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शनि. मई 16th, 2026

8 राज्यों के साथ बालोद जिले के यशवंत और पल्लवी ने -16°C डिग्री सेल्सियस में 12500 फीट ऊंची चोटी केदार काठां में इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के साथ लहराया 280 फीट लम्बा तिरंगा

Nbcindia24/chhattisgarh/बालोद अर्जुन्दा:- कहते हैं अगर हौसला बुलंद हो तो बड़े से भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के अन्तर्गत ग्राम डुड़िया के यशवंत कुमार टंडन पिता श्री हूबलाल टंडन और पल्लवी बारले पिता श्री प्रकाशचंद बारले ग्राम तवेरा ने जिन्होंने ट्रैकर्स के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के तत्वधान में दूसरी बार नेशनल केदार कांठा विंटर ट्रैक का आयोजन किया गया था जो कि उत्तराखंड के देहरादून जिले से 200 किलोमीटर दूर सकरी में स्थित हैं जिसमें 8 राज्य राजस्थान , मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र ,ओडिशा , छत्तीसगढ़ के 26 प्रतिभागी भाग लिये जिसमे छत्तीसगढ़ के 10 प्रतिभागी को राजनांदगांव से ललित भंसाली और उमेश काकिरवार ने 280 फीट का तिंरगा ले कर 28 दिसम्बर 2021 को राजनांदगांव रेलवे स्टेशन से टीम को रवना किया जिसमे बालोद जिले के पल्लवी बारले, यशवंत टण्डन बिलासपुर, के निशा यादव ,विशाल यादव दंतेवाड़ा के कमलेश टंडन राजनांदगांव के विवेक गणेश राहमतक ,भुवाल सिंह वर्मा, अभय मिश्रा, प्रशांत इन सभी का नेतृत्व राजनांदगांव के पहले पर्वतारोही रोहित कुमार झा , पिता नवीन झा माता रेणु देवी झा ग्राम सोमनी जिला राजनांदगांव निवासी ने किया, रोहित ने बताया कि ट्रेक बहुत ही बर्फली रास्तो से घिरा हुआ था जिसमे चलने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ा लेकिन टीम हार नही मानी और 02 जनवरी 2022 को केदारकंठा जिसकी ऊँचाई लगभग 12500 फीट पर -16 डिग्री में 280 फीट का तिरंगा लहरा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने टीम के नाम किया । इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री इफरीम अहमद और सभी टीम वाले इस उपलब्धि पर रोहित के साथ पूरी टीम को बधाई देते हुए उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी ।
रोहित ने इस से पहले भी कई चोटीयो पर तिरंगा लहरा कर राजनांदगांव का जिले का नाम रोशन किया है रोहित जिले के प्रथम पर्वतारोही भी है रोहित दिग्विजय कॉलेज के पत्रकारिता का छात्र रहे ।

दोनों युवक और युवती ने उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदार काठां ट्रैक जिसकी ऊंचाई 12500 फीट (3800 मीटर)ऊंची चोटी पर ट्रैकिंग कर तिरंगा लहराकर फतह हासिल किया है।

इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के तत्वावधान में यशवंत कुमार टंडन और पल्लवी बारले ने यह लक्ष्य हासिल किया है। यशवंत कुमार टंडन और पल्लवी बारले का सपना है कि वो विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर तिरंगा लहराना चाहते हैं।
इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन द्वारा उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में सात दिवसीय नेशनल विंटर ट्रैक कैंप का आयोजन किया गया था। जिसमें छत्तीसगढ़ से 10 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। जिसमें बालोद जिले से यशवंत कुमार टंडन और पल्लवी बारले शामिल हुए थे।

28 दिसंबर से 04 जनवरी तक सात दिवसीय नेशनल विंटर ट्रैक का आयोजन इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन द्वारा उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आयोजन किया गया था। राष्ट्रीय स्तर पर कराए गए इस आयोजन में देशभर के 26 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के यशवंत कुमार टंडन और पल्लवी बारले ने भी भाग लिया था।
चोटी पर पहुंचने के बाद भारत माता की जय, वन्दे मातरम् ,छत्तीसगढ़ महतारी की जय, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया के जयकारे लगाए और बालोद जिले सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया।

