नकल पर सख्ती: बालोद में बोर्ड परीक्षा केंद्रों का उड़नदस्ता दल ने किया औचक निरीक्षण
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा आयोजित हाई स्कूल मुख्य परीक्षा 2026 के तहत बालोद जिले में जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिले के कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया।
उड़नदस्ता दल ने शासकीय बुनियादी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद (पाररास), शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय बालोद, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय बालोद तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय लाटाबोड़ में पहुंचकर परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान किसी भी परीक्षा केंद्र में नकल का कोई प्रकरण सामने नहीं आया। सभी केंद्रों में परीक्षा शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित होती पाई गई।
जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी, सहायक परियोजना समन्वयक लेख राम साहू, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी उमा ठाकुर, जिला खेल समन्वयक सपन जेना, व्यायाम शिक्षक सुरेश शांडिल्य एवं व्यायाम शिक्षक आदिला खान शामिल रहे।
बालोद को खेल अधोसंरचना की बड़ी सौगात: 1300 लाख की परियोजनाएं स्वीकृत, बनेंगे स्टेडियम व इंडोर हॉल
बालोद। खेल प्रतिभाओं से समृद्ध बालोद जिले के लिए गर्व का क्षण है। विधानसभा के हालिया बजट सत्र में जिले को खेल अधोसंरचना के लिए कुल 1300 लाख रुपये (13 करोड़ रुपये) की बड़ी सौगात मिली है। इस स्वीकृति से जिले में आधुनिक खेल सुविधाओं का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
क्या-क्या होगा निर्माण?
दल्लीराजहरा में इंडोर मल्टीपरपज हॉल निर्माण हेतु 500 लाख रुपये स्वीकृत
वर्ष 2026-27 के लिए 200 लाख रुपये का प्रावधान
जिला स्तरीय बहुउद्देश्यीय स्टेडियम निर्माण हेतु 800 लाख रुपये स्वीकृत
वर्ष 2026-27 के लिए 200 लाख रुपये का प्रावधान
इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन सहित विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए आधुनिक मंच मिलेगा।
जनप्रतिनिधियों के प्रयास रंग लाए
जिले में खेल सुविधाओं की मांग को लेकर भाजपा नेता राकेश यादव तथा छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं भाजपा जिला महामंत्री सौरभ लूनिया लगातार प्रयासरत थे।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, खेल मंत्री अरुण साव तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात और पत्राचार कर जिले की खेल आवश्यकताओं को प्रमुखता से रखा।
लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि बजट सत्र में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति मिली, जिसे जिले की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
खिलाड़ियों के सपनों को मिलेंगे पंख
नई खेल अधोसंरचना तैयार होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के खिलाड़ियों को जिला स्तर पर ही बेहतर प्रशिक्षण सुविधा मिलेगी। इससे:
प्रतिभाओं को बाहर बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव होगा
युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और करियर के अवसर बढ़ेंगे
स्वीकृति मिलने पर सौरभ लूनिया ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, खेल मंत्री, वित्त मंत्री, भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन एवं जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और बालोद को मिली यह सौगात आने वाले वर्षों में ऐतिहासिक साबित होगी।
निश्चित ही, यह फैसला बालोद को खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। 🏆
दल्लीराजहरा: 1955 से आज तक खनन का सफर, भिलाई इस्पात संयंत्र की धड़कन बनी लौह अयस्क खदानों का इतिहास
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित दल्लीराजहरा की लौह अयस्क खदानों ने न केवल औद्योगिक विकास की इबारत लिखी, बल्कि श्रमिक आंदोलनों और सामाजिक परिवर्तन की भी मिसाल कायम की। वर्ष 1955 में खनन कार्य की शुरुआत के साथ यह क्षेत्र देश के औद्योगिक मानचित्र पर उभरा और आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है।

