Breaking
शनि. मई 16th, 2026

13 से 16 सितंबर तक होगा “देखो दंतेवाड़ा” बाइक ट्रायल, 120 बाइकर्स का होगा जमावड़ा ,पर्यटन स्थलों को देशभर में मिलेगी पहचान

एनबीसी इंडिया 24 न्यूज डेस्क दंतेवाडा @ पर्यटन को बढ़ावा देने और इसकी खूबसूरती को देश-प्रदेश में पहचान दिलाने के उद्देश्य से “देखो दंतेवाड़ा” बाइक ट्रायल कार्यक्रम का आयोजन 13 से 16 सितंबर तक दंतेवाड़ा में किया जाएगा। यह आयोजन कलेक्टर के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में संपन्न होगा। इस विशेष आयोजन में प्रदेशभर से आए 120 बाइकर्स दंतेवाड़ा के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे और अपने अनुभवों को वीडियो, फोटो तथा रील्स के जरिए सोशल मीडिया पर साझा करेंगे, जिससे जिले की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा।

13 सितंबर को सातधार, इंद्रावती पुल बारसूर, बारसूर तालाब की जिपलाइन और मुचनार रिवर साइट। इस दिन माड़िया नृत्य का आयोजन भी होगा। 14 सितंबर को बारसूर मंदिर, दंतेश्वरी माई मंदिर, माटी कला केंद्र कुम्हाररास, कुम्हाररास डैम, गामावड़ा महापाषाण स्थल और आकाश नगर की सैर होगी। 15 सितंबर को मलांगीर और पुलपाड़ जलप्रपात का दौरा होगा। 16 सितंबर को विश्वप्रसिद्ध चित्रकूट जलप्रपात का विशेष भ्रमण होगा।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि दंतेवाड़ा अपनी अनूठी संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। “देखो दंतेवाड़ा” कार्यक्रम का लक्ष्य इन विशेषताओं को पूरे देश में नई पहचान दिलाना है। जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा ने विश्वास जताया कि यह आयोजन दंतेवाड़ा की सकारात्मक छवि को और मजबूत बनाएगा तथा जिले को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाएगा।

धर्म नगरी राजिम में बाबा केदारेश्वर वेलफेयर फाउंडेशन के तत्वावधान में बाबा गरीबनाथ जी की भव्य पालकी यात्रा, 51हजार पार्थिव शिवलिंग निर्माण रुद्राभिषेक पूजन एवं भंडारा का आयोजन

गरियाबंद @ प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी राजिम नगर में दिनाँक 4 अगस्त दिन सोमवार को बाबा केदारेश्वर वेलफेयर फाउंडेशन के तत्वावधान में 51 हजार पार्थिव शिवलिंगनिर्माण,रुद्राभिषेक,भंडारा एवं बाबा गरीबनाथ जी की भव्य पालकी यात्रा का आयोजन श्री बालाजी वाहन पार्किंग श्री राजीवलोचन मंदिर प्रांगण में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है….

51 हजार पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक, प्रसादी भंडारा वितरण दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक, बाबा गरीबनाथ जी की भव्य पालकी यात्रा प्रारंभ शाम 4 बजे कार्यक्रम स्थल से। पालकी यात्रा मार्ग पड़ाव प्रारंभ कार्यक्रम स्थल, भैरव बाबा मंदिर, बाबा गरीबनाथ मंदिर, पं. श्यामाचरण चौक बस स्टैंड राजिम, शिवाजी चौक आमापारा, माँ महामाया मंदिर, आजाद चौक ठाकुर पारा से वापस कार्यक्रम स्थल पहुंचेगी।

आपको बता दे कि बाबा गरीबनाथ की भव्य महाआरती का आयोजन शाम 7 बजे बस स्टैंड राजिम में किया जाना है। जिसमें समस्त श्रद्धालु अपने सहपरिवार सहित इस आयोजन में आकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।

रामलला के जन्मोत्सव में दिखा जमकर उत्साह,स्थानीय निवासियों ने बाटी खीर पूड़ी का प्रसाद