 

12500 फीट ऊंची चोटी से पल्लवी ने दिया बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के अन्तर्गत ग्राम तवेरा की रहने वाली बेटी पल्लवी बारले ने उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदार काठां ट्रैक जिसकी ऊंचाई 12500 फीट ऊंची चोटी पर चढ़कर पर 2 जनवरी 2022 की सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर तिरंगा लहराया और इसी के साथ पल्लवी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया।और बेटियों को शिक्षित करने के लिए लोगों को प्रेरित किया। और कहा कि बेटियां किसी से भी कम नहीं है आज बेटियां हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रही है। ऐसा कोई कार्य नहीं जो आज बेटियां नहीं कर रही हो हर क्षेत्र में बेटियां पुरूषों से उत्कृष्ट कार्य कर रही है। पल्लवी बताती है कि भविष्य में वो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ाई करना चाहती है। यह पल्लवी का दूसरा उपलब्धि है।

 

हाथ और पैर पड़ गए थे शून्य लेकिन हार नहीं मानी
जब चढ़ाई शुरू की तो यशवंत और पल्लवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कई बार परिस्थितियां ऐसी भी बनी थी कि किसी भी समय हिम्मत टूट जाए लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी।और दोनों युवक युवती ने दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प और विश्वास के साथ लगातार चढ़ाई करते रहे और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल किया।
यशवंत कुमार टंडन ने बताया कि कई दिनों की लंबी ट्रैकिंग और कड़ी मेहनत के बाद इस कठिन लक्ष्य को हासिल किया।

कैंप जाने तक के नहीं थे पैसे सपनों के आगे आर्थिक स्थिति बन रही थी दीवार कलेक्टर सहित जिला सतनामी समाज के पदाधिकारियों से लगाई गुहार फिर मिली मदद

यशवंत कुमार टंडन और पल्लवी बारले ने बताया कि जब उन्होंने कैंप जाने के लिए घर से पैसे मांगे तो आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें अपने घर से कोई पैसे नहीं मिले। माता पिता खेती-बाड़ी और मनरेगा में कार्य करने के कारण आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन यशवंत ने हार नहीं माना और उन्होंने बालोद जिले के कलेक्टर सम्मानीय श्री जनमेजय महोबे सर को अपनी समस्या बताई तब कलेक्टर ने यशवंत कुमार टंडन को अपने कार्यालय में बुलाकर उनसे बात की और 5000 रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान कर कैंप जाने के लिए मदद की। वहीं जिला सतनामी समाज बालोद के समस्त पदाधिकारियों ने भी समाज के ऐसे गरीब परिवार के प्रतिभावान बच्चों के लिए मदद के लिए आगे आए और दोनों युवक युवती के लिए आर्थिक सहायता की।

गांव का भी बढ़ाया मान संरपच श्रीमती ललिता भुआर्य

ग्राम पंचायत डुड़िया के संरपच श्रीमती ललिता भुआर्य जी ने कहा कि यशवंत हमारे गांव का काफी होनहार व प्रतिभावान, साहसी युवा हैं। जो निरंतर गांव के हित और सम्मान के लिए कार्य करते आ रहा है और गांव का भी मान बढ़ा रहा है। ऐसे साहसिक कार्य कर यशवंत अन्य बच्चों के लिए एक प्रेरणास्रोत का बिंदु बन गया हैं। मैं उन्हें उनकी इस सफलता के लिए बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं देती हूं।

