Nbcindia24/ वीरेन्द्र भारद्वाज/ दल्लीराजहरा । टाउनशिप से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने के लिए संयुक्त खदान मजदूर संघ का प्रतिनिधिमंडल नगर प्रशासक महाप्रबंधक वीके श्रीवास्तव से मिलने गया था, किंतु उनके भिलाई में होने के कारण उनकी अनुपस्थिति में सिविल विभाग के सहायक महाप्रबंधक श्री रामदेवराम भगत तथा वरिष्ठ प्रबंधक श्री रमेश हेडाऊ ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की।
सचिव कमलजीत सिंह मान ने कहा कि देखा जा रहा है कि काफी लंबे समय से टाउनशिप से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में विभाग द्वारा लगातार लापरवाही और अनदेखी की जा रही है। टाउनशिप के क्वार्टर की समस्या की शिकायत दर्ज करने पर भी कर्मचारियों के क्वार्टर की स्थिति सुधारी नहीं जा रही है। क्वार्टर की खराब खिड़की, दरवाजे, फ्लोरिंग का काम, रूफ लीकेज की समस्या, कोर्टयार्ड के रिपेयरिंग की समस्या, टार फेल्टिंग का कार्य शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समय पर ठीक नहीं करवाया जाता है, बल्कि समस्याओं को अटेंड करने में लंबी लंबी वेटिंग लगी होती है, और ये वेटिंग कभी कम होने का नाम ही नहीं लेता। टाउनशिप के अंदर जगह-जगह गाजर घास व घनी झाड़ियां हो गई हैं, बैक लाइन क्लीनिंग का कार्य नहीं हो रहा है जिसके कारण गंदगी है, सड़कों में जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं जिसके कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, इन समस्त समस्याओं से कर्मचारी पस्त व निराश हो चुके हैं । चर्चा में सचिव कमलजीत सिंह ने अधिकारियों से पूछा कि टाउनशिप के लिए कितना बजट आता है और अभी क्या क्या कार्य हो रहे हैं, तो अधिकारियों ने बताया कि 5 करोड़ रु. का बजट टाउनशिप के लिए है और चर्चा के दौरान यह पता लगा कि टाउनशिप के बजट से प्रबंधन द्वारा कुछ ऐसे कार्यों को करवाया जा रहा है, जिनकी अभी आवश्यकता नहीं है, जबकि आवश्यकता इस बात की है कि क्वार्टरों में टार फेल्टिंग, किचन-बाथरूम में टाइल्स, दरवाजे, खिड़की, सड़क मरम्मत आदि कार्य प्राथमिकता के साथ करवाया जाए। प्रतिनिधियों ने इस बात पर कड़ा विरोध जताया कि कर्मचारियों के क्वार्टर व टाउनशिप के सड़क से संबंधित उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों की जगह कम प्राथमिकता वाले अन्य कार्यों को पहले करवाया जा रहा है। टाउनशिप के लिए अति आवश्यक खिड़की, दरवाजे, फ्लोरिंग, टार फेल्टिंग, किचन बाथरूम के टाइल्स, रूफ लीकेज, फ्लोरिंग, टाउनशिप के सड़क आदि कार्य को कोई प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, इसका यूनियन प्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध करते हुए इस संबंध में उच्च प्रबंधन से चर्चा करने की बात कही। इस चर्चा में सचिव कमलजीत सिंह मान, दान सिंह चंद्राकर, तोरण लाल साहू, आर.पी. बरेठ, राजेश कुमार साहू, कुलदीप सिंह, मोतीलाल जॉर्ज, ओ पी शर्मा, सोमित साहू, शंभू सिंह, रूम लाल यादव, गुरमीत सिंह, विष्णुराम साहू, धनराज साहू, जीवनलाल साहू, डी.एस. चौहान, दिलीप सुखदेवे, आर बी सिंग, रामपाल, श्रीनिवासलु, डी एल सोनवानी, पी एस भंडारी, ईश्वरी साहू, एच पी खरे, देवेंद्र उईके, नरोत्तम सिंह देहारी, हीरेंद्र कुमार साव, समसुद्दीन अंसारी, खिलावन राम कोर्राम, हंस कुमार, राधेश्याम साहू, केशूराम आदि शामिल थे।












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