आरंग /समोदा @ जिले के नवनिर्मित ग्राम पंचायत समोदा में रामलला के जन्मोत्सव में वार्ड क्रमांक 6 के निवासियों में जमकर उत्साह देखने को मिला,शनिवार शाम से रामायण कथा के साथ आतिशबाजी की गई। रविवार को वार्ड वासियों ने प्रसाद के रूप में खीर पूड़ी के साथ भोज कार्यक्रम भी रखा गया।

ऐसा पहली बार हुआ है जब रामोत्सव में रामायण के साथ साथ जमकर आतिशबाजी देखने को मिला है।बताया जा रहा है कि पिछले रामोत्सव में राम भगवान की वेशभूषा में बच्चे रामायण के पात्र में नजर आए थे ।बता दे कि हर वर्ष की भाती इस बार भी वार्डवासियों ने ग्राम पंचायत के समीप राहगीरों और स्थानीय निवासियों को प्रसाद के रूप में खीर पूड़ी बाटी गई ।

इस कार्यक्रम में सोमनाथ साहू ,सोमनाथ ध्रुवंशी,रितेश यादव,टिकेश्वर साहू ,कामदेव साहू,चैतन्य, रामनारायण साहू,कमला साहू,गोमती साहू,यशोदा साहू,दुर्गा ध्रुवंशी समेत अन्य स्थानीय निवासी मौजूद थे।

दंतेश्वरी माई की प्रसिद्व फागुन मड़ई (मेला) कलश स्थापना के साथ आज से प्रारंभ

दंतेवाडा @ दंतेश्वरी माई की प्रसिद्व फागुन मड़ई (मेला) कलश स्थापना के साथ आज 05 मार्च से प्रारंभ हो गया है। दंतेश्वरी मंदिर के जिया ने प्रातः 11 बजे परम्परानुसार मेंडका डोबरा मैदान में स्थित गुड़ी में माई जी छत्तर की प्राण प्रतिष्ठा कर कलश की स्थापना की।

जिया बाबा ने बताया कि शाम 4 बजे नारायण मदिर के लिए माई जी मदिर से डोली निकलेगी साथ ही ताड़पलंगा धोनी की रस्म रात्रि 9 बजे विधि विधान से संपन्न की जावेगी। 05 मार्च से प्रथम दिवस कलश स्थापना के साथ दस दिवसीय मेला का शुभारंभ हो गया है। आमंत्रित देवी-देवताओं को भी सम्मान के साथ आसन ग्रहण कराया जायेगा। फागुन मेला 05 मार्च से 15 मार्च तक लगातार विभिन्न कार्यक्रम पूजा-पाठ के साथ सम्पन्न होगा। परम्परागत वाद्य यंत्रों की गूंज मंत्रोपचार के साथ ही सेवक पुजारी तथा मांझी चालकी इस अवसर पर उपस्थित थे।

राजिम कुंभ कल्प में महाशिवरात्रि पर्व और शाही स्नान धूमधाम से मनाया

गरियाबंद @ राजिम कुंभ कल्प में महाशिवरात्रि पर्व और शाही स्नान धूमधाम से मनाया गया, श्रद्धालुओं द्वारा जहां सुबह से ही त्रिवेणी में स्नान ध्यान कर पूजा अर्चना किया गया, वहिं राजिम कुंभ कल्प में पधारे साधु संतों और नागा बाबाओ ने विशेष तौर पर तैयार किए गए शाही कुंड में स्नान किया, लोमश ऋषि आश्रम से संतों की शाही सवारी निकाली गई, जो नगर भर्मण पश्चात त्रिवेणी के मध्य बने कुंड में पहुँचे और शाही स्नान किया, जिसके बाद दूसरे साधु संतों ने शाही कुंड में डुबकी लगाई।

