का लॉकर भी टूटा हुआ था। अज्ञात चोरों ने घर से सोने-चांदी के जेवरात और नगदी पार कर दी थी।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल के निर्देशन में टीम गठित कर जांच शुरू की गई। विवेचना और साइबर सेल की मदद से संदिग्धों तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रार्थी के रिश्तेदार खिलेन्द्र साहू उर्फ बंटी और महेश साहू उर्फ महेशू ने ही इस चोरी की साजिश रची थी।

 

दोनों आरोपियों को घर की पूरी जानकारी पहले से थी। उन्होंने मौका देखकर मोटरसाइकिल से ग्राम कसही पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया और चोरी का सामान ग्राम तिलईरवार में छिपा दिया। बाद में कुछ सामान को अन्य आरोपियों के माध्यम से बेचने की कोशिश भी की गई।

 

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सोने का लॉकेट, दो जोड़ी झुमके, मंगलसूत्र, सोने का हार, पांच जोड़ी चांदी के पायल, चांदी के सिक्के, मोबाइल फोन समेत कुल करीब 2 लाख 21 हजार रुपये के जेवर और 28,500 रुपये नगद बरामद किए हैं।

 

इस मामले में पुलिस ने कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी पहले भी चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं।

 

पुलिस की इस कार्रवाई में थाना प्रभारी मुकेश सिंह सहित पूरी टीम और साइबर सेल की अहम भूमिका रही।

बालोद में ‘मुरुम घोटाला’! किसानों के श्रमदान पर फर्जी बिल, 3.17 लाख की बंदरबांट का आरोप

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत और श्रमदान से तैयार हुए धान खरीदी केंद्र को कागजों में ‘घोटाले’ में बदल देने का आरोप लगा है।

मामला भर्रीटोला (43) सेवा सहकारी समिति से जुड़ा है, जहां समिति प्रबंधक भिखम लाल साहू और प्राधिकृत अधिकारी कुसुमकसा भाजपा नेता योगेंद्र सिन्हा पर पद के दुरुपयोग का आरोप है। बताया जा रहा है कि समिति के प्रबंधक के साथ मिलीभगत कर 3 लाख 17 हजार रुपये का फर्जी बिल लगाया गया और रकम निकाल ली गई।

 कैसे हुआ ‘खेल’?

 

ग्रामीणों के अनुसार, भर्रीटोला समेत आसपास के गांवों—रजहिं, ककरेल, देवपांडुम, चिपरा और जुनवानी—के करीब 815 किसान कुसुमकसा स्थित सेवा सहकारी समिति में धान बेचने जाते हैं। दूरी ज्यादा होने से परेशान किसानों ने अपने गांव में ही खरीदी केंद्र खोलने की मांग की थी।

मांग पूरी होने पर किसानों ने खुद चंदा इकट्ठा किया, मुरुम मंगवाया और श्रमदान कर जमीन समतल की। यानी पूरा काम गांव वालों ने अपने दम पर किया।

लेकिन आरोप है कि इसी काम के नाम पर समिति प्रबंधक ने योगेन्द्र सिन्हा फर्म के नाम से 3.17 लाख रुपये का फर्जी बिल लगाकर चेक जारी कर दिया।

खुलासा और फिर ‘डैमेज कंट्रोल’

जब यह मामला ग्रामीणों के बीच उजागर हुआ तो विवाद बढ़ने लगा। दबाव बढ़ते ही प्रबंधक भिखम लाल साहू ने रकम वापस समिति के खाते में जमा करा दी। लेकिन सवाल यह है कि अगर गड़बड़ी नहीं थी, तो पैसे लौटाने की नौबत क्यों आई?