1955: औद्योगिक युग की शुरुआत
सन् 1955 में जब भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की स्थापना हुई, तब उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए दल्लीराजहरा की खदानों का विकास किया गया। 1959 में भिलाई इस्पात संयंत्र में उत्पादन शुरू हुआ और दल्लीराजहरा उसकी जीवनरेखा बन गया।
1960–1980: श्रमिक संघर्ष और सामाजिक जागरण
इन दशकों में खदानों में हजारों मजदूर कार्यरत रहे। बेहतर वेतन, सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर बड़े श्रमिक आंदोलन हुए। इस दौर में शंकर गुहा नियोगी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मजदूर आंदोलन ने नई दिशा पाई। दल्लीराजहरा देशभर में श्रमिक एकता और संघर्ष का प्रतीक बना।

1990–2000: तकनीकी आधुनिकीकरण
समय के साथ खनन प्रक्रिया में आधुनिक मशीनों और नई तकनीकों का उपयोग बढ़ा। जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई ।
2000 के बाद: नए विकल्प और बदलाव
छत्तीसगढ़ राज्य गठन (2000) के बाद औद्योगिक नीतियों में बदलाव आए। धीरे-धीरे भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति के नए स्रोत विकसित किए गए, जिससे दल्लीराजहरा की निर्भरता कम हुई। इसके बावजूद यह क्षेत्र ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है।
वर्तमान स्थिति
आज दल्लीराजहरा की खदानें सीमित उत्पादन के साथ संचालित हैं। क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार, पर्यटन और ऐतिहासिक पहचान को संजोने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ खदान नहीं, बल्कि संघर्ष, विकास और पहचान का प्रतीक है।
✍️ निष्कर्ष
1955 से शुरू हुआ दल्लीराजहरा माइंस का सफर केवल खनन तक सीमित नहीं रहा। यह औद्योगिक प्रगति, श्रमिक अधिकारों की लड़ाई और सामाजिक परिवर्तन की कहानी भी है। बदलते समय के साथ चुनौतियाँ जरूर आईं, लेकिन दल्लीराजहरा आज भी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बना हुआ है।
कर्तव्य पथ पर थम गई जिंदगी: बस की टक्कर से आरक्षक की मौके पर मौत
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बेहद मार्मिक खबर सामने आई है। कर्तव्य पथ पर निकले एक जवान की जिंदगी सड़क हादसे में थम गई। बालोद कोतवाली थाने में पदस्थ 35 वर्षीय आरक्षक ठनेश कुमार टेमार्य की सोमवार दोपहर ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, ठनेश कुमार समंस वारंट तामील करने के लिए देवारभाट, जमरुवा और जगतरा गांव की ओर जा रहे थे। दोपहर करीब 1 बजे जब वे बालोद–झलमला मार्ग पर सिवनी मार्केट के सामने पहुंचे, तभी तेज बारिश के बीच लेफ्ट साइड से जा रही कांकेर बस को ओवरटेक करने के दौरान उनकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वे सड़क पर गिर पड़े और बस का ड्राइवर साइड का पहिया उनके सीने के ऊपर से गुजर गया।

हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक को गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया है। बस पखांजूर से दल्लीराजहरा होते हुए रायपुर की ओर जा रही थी।
2012 में हुई थी नियुक्ति, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मूल रूप से डौंडीलोहारा ब्लॉक के सहगांव निवासी ठनेश कुमार की पुलिस विभाग में नियुक्ति वर्ष 2012 में हुई थी। वे झलमला स्थित पुलिस कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके पिता नरोत्तम सिंह बालोद कलेक्टोरेट में प्यून के पद पर कार्यरत हैं।
ड्यूटी के दौरान बेटे की असमय मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। सहकर्मियों के अनुसार ठनेश बेहद शांत, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ जवान थे।
कर्तव्य निभाते-निभाते एक बेटा की मौत
यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों के टूटने की कहानी है। समंस तामील करने निकला एक जवान घर वापस नहीं लौटा। पीछे छूट गए बूढ़े पिता की उम्मीदें और परिवार का सहारा ।
आकांक्षा’ के तहत 35 युवा चेन्नई रवाना
सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह।
नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक सकारात्मक और प्रेरक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व और कलेक्टर Amit Kumar के मार्गदर्शन में संचालित ‘आकांक्षा – सशक्त युवा, सशक्त सुकमा’ परियोजना के तहत जिले के 35 युवा (16 युवतियां एवं 19 युवक) प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार हेतु चेन्नई के लिए रवाना हुए।
लाइवलीहुड कॉलेज परिसर से हरी झंडी दिखाकर युवाओं के दल को विदा किया गया। इस अवसर पर परिसर में उत्साह, आत्मविश्वास और नए सपनों की चमक साफ नजर आई।
एमओयू से खुला वैश्विक अवसरों का द्वार
जिला प्रशासन ने निजी क्षेत्र में ठोस रोजगार अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्राइव मैनेजमेंट सर्विसेज, चेन्नई के साथ विशेष एमओयू किया है। इस साझेदारी के माध्यम से सुदूर वनांचल के युवाओं को अब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की कंपनियों में कार्य करने का अवसर मिल रहा है।
यह पहल उन युवाओं के लिए नई राह खोल रही है, जो अब तक संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे रह जाते थे।
मुख्य बिंदु – एक नजर में
महिला सशक्तिकरण: चयनित 35 युवाओं में 16 युवतियों की भागीदारी, आत्मनिर्भर नारी की दिशा में मजबूत कदम।
आर्थिक सशक्तिकरण: जिले से बाहर पहली बार रोजगार का अवसर, जिससे स्थायी आय और आत्मसम्मान दोनों मिलेंगे।
प्रशासनिक दूरदर्शिता: कलेक्टर अमित कुमार ने इसे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव बताया।
कलेक्टर ने सभी चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल नौकरी दिलाने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान देने की पहल है। हमारा लक्ष्य है कि जिले का हर युवा हुनरमंद बने और उसे आजीविका के लिए श्रेष्ठ मंच मिले।
युवाओं की जुबानी – उम्मीद और गर्व

दूरस्थ अंचलों से आए युवाओं में इस अवसर को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।
सोड़ी बसंती (ग्राम आसिरगुड़ा, कोंटा) ने कहा, “मैं पहली बार घर से दूर जा रही हूं। अब मुझे रोजगार मिल गया है और मैं अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पाऊंगी। यह मेरे जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण है।”
सोनिया नुप्पो (बोरगुड़ा) ने बताया, “जिला प्रशासन की यह पहल बहुत सराहनीय है। हम मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासन के आभारी हैं, जिन्होंने हमारे भविष्य के बारे में सोचा।”
भविष्य की दिशा
सुकमा जिला प्रशासन आने वाले समय में रोजगार मेलों, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ नई साझेदारियों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला सुकमा अब “सशक्त, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे जिले” की नई पहचान गढ़ रहा है।
इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर, लाइवलीहुड कॉलेज के प्रभारी अधिकारी कैलाश कश्यप एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
सुकमा के पोटाकेबिनों में गूंजेगी AI की गूंज: अब सुदूर वनांचल के बच्चे भी बनेंगे ‘टेक-स्मार्ट’
धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्र सुकमा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा सुदूर क्षेत्रों के पोटाकेबिन (आवासीय विद्यालयों) में अध्ययनरत बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा शुरू की जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी पहल को जमीन पर उतारने के लिए लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
शिक्षक बनेंगे माध्यम, बच्चे छुएंगे आसमान
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को AI के आधुनिक टूल्स और तकनीकों का प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को AI की मूलभूत जानकारी, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और डिजिटल नवाचार से परिचित कराएंगे।
शहरों से मुकाबले की तैयारी
इस पहल से सुदूर वनांचल के बच्चे भी तकनीक के क्षेत्र में शहरी छात्रों के समान अवसर प्राप्त कर सकेंगे। अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल प्रयोगशालाओं और तकनीकी प्रयोगों के माध्यम से सीखने का नया दौर शुरू होगा।
बेहतर भविष्य की नींव
AI की शिक्षा से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मक सोच में वृद्धि होगी। साथ ही भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
AI प्रशिक्षक वेनिक सेरो ने बताया कि उद्देश्य यह है कि सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी वही तकनीकी अवसर मिलें जो महानगरों के विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं।
पोटाकेबिनों में बदलेगी पढ़ाई की सूरत
अब पोटाकेबिन स्कूलों में डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया जाएगा। AI की मदद से कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाया जाएगा और छात्र नवाचार आधारित प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तकनीक की यह दस्तक शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक पहल मानी जा रही है, जो आने वाले समय में सुकमा के बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।
GOOD NEWS: सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट: प्रकृति की गोद में रोमांच और विकास का महाउत्सव
CHHATTISGARH बालोद। प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित ग्राम नारागांव (विकासखंड गुरूर) स्थित सियादेवी जलाशय इन दिनों उत्सव, उमंग और रोमांच से सराबोर है। तीन दिवसीय सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां प्रकृति, पर्यटन और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। हर ओर हरियाली, शांत जलराशि और रोमांचक गतिविधियों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
🚣 बैम्बू राफ्टिंग में दिखा जनप्रतिनिधियों का उत्साह

