फिल्मी कहानी जैसी हकीकत: जेल की सलाखों के बीच जन्मी नई ज़िंदगी

CHHATTISGARH/ अक्सर बॉलीवुड फिल्मों में ऐसी कहानी देखने को मिलती है, जहां किसी अपराध के आरोप में जेल गई नायिका सलाखों के पीछे बच्चे को जन्म देती है। दर्शक इसे पर्दे की कहानी समझकर भावुक हो जाते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हकीकत में सामने आया है, जिसने कानून, कर्तव्य और संवेदनाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

दुर्ग के मोहन नगर थाने में पदस्थ रही बर्खास्त प्रधान महिला आरक्षक मोनिका गुप्ता को गबन के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। गिरफ्तारी के समय वह नौ माह की गर्भवती थीं। जेल में रहते हुए उन्होंने एक नवजात बच्चे को जन्म दिया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस थाने में वह कभी ड्यूटी करती थीं, उसी पुलिस महकमे ने कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा।

 

क्या है पूरा मामला?

मामला 4 जुलाई 2022 का है, जब सिंधिया नगर निवासी सोनाली द्विवेदी के घर से 79 ग्राम सोने के गहनों की चोरी हुई थी। इस पर मोहन नगर थाने में अपराध क्रमांक 226/2022 दर्ज किया गया। जांच की जिम्मेदारी प्रधान आरक्षक मोनिका गुप्ता को सौंपी गई थी।

 

30 जून 2023 को पुलिस ने आरोपी पीतांबर राव को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब 79 ग्राम सोने के आभूषण और सिक्का बरामद किया। आरोप है कि जब्त माल को थाने के मालखाने में जमा किया जाना था, लेकिन मोनिका ने उसे जमा नहीं कराया और अपने पास रख लिया।

 

जब पीड़िता ने कोर्ट के माध्यम से गहनों की सुपुर्दगी के लिए आवेदन किया और थाने पहुंची, तब खुलासा हुआ कि जब्त जेवर मालखाने में जमा ही नहीं हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बावजूद गहने वापस नहीं किए गए।

 

FIR, फरारी और गिरफ्तारी

मार्च 2025 में मोनिका गुप्ता के खिलाफ साक्ष्य छिपाने और अमानत में खयानत की धाराओं में FIR दर्ज की गई। इसके बाद से वह फरार चल रही थीं। कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद 2 फरवरी 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

 

जेल प्रशासन के अनुसार गर्भवती होने के कारण उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा और देखभाल उपलब्ध कराई गई। इसी दौरान उन्होंने जेल में बच्चे को जन्म दिया।

 

पहले भी विवादों में रही

बताया जा रहा है कि अगस्त 2024 में भिलाई के छावनी थाने में उनके खिलाफ नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज हुआ था। इन प्रकरणों के बाद उन्हें पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिया गया था।

 

भावनात्मक सवाल

यह घटना एक संवेदनशील प्रश्न खड़ा करती है—क्या मां की गलती की सजा उस नवजात को भी भुगतनी पड़ रही है, जिसने अभी दुनिया में कदम रखा है?

 

भावनात्मक सवाल

यह मामला कानून और संवेदनाओं के बीच खड़ी एक सच्चाई को सामने लाता है। एक ओर कानून अपना काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जेल में जन्मे उस नवजात को लेकर समाज में भावनात्मक चर्चा भी शुरू हो गई है।

 

फिलहाल आरोपी महिला न्यायिक हिरासत में हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

 

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