खड़ी चढ़ाई ने दी थी चुनौती
यशवंत और पल्लवी ने बताया कि 12500 फीट ऊंची चोटी केदार काठां ट्रैक तक पहुंचने का सफर काफी बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था। रात के 3 बजे से शुरू ट्रैकिंग काफी अंधेर में चलना और बर्फ के जूतों में फिसलन हो रही थी। लेकिन पहली बार यहां इतनी अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तिरंगा लहराना हमारे लिए किसी सपने से कम नहीं था।
इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के 26 ट्रैकर्स के साथ 280 फीट लम्बा तिरंगा लहराना हमारे लिए एक गर्व और गौरव के क्षण रहें।

शासकीय महाविद्यालय अर्जुन्दा के राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वंय सेवक है यशवंत

शासकीय महाविद्यालय अर्जुन्दा में अभी यशवंत कुमार टंडन बी.ए प्रथम वर्ष में अध्ययनरत हैं। और राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस) के सक्रिय स्वंय सेवक भी है। जो कि राष्ट्र विचार धारा के साथ निरंतर समाज हित और देश हित में कार्य करता रहता है।

गांव आगमन पर पुष्पहारों से किया स्वागत

यशवंत कुमार टंडन और पल्लवी बारले जब कैंप से अपने घर वापस लौटकर आए तब बस से उतरने के बाद उन दोनों का स्वागत उनकी पुष्पहारों, तिलक लगाकर, और आरती उतारकर काफी हार्षो उल्लास के साथ भव्य स्वागत किया गया। और भारत माता की जय, वन्दे मातरम,छत्तीसगढ़ महतारी की जय, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया, के नारे लगाए।

माता-पिता ने कहा गर्व है हमें अपने बेटे पर
यशवंत कुमार टंडन के पिता श्री हूबलाल टंडन और मां श्रीमती सविता टंडन ने कहा चट्टान पर चढ़ने के लिए चट्टान जैसे ही मजबूत इरादे होने चाहिए बेटे ने राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैकिंग में हिस्सा लेकर उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित हिमालय का सबसे ऊंचा ट्रैक केदारकाठां ट्रैक की चोटी पर तिरंगा लहरा छत्तीसगढ़ सहित बालोद जिले और अपने गांव, समाज और हमारा नाम रोशन किया है। हमें गर्व है अपने बेटे पर कि यशवंत हमारा बेटा है।

लोगों ने दी बधाईयां व शुभकामनाएं

इस साहसिक कार्य के लिए इंडियन एडवेंचर फाउंडेशन के प्रेसिडेंट इफ्राहीम अहमद, राजनांदगांव जिले के प्रथम पर्वतारोही रोहित कुमार झा जो छत्तीसगढ़ से टीम का लीडर और साथ में नेशनल लीडर भी है।,

सांसद ने दिया था आश्वासन नहीं मिली मदद, चंदे के पैसे से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुँच गरीब बेटी ने देश के नाम किया सिल्वर मेडल।

कहते हैं कि आपके पास जज्बा और हुनर हो तो आपकी गरीबी कभी भी आपके सपने पर रोड़ा उत्पन्न नहीं कर सकता। यह पंक्ति बालोद जिले के आदिवासी विकास खंड डौंडी के एक छोटे से गांव में रहने वाली 23 वर्षीय राधिका हिड़को पर चरितार्थ होती है।

जो संसाधनों के अभाव के बावजूद अपनी मेहनत और काबिलियत के बलबूते इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता में भारत को सिल्वर मेडल दिला अपनी पहचान इंटरनेशनल लेवल पर बना अपने व अपने माता-पिता के साथ-साथ गांव जिला प्रदेश और देश का नाम रोशन की है।

विशाखापट्टनम के स्वर्णाभारती इंदौर स्टेडियम में दो दिवसीय 5 वीं इंटरनेशनल कराते प्रतियोगिता हुई, जिसमे 9 देश के खिलाड़ी हिस्सा लेने वाले थे और 7 देश के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। पहले स्थान पर बंगला देश रहा।

इससे पहले राधिका दो बार नेशनल कराटे चैंपियनशिप में भाग ले चुकी है 2021 रायपुर में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, तो वही तमिलनाडु में 2019-20 में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल हासिल कर चुकी है।