शुभारंभ अवसर पर विधायक संगीता सिन्हा, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष तोमन साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बैम्बू राफ्टिंग का आनंद लिया।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल तथा एडीशनल एसपी मोनिका ठाकुर सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने भी विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों में भाग लेकर पर्यटकों और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाया।
जलाशय की शांत लहरों पर बैम्बू राफ्टिंग का दृश्य आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।
🎯 एडवेंचर और उत्सव का शानदार संगम

फेस्ट में तीरंदाजी, एयर गन शूटिंग, वॉल क्लाइम्बिंग, टायर क्लाइम्बिंग, मोटर बाइक स्टंट, फ्लोटिंग बलून और हॉट एयर बलून जैसी गतिविधियों ने युवाओं और बच्चों को रोमांचित कर दिया।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने स्कूली बच्चों के साथ म्यूजिकल बॉल खेलकर कार्यक्रम में आत्मीयता का रंग घोला, जिससे आयोजन और भी जीवंत हो उठा।
🌄 पर्यटन हब बनने की ओर सियादेवी

अपने संबोधन में विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि सियादेवी जलाशय तेजी से एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के लिए पर्यटन कॉम्प्लेक्स निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
पूर्व राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग सदस्य यशवंत जैन ने आयोजन को जिले के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
🎶 संस्कृति और स्वाद का संगम
फेस्ट में स्व-सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय कलाकारों ने सुमधुर गीत-संगीत से माहौल को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम स्थल पर लगे स्टॉलों में ठेठरी, खुरमी जैसे पारंपरिक व्यंजन और ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी।
🌱 रोजगार और विकास के नए द्वार

सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट न केवल पर्यटन को नई पहचान दे रहा है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित कर रहा है।
प्रकृति की गोद में रोमांच, संस्कृति और स्वाद का यह संगम आने वाले समय में बालोद जिले की नई पहचान बन सकता है।
📍 सियादेवी अब सिर्फ जलाशय नहीं, बल्कि पर्यटन और विकास की नई उड़ान का प्रतीक बनता जा रहा है।
बालोद क्राइम: जेल से छूटते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की हत्याकर की आत्महत्या, पढ़ें पूरी खबर
बालोद में सनसनी: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की हत्या के बाद आरोपी ने लगाई फांसी
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद रहा एक विचाराधीन कैदी जमानत पर रिहा होने के बाद सीधे आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा, जहां उसने 54 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उगेश्वरी देवांगन की धारदार हथियार से हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने उसी केंद्र में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
बच्चों को बाहर निकालकर दिया वारदात को अंजाम
घटना देवरी थाना क्षेत्र के फरदफोड़ गांव की है। जानकारी के अनुसार, फरदफोड़ निवासी 57 वर्षीय लखन देवांगन दोपहर के समय आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा। उस वक्त केंद्र में छोटे बच्चे भोजन कर रहे थे। आरोपी ने पहले बच्चों को बाहर जाने के लिए कहा और सहायिका को भी केंद्र से बाहर कर दिया। इसके बाद उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने उगेश्वरी देवांगन पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद खुदकुशी
हत्या के बाद लखन देवांगन ने आंगनबाड़ी केंद्र के भीतर ही फंदे से लटककर जान दे दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
पहले से दर्ज था दुष्कर्म का मामला
देवरी थाना प्रभारी राकेश ठाकुर के मुताबिक, 13 जनवरी को पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद उसे जेल भेजा गया था। हाल ही में जमानत पर रिहा होने के बाद उसने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया।
गांव में दहशत का माहौल
दोनों मृतक एक ही गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
पुलिस हत्या के पीछे की मंशा और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है।