इससे पहले साधु संतों और नागा बाबाओं द्वारा सौर यात्रा निकाली गई, जिसमें सभी साधु संत शामिल हुए, घोड़ों और बग्घी पर सवार होकर निकल रही शोभा यात्रा में साधुओं ने शस्त्र विद्या का प्रदर्शन किया, लाठियों से अलग-अलग करतब दिखाए, नवापारा और राजिम शहर में लोगों ने जगह-जगह शोभा यात्रा में शामिल साधुओं का स्वागत किया, वहीं इस बार राजिम मेले में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी पहुंचे हुए है, जो शाही जुलूस और स्नान को देख बेहद खुश नजर आए, ऐसे ही एक विदेशी पर्यटक जो जर्मनी से राजिम पहुंचे है, उन्होंने बताया कि उन्होंने राजिम कुंभ के बारे में सुना था, और इस बार वो यहां के कुंभ और संस्कृति को देखने पहुंचे है, यहां की संस्कृति सभ्यता देख विदेश से पहुंचे मेहमानों ने खुशी जाहिर की है।

राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन 12 से 26 फरवरी तक,आस्था, संस्कृति और आध्यात्म का त्रिवेणी संगम है राजिम कुंभ,राजिम कुंभ में पधारेंगे देशभर से साधु-संत और श्रद्धालु

एनबीसी इंडिया 24 न्यूज रायपुर @ छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध राजिम में माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होने वाले राजिम कुंभ कल्प 2025 की भव्य तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस वर्ष का आयोजन 12 फरवरी से 26 फरवरी 2025 तक होगा। नया मेला स्थल चौबे बांधा, राजिम में लगभग 54 एकड़ में यह भव्य मेला लगेगा। राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में 12 फरवरी को इस पवित्र मेले का शुभारंभ करेंगे। उनके साथ विशिष्ट संत महापुरुषों की उपस्थिति इस आयोजन को और भी दिव्य बनाएगी।

राजिम कुंभ कल्प की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान बनी है। इस आयोजन से सांस्कृतिक समृद्धि, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इस बार के मेले में विशाल संत समागम, यज्ञ, प्रवचन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे।

इस वर्ष के राजिम कुंभ कल्प में देशभर के संत, महंत और आध्यात्मिक गुरु अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। शुभारंभ समारोह में शंकराचार्य आश्रम रायपुर के दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ जी महाराज, दूधाधारी मठ रायपुर के राजेश्री महंत रामसुंदर दास जी महाराज, संत विचार साहेब जी महाराज ( कबीर संस्थान, रायपुर), स्वामी डॉ. राजेश्वरानंद जी महाराज (सुरेश्वर महादेव पीठ, रायपुर) सहित अनेक संतों की उपस्थिति इस धार्मिक आयोजन की गरिमा को और बढ़ाएगी।

राजिम कुंभ कल्प में धार्मिक अनुष्ठानों, प्रवचनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला होगी। त्रिवेणी संगम में प्रतिदिन संध्या 6.30 बजे महानदी आरती, मुख्य मंच, नया मेला स्थल, चौबे बांधा में शाम 4 बजे से 7 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। पूज्य डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज, नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर द्वारा 13 फरवरी से 19 फरवरी तक शाम 4 से 7 बजे तक भागवत कथा, संत गुरूशरण जी महाराज पंडोखर सरकार, दतिया द्वारा 21 फरवरी से 25 फरवरी तक सत्संग दरबार तथा 12 फरवरी से 26 फरवरी तक राष्ट्रीय एवं आंचलिक कलाकारों द्वारा शाम 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित महानदी, पैरी और सोंधूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। विभिन्न पुराणों में इसे पद्मक्षेत्र या कमलक्षेत्र के रूप में उल्लेखित किया गया है। यहाँ के प्रमुख मंदिर-राजीवलोचन (विष्णु) और कुलेश्वर (शिव) का धाम हरिहर क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि जगन्नाथपुरी की यात्रा, राजिम के साक्षी गोपाल के दर्शन से ही पूर्ण मानी जाती है।

