Chhattisgarh/बालोद जिला के नारागांव स्थित माँ सियादेवी मंदिर की प्राकृतिक नजारा और झर-झर बहती झरना को देखने पर्यटक काफी संख्या में पहुंच रहें। जिनमें कई ऐसे लोग भी है जो अपनी जान के साथ खिलवाड़ कर मौत की छलांग लगा शासन- प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे उनपर सवाल खड़े कर रहे।
बतलादे प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में बालोद ही नहीं बल्कि प्रदेश के कोने-कोने से यहां पर्यटक माँ सियादेवी के साथ परिसर मे स्थापित भगवान राम माता सीता, शिव पर्वती, महाबली हनुमान, लव कुश की दर्शन करने पहुँच रहे जहां हरी-भरी सुंदर वादियों में चट्टानों के बीच गुफा और झरना को निहार पर्यटक इसका आंनद ले रहे हैं।
2 मौत के बाद भी नहीं लिए सबक
लगभग 40 फीट ऊँची झरना के नीचे पानी की गहराई में डूबकर कुछ साल पहले 2 पर्यटक की मौत हुई थी इसके बावजूद यहां बड़ी लापरवाही देखी जा रही है। कुछ वीडियो सामने आया है जहाँ ऊपर से बहती आ रही पानी के बीच चार से पांच पर्यटक झरना के बीचो बीच ऊँची चट्टान में खड़ा होकर नीचे गहराई में छलांग लगा रहे पर इन्हें रोकने कोई सामने नहीं आया गनीमत रही कोई हादसा नहीं हुआ।
बड़ा सवाल:-
क्या मंदिर समिति की नजर इन लोगों पर नहीं थी, क्या पुलिस और प्रशासन द्वारा पर्यटन क्षेत्र में लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की कोई इंतजाम नहीं किए गए है, अगर किए गए तो वे लोग कहां थे जिन्हें ऐसे लोगों को रोकने की जिम्मेदारी दी गई है दुर्भाग्य से कोई घटना घट जाता तो जिम्मेदार कौन होता।
घूमने आए पर्यटकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत, क्या हर बार हम शासन और प्रशासन पर रहेंगे निर्भर, क्या स्वयं की कोई जिम्मेदारी नहीं..?












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