राधिका हिड़को बालोद जिले के अंतिम छोर डौंडी विकासखंड स्थित एक छोटासा गांव पुसावड़ की रहने वाली है जो बहुत ही गरीब परिवार से आती है बावजूद इसके अपनी गरीबी को पीछे छोड़ कठिन परिश्रम और मेहनत के बलबूते इस मुकाम को हासिल की है।

राधिका कराटे के साथ-साथ कबड्डी में भी विशेव रुचि रखती है जो रोजाना गांव के बालक-बालिकाओं को कराटे की प्रैक्टिस करा आत्मरक्षा की गुण सिखाती है।

 

छोटे से गांव की बेटी की मिली उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी की लहर है और उनके जल्द आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि पूरे उत्साह के साथ उनका स्वागत कर सके।

 

जिले में अनेकों ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें सही मार्गदर्शक नहीं मिल पाता या फिर गरीबी उड़ान के आगे रोड़ा बन जाता है शासन-प्रशासन से भी ऐसे खिलाड़ियों को कोई खास सहयोग नहीं मिल पाता जिसके चलते वे अपने प्रतिभा को सामने नहीं ला पाते।

विडंबना:- कह गए नेताजी…?

देखें सांसद जी ने क्या कहा…?

सांसद मोहन मंडावी द्वारा गरीब बेटी की मदद का मिला था आश्वासन, नहीं मिली मदद, चंदे की पैसों से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गई गरीब बेटी ने देश के नाम किया सिल्वर मेडल

राधिका हिड़को के प्रतियोगिता में हिस्सा लेने विशाखापटनम जाने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में मीडिया द्वारा कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद मोहन मंडावी को जानकारी दें आर्थिक मदद के लिए सवाल किया गया था तो सांसद ने अपने बगल में बैठे दल्ली राजहरा bsp माइन्स के जीएम तपन सूत्रधार को ध्यान देने की बात करते हुए प्रस्ताव बना कलेक्टर को भेज चर्चाकर व डीएमएफ फंड से मदद कराने का आश्वासन दिया था लेकिन सांसद जी की बात रात गई बात गई साबित हो गया और छोटे से गांव के गरीब बेटी ने चंदे से मिले सहयोग के पैसे से विशाखापट्टनम खेलने पहुंच देश के नाम किया सिल्वर मेडल।

 

 

 

 

Big न्यूज़_ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी, कथित संत को रायपुर पुलिस कि 7 सदस्यीय टीम ने खजुराहो से किया गिरफ्तार ।

Nbcindia24/ दरअसल कथित संत कालीचरण द्वारा रायपुर में आयोजित धर्म संसद के मंच से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी किया था। जिसके बाद उनके खिलाफ रायपुर में मामला दर्ज कर पुलिस तीन अलग-अलग टीम महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली तलाश में भेजी गई थी। जहां रायपुर पुलिस की 7 सदस्य टीम को खजुराहो में सफलता मिली। वही पुलिस सन्त कालीचरण को जल्द ही रायपुर लाने की कवायद में जुटी हुई है।

गिरफ्तारी के बाद कि फ़ोटो

बता दें कि बीते शनिवार रायपुर में आयोजित धर्म संसद में महाराष्ट्र से आए कथित संत कालीचरण ने मंच से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी किया था। उन्होंने कहा था इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए राष्ट्र पर कब्जा करना है सन 1947 में हमने अपनी आंखों से देखा कि कैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश पर इस्लाम ने कब्जा किया उन्होंने कहा मोहनदास करमचंद गांधी ने उस वक्त देश का सत्यानाश किया “नमस्कार है नाथूराम गोडसे को जिन्होंने उस……? को मार दिया। वही इस बयान के बाद कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक और राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास ने इस बयान का विरोध करते हुए मंच छोड़ दिया था।

मिसाल:- गांधी जी की हत्या के बाद ग्रामीणों ने गांव में बनाया था समाधि, 30 सालों बाद गांव में चंदा इकट्ठा कर स्थापित कर रहे प्रतिमा।