यहां प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक विशाल धार्मिक मेला आयोजित किया जाता है। प्राचीन काल से चली आ रही इस परंपरा को ही राजिम कुंभ (कल्प) के रूप में मान्यता दी गई। इस दौरान कल्पवास, पर्व स्नान, धर्म प्रवचन, संत समागम और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से तीर्थयात्री, नागा साधु, संन्यासी, विभिन्न पंथों-अखाड़ों के संत, महंत, मंडलेश्वर और जगद्गुरु शंकराचार्य पधारते हैं।

राजिम कुंभ कल्प धर्म, आस्था और संस्कृति का संगम होने के साथ-साथ सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक शांति का संदेश भी देता है। यह मेला छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा और लोक संस्कृति का जीवंत प्रमाण है।

आज से शुरू हुआ श्रद्धा और आस्था का प्रतीक राजिम कुंभ,श्रद्धालूओं के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला सुबह 4 बजे से ही शुरु

राहुल ठाकुर गरियाबंद @ श्रद्धा और आस्था का प्रतीक राजिम कुंभ कल्प आज से शुरु हो गया है, राजिम कुंभ कल्प में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालू राजिम पहुंच रहे है, श्रद्धालूओं के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला सुबह 4 बजे से ही शुरु हो गया है, जो आज दिनभर जारी रहेगा।पौराणिक मान्यता के मुताबिक वैसे तो देश में अनादिकाल से हर वर्ष माघ पुर्णिमा से महाशिवरात्री तक राजिम मेला आयोजित होता है, देश विदेश के लाखो लोग राजिम मेला में उसी आस्था और विश्वास के साथ इस राजिम मेले में शामिल होते है, जिसकी शुरुवात आज माघी पुन्नी स्नान के साथ शुरू हो गयी है, हजारों श्रद्धालूओं ने सुबह त्रिवेणी संगम में स्नान किया, उसके पश्चात भगवान राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ के दर्शन किये, श्रद्धालूओं के त्रिवेणी स्नान का ये सिलसिला आज दिनभर जारी रहेगा।

राजिम कुंभ कल्प की अपनी एक अलग ही पहचान है, पैरी, सोंढूर और महानदी, तीन नदियों के संगम स्थल राजिम त्रिवेणी संगम पर ये राजिम कुंभ कल्प आयोजित होता है, त्रिवेणी संगम के एक तट पर भगवान विष्णु के अवतार भगवान राजीव लोचन विराजमान है, और दुसरे तट पर सप्तऋषियों में से एक लोमश ऋषि का आश्रम विद्यमान है, त्रिवेणी संगम के बींचो बीच खुद महादेव कुलेश्वरनाथ के रुप में स्थापित है, वैसे तो श्रद्धालूओं के यहॉ पहुंचने का सिलसिला सालभर लगा रहता है, मगर राजिम मेले के समय श्रद्धालूओं के पहुंचने की संख्या कई गुणा बढ़ जाती है, राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ मंदिर दर्शन के लिए श्रद्धालूओं को घंटो लाईन में खडा होना पडता है।

श्रद्धा और भक्ति का दुसरा नाम ही भगवान है, जहॉ श्रद्धा है, वहॉ भक्ति है, और जहॉ भक्ति है, वहॉ भगवान है, भगवान के दर्शनो की चाहत और मोक्ष प्राप्ति की कामना को लेकर श्रद्धालूओं का राजिम कुंभ कल्प में पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया है, जो 26 फरवरी महाशिवरात्री तक जारी रहेगा।

छत्तीसगढ़ का एक ऐसा जिला जो आज साहसिक पर्यटन के लिए बन चुका है एक नई पहचान, एडवेंचर पर्यटन का भी है मुख्य आकर्षण : -आइये जानते है इस पर्यटन छेत्र के बारे में …