किसानों का आरोप

ग्रामीणों का साफ कहना है—

“जब हमने खुद चंदा और श्रमदान से काम किया, तो फिर लाखों रुपये का भुगतान किस बात का किया गया? यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है, इसकी जांच होनी चाहिए।”

प्रबंधक की सफाई

समिति प्रबंधक का कहना है कि उन्हें प्राधिकृत अधिकारी योगेंद्र सिन्हा द्वारा चेक दिया गया था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि मुरुम ग्रामीणों ने खुद डलवाया है। बाद में जानकारी मिलने पर राशि वापस जमा कर दी गई।

बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि सहकारी समितियों में संभावित भ्रष्टाचार के उस मॉडल की झलक है, जहां
👉 कागजों में काम दिखाकर पैसे निकाले जाते हैं
👉 ग्रामीणों की मेहनत पर ‘फर्जी बिल’ बनते हैं

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फिर से ‘रफा-दफा’ कर दिया जाएगा।

जब कलेक्टर खुद पहुंचे महुआ बीन रही ‘मंगली’ के द्वार

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ बस्तर के सुदूर अंचलों में शिक्षा की लौ जलाने के लिए प्रशासन अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर भविष्य संवारने में जुटा है। कलेक्टर अमित कुमार के हालिया दौरे में एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि एक संवेदनशील नेतृत्व किस तरह बदलाव की नींव रखता है।

 

खेतों के बीच रुका काफिला, जागा भविष्य

गुरुवार को जब कलेक्टर मारोकी, मानकापाल, परिया और कुचारास जैसे दूरस्थ गाँवों के दौरे पर थे, तब उनकी नजर सड़क किनारे महुआ बीनती एक छोटी बच्ची पर पड़ी। भीषण गर्मी में जहां बच्चे महुआ इकट्ठा करने में व्यस्त थे, कलेक्टर ने अपना काफिला रुकवाया और सीधे खेतों के बीच पेड़ के पास पहुंच गए। कलेक्टर ने बड़े ही आत्मीय भाव से बच्ची से बात की। बच्ची ने अपना नाम मड़कामी मंगली बताया। जब उससे स्कूल न जाने का कारण पूछा गया, तो मासूमियत और अभाव की कहानी सामने आई।

 

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों या जागरूकता के अभाव में शिक्षा की मुख्यधारा से न छूटे। महुआ बीनने वाले हाथ कलम थामेंगे, तभी सुकमा का असली विकास होगा। लगातार पालक-शिक्षक बैठक आयोजित किया जा रहा है। शिक्षक भी लगातार ड्राप आउट बच्चों के घर जाकर समझा रहे हैं।

 

चौपाल नहीं, सीधा घर तक पहुंची सरकार

प्रशासन का मानवीय चेहरा तब और प्रखर हुआ जब कलेक्टर मंगली से बात कर नहीं रुके, बल्कि उसके माता-पिता से मिलने सीधे उसके घर पहुंच गए।

 संवाद और संवेदनशीलता उन्होंने पालकों को समझाया कि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे उनके बच्चों का जीवन संवर सकता है।

 समस्या का समाधान उन्होंने पालक से पूछा कि बच्चे को स्कूल भेजने में कोई दिक्कत है क्या! 

 सकारात्मक परिणाम कलेक्टर की समझाइश और आत्मीयता का असर यह हुआ कि मंगली के माता-पिता उसे तुरंत स्कूल भेजने के लिए राजी हो गए।

 

मौके पर ही दिए दाखिले के निर्देश

कलेक्टर अमित कुमार ने केवल संवाद नहीं किया, बल्कि तत्काल समाधान भी सुनिश्चित किया। उन्होंने मौके पर मौजूद बीआरसी को निर्देश दिए कि मंगली के साथ-साथ वहां मौजूद एक अन्य बालक माड़वी देवा का भी नियमित स्कूल जाना सुनिश्चित किया जाए और उन्हें आवासीय विद्यालय में भर्ती किया जाए। इस अवसर पर जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर भी उपस्थित थे। प्रशासन के इस जमीनी और भावनात्मक प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

बालोद में जंगली सुवर का हमला, दंपत्ति गंभीर घायल.. आत्मरक्षा में सुवर की मौत

बालोद। जिले के गुरूर वन परिक्षेत्र अंतर्गत भानपूरी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब खेत में काम कर रहे पति-पत्नी पर अचानक एक जंगली सुवर ने हमला कर दिया। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

मिली जानकारी के अनुसार दंपत्ति अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी जंगल की ओर से आए जंगली सुवर ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से घबराए दंपत्ति ने अपनी जान बचाने के लिए सुवर से संघर्ष किया और किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की। इसी दौरान हुए संघर्ष में जंगली सुवर की मौके पर ही मौत हो गई।

 

घटना के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल दंपत्ति को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरूर ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण दोनों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

 

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।