एनबीसी इंडिया 24 न्यूज़ डेस्क @ जशप्योर और पहाड़ी बकरा एडवेंचर द्वारा हाल ही में आयोजित एक बाइक ट्रिप ने पूरे देश भर के राइडर्स को आकर्षित किया। देशभर से आए इन साहसी बाइकर्स ने जशपुर की घुमावदार सड़कों, कठिन ट्रेल्स, और हरे-भरे जंगलों का रोमांचक अनुभव लिया। इन राइडर्स को हिमालय राज्य जैसे लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कठिन रास्तो पर बाइकिंग अनुभव प्राप्त है और उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता को एक नए नजरिये से देखा। जशपुर का अनोखा प्राकृतिक आकर्षण जैसे रानी दह जलप्रपात, सारुडीह चाय बागान, किनकेल पाठ, चुरी और मक्करभज्जा जलप्रपात एवं यहाँ के जनजातीय संस्कृति एवं खाद्य उत्पाद उनके लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने। इसके अलावा, देशदेखा क्लाइंबिंग सेक्टर में रॉक क्लाइम्बिंग एवं कैंपिंग तथा पंड्रापाठ में स्टार गेजिंग का रोमांचक अनुभव भी उनके लिए खास था।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए पिछले वर्ष से व्यापक प्रयास शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर की प्राकृतिक संपदा और रोमांचक गतिविधियों की संभावनाओं को देखते हुए इसे साहसिक खेलों के एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। उनके कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के कारण, यह क्षेत्र अब न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में एक प्रमुख साहसिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो रहा है।

“देशदेखा क्लाइंबिंग सेक्टर” में स्थानीय गाइडों की मदद से रॉक क्लाइम्बिंग का आयोजन….

साहसिक खेल और पर्यटन केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये स्थानीय युवाओं के रोजगार का एक प्रमुख स्रोत भी बन सकते हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के  मार्गदर्शन में स्थानीय युवाओं एवं जनजातीय लोगो को एडवेंचर खेलों की बारीकियों में अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित किया जा चूका है। जशपुर के “देशदेखा क्लाइंबिंग सेक्टर” में स्थानीय गाइडों की मदद से रॉक क्लाइम्बिंग का आयोजन हुआ, जो अब देशभर में एडवेंचर खेलों के शौकीनों के बीच चर्चा में है।

इस यात्रा के दौरान एक विशेष स्टार गेजिंग सत्र का भी आयोजन किया गया था, जिसमें प्रतिभागियों ने खुली रात के आकाश में खगोलीय पिंडों को देखा और एस्ट्रोलॉजी के बारे में जाना। जशपुर का यह हिस्सा अब राष्ट्रीय स्तर पर स्टार गेजिंग के लिए उपयुक्त स्थान के रूप में देखा जा रहा है, जो पर्यटकों को एक विशेष और अनोखा अनुभव देने की क्षमता रखता है।

बाइकर्स ने यहां के स्थानीय आदिवासी खान-पान और संस्कृति का भी आनंद लिया….

जशप्योर द्वारा बनाये गए महुआ और मिलेट के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद, और आदिवासी घरों का दौरा कर उनके रहन-सहन और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानना, उनके लिए यादगार अनुभव रहा। अंतराष्ट्रीय पर्वतारोहण गाइड, एक्सट्रीम एडवेंचर स्पोर्ट ट्रेनर एवं जिला एडवेंचर टूरिज्म के सलाहकार के स्वप्निल राचेलवार ने कहा की यह क्षेत्र विविध सम्भावनावो से परिपूर्ण है। यहाँ के स्थानीय एवं जनजातीय लोग ऐसे खेलो में प्राकृतिक एवं मानसिक रूप से सशक्त होते हैं, और उचित मार्गदर्शन पाकर यहाँ से कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के खिलाडी एवं पेशेवर गाइड उभर कर बहार आ सकते हैं।

जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार की इसी क्रमबद्ध पहल ने यह भी सुनिश्चित किया कि इस क्षेत्र का विकास पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के सम्मान के साथ हो। उनका सपना है कि जशपुर साहसिक खेलों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे और इसके माध्यम से स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाया जाए। जशपुर अब एडवेंचर खेलों का छत्तीसगढ़ में एक नया केंद्र बनकर उभर चूका है। यह न केवल केंद्रीय भारत बल्कि सपूर्ण राष्ट्र में एडवेंचर खेलों का हॉटस्पॉट बनने की ओर अग्रसर है, जहाँ पर्यटक एक अलग और अनोखा अनुभव पा सकते हैं।

 

राज्य स्थापना दिवस -2024 -रंगारंग कार्यक्रमों के साथ राज्य स्थापना दिवस का हुआ समापन,राज्य स्थापना से ही हुआ बस्तर में विकास के नये दौर की शुरुआत- सांसद श्री कश्यप

उत्कृष्ट कार्य निर्वहन करने वाले 22 कर्मचारी हुए पुरस्कृत,स्कूल शिक्षा विभाग के स्टॉल एवं शासकीय आदर्श विद्यालय को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मिला प्रथम स्थान छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद ही छत्तीसगढ़ का विकास और बस्तर का विकास हुआ है-सांसद श्री कश्यप

एनबीसी इंडिया 24 न्यूज दंतेवाड़ा @ ज़िला मुख्यालय के हृदय स्थल मेढ़का डोबरा में आयोजित राज्य स्थापना दिवस का समापन समारोह विगत रात्रि आयोजित किया गया था। इस मौके पर बस्तर लोक सभा क्षेत्र सांसद महेश कश्यप ने मुख्य अतिथि की आसंदी से उपस्थित जनों से संबोधित करते हुए कहा कि 01 नवंबर सन 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण के बाद ही बस्तर में विकास का नया दौर शुरू हुआ और इसमें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई का महत्वपूर्ण योगदान है तत्पश्चात पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में दन्तेवाड़ा जैसे क्षेत्र का अभूतपूर्व विकास किया गया। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र में पक्की सड़कें, बिजली , पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में नयी इबारत लिखी गई।

 

सांसद  महेश कश्यप ने आगे कहा कि आज अभिनव प्रयोगों के चलते दंतेवाड़ा आदर्श जिला बनने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। जिले में शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रयोग हुए हैं उनकी सराहना प्रधानमंत्री ने भी की है। लड़कियों की शिक्षा की दिशा में जिले में उल्लेखनीय पहल भी हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में तैयारी कराने के लिए प्रशासन द्वारा दिशा, एजुकेशन हब, छूलो आसमान, जैसे संस्थाओं के माध्यम से आज स्थानीय विद्यार्थी सफलता की नयी शिखर को छू रहे हैं।

कुल मिलाकर जो शिक्षा के क्षेत्र में जो पहल की जा रही है उससे वो दिन दूर नहीं, जब जिले के अधिक से अधिक बच्चे आईएएस, आईपीएस जैसे बड़े पद प्राप्त कर पाएंगे। पूर्व वर्षो की स्थिति एवं वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे वह प्रधानमंत्री आवास योजना हो अथवा स्वच्छ भारत मिशन, या धान खरीदी या फिर महतारी वंदन योजना हर योजनाओं को प्राथमिकता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ लागू किया जा रहा है जिसके सुखद परिणाम देखने को मिल रहे है। इसी प्रकार श्री कश्यप ने जिले में जैविक कृषि कार्यो की भी प्रशंसा की।

इसके पूर्व अपने स्वागत प्रतिवेदन में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने भी राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज यहां विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाए गए है अतः आमजन विभागों द्वारा योजनाओं के संबंध में दी जा रही जानकारी लेवें और पात्र हितग्राही योजनाओं का लाभ ले सकते हैं इसके अलावा विभिन्न स्व सहायता समूह द्वारा निर्मित स्थानीय उत्पाद भी स्टॉलों में उपलब्ध है और आवश्यकतानुसार आम नागरिक उसे अवश्य खरीदें। इसके साथ ही मुख्य अतिथि द्वारा समस्त विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया गया।

नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयनित छात्र ओमजी चौधरी को दिया गया 50 हजार रुपये का चेक, उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारी हुए पुरस्कृत,सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आदर्श विद्यालय ने बाजी मारी।राज्य स्थापना दिवस पर जिले के निवासी छात्र ओमजी चौधरी के नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयन होने पर मुख्य अतिथि द्वारा 50 हजार रुपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र दिया गया। इसके अलावा विभिन्न विभागों में कार्यरत 22 अधिकारी, कर्मचारी उत्कृष्ट कार्य निर्वहन करने के लिए सम्मानित हुए।महिला बाल विकास विभाग द्वारा सक्षम योजना के तहत सरिता नाग, असली कश्यप, सुको तेलाम, रेखा भास्कर को योजना के तहत कुल राशि 5 लाख 60 हजार रुपये का चेक प्रदाय किया गया।

इस क्रम में समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को 46 विभिन्न प्रकार के उपकरण दिया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शासकीय आदर्श विद्यालय प्रथम, सेजेस दन्तेवाड़ा द्वितीय, तथा कन्या परिसर पातररास को तृतीय स्थान मिला। इसके अलावा स्टॉलों में प्रथम स्थान स्कूल शिक्षा विभाग, महिला बाल विकास विभाग को दूसरा, तथा आदिवासी विकास विभाग को तीसरा स्थान दिया गया।

इस सिद्धपीठ से कोई श्रृद्धालु निराश नही लौटता,दूरदराज के लोगो का यहां लगता है तांता

धर्मेंद्र यादव @ धमतरी जिले के इलाकों मे देवी शक्तियो का हमेशा से ही वास रहा है पर गंगरेल तट पर विराजे वन की देवी अंरगारमोती माता की महिमा ही निराली है…इस सिद्धपीठ से कोई श्रृद्धालु निराश नही लौटता , यही वजह है कि हर नवरात्र मे आस्था की ज्योत जलाने इलाके के अलावा दूरदराज के लोगो का यहां तांता लग जाता है…धमतरी मे गगंरेल के पहाडो बीच मे विराजित मां अंगारमोती का यह भव्य दरबार बीते 6 सौ सालो के इतिहास को अपने अन्दर समेटे हुए है.

बताया जाता है 1972 में गंगरेल बांध बनाने के कारण आसपास के पूरे गांव डूब गए थे. उस वक्त माता गांव के बीहड़ में प्रकट होकर अलौकित कर दिया।इसके बाद भक्तो ने नदी के किनारे माता का दरबार बन दिया. मां विंध्यवासिनी और मनकेशरी की बहन माने जाने वाली मां अंगारमोती की कृपा सदियो से अपने भक्तो पर बरसते आ रही है ।आज भी गंगरेल स्थित अंगारमोती मंदिर में हर वर्ष दीवाली के बाद पहले शुक्रवार को मेला लगता है.

मान्यता है कि इस दिन निसंतान महिला अगर यहां पुजारी के पैरो से रौंदी जाए तो उसे संतान की प्राप्ति होती है.हर साल इस मेले में सैकड़ों निसंतान महिलाएं संतान सुख की कामना लेकर आती है.इस अनोखे मेले को देखने हजारों की संख्या में लोग भी पहुंचते हैं .पुरानी मान्यता के अनुसार निसंतान महिलाओं को मां अंगारमोती का आशीर्वाद मिल जाए.तो उसके आंगन में भी किलकारियां जरूर गूंजती है लेकिन इस आशीर्वाद के लिये उस प्रथा का पालन भी करना होता है।

इस परम्परा से हजारों महिलाओं की सुनी गोद मां ने भर दी है.पिछली बार करीब 300 महिलाएं आशीर्वाद मांगने लेटी हुई थी और इस बार संख्या करीब 500 होने की संभावना लगाई जा रहा है.बहरहाल नौ रूपों में पूजे जाने वाली मां का यह रूप उत्तर दिशा में दरबार लगाकर सदियों से इलाके की रक्षा करते आ रही है…. जहा हर दिन आस्था का सैलाब उमड़ रहा है लोग माता की भक्ति के रंग में सराबोर हो रहे है ।