Nbcindia24/बालोद जिले में एक ऐसा गांव है जहां ग्रामीणों में राष्ट्रपिता स्व. महात्मा गांधी एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के लिए अटूट स्नेह भरा हुआ है।

जिले के गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत झिटिया के आश्रित गांव गोड़मर्रा में 130 घर और लगभग 750 कि जनसंख्या है।

जीवनंदन पिपरिया व ग्रामीण बतलाते हैं जब 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में राष्ट्रपिता स्व.महात्मा गांधी एवं 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की हत्या हुई, तब पूरा गांव शोक में डूबा था, और उसी दिन उनकी याद में ग्रामीणों ने गांव में समाधि स्थल बनाया, ताकि आने वाले युवा पीढ़ी को उनकी विचारधारा और उनके व्यक्तित्व के बारे में बतलाया जा सके।

गांधी के प्रति ग्रामीणों की अटूट आस्था और प्रेम का इस बात से भी अंदाजा लगाया जा सकता है, कि ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर लगभग 3 साल पहले राष्ट्रपिता स्व. महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापना कर चुके है।

 

तो वही एक बार फिर अनेकता में एकता की मिसाल दे ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर दो लाख की लागत से भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की प्रतिमा बनवा गांव के प्रवेश द्वार में कल 28 दिसंबर को स्थापना करने जा रहे, जिनका अनावरण छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों होने वाला है।

इनके अलावा गांव में भारत माता एवं छत्रपति शिवाजी महाराज की भी प्रतिमा स्थापित किए हुए हैं, ताकि गांव के युवा पीढ़ी के दिलों में उनके बलिदान व विचारधारा को रख सके ।

बेटियों ने माँ को दी मुखाग्नि, हर किसी की आंख से छलक पड़े आंसू

Nbcindia/बालोद/गुरूर- आज के युग में बेटिया किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में बेटियां बेटों से आगे निकलकर पुराने जमाने के भ्रम को तोड़ने में लगी हैं। पुराने समय में जिस व्यक्ति का पुत्र नहीं होता था तो उसके अंतिम संस्कार के समय चिता को अग्नि देने का बड़ा सवाल खड़ा हो जाता था, लेकिन अब यह सवाल भी खत्म हो गया है। बेटा ना होने पर बेटिया ही अब यह फर्ज भी निभा रही हैं। ऐसे ही एक सवाल गुरुर ब्लाक के रमतरा में एक बेटी की मां की मौत के बाद खड़ा हुआ, लेकिन बेटी ने आगे आते हुए अपने माता की चिता को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। बेटी के द्वारा किए गए इस मुख्य कार्य को लेकर ग्राम रमतरा सहित जिले भर में बेटी की प्रसंशा की जा रही है।

 

गांव के नागरिक वा छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना संयोजक गरूर ब्लाक, श्री झम्मन लाल हिरवानी ने कहा कि बेटियाँ कभी पराई नही होती गांव की इस दोनो बेटियों ने अपने मां की चिता को मुखाग्नि दिया। आंखों से बहती आंसूओं की धारा और चेहरे पर एक अजीब सा सन्नाटा छा गया।

बता दे कि पुत्री कु0 नीलिमा ठाकुर कु0 वन्दना ठाकुर दोनो सगी बहन है जिनका भाई नही है । जिन्होने जैसे ही अपनी मां की चिता में आग लगाई वहां मौजूद सबकी आंखें डबडबा गई। ग्राम रमतरा निवासी श्रीमती जामुन बाई ठाकुर कुछ समय से बीमार थे। उनकी मौत होने पर उनकी संतान के रूप में दो मासूम बच्चियां रह गईं, जिससे समाज के सामने मातृ की चिता को अग्नि देने का सवाल खड़ा हो गया। इसके बाद समाज के कुछ जागरूक लोगों ने पुत्री के द्वारा ही चिता को अग्नि देने की बात पर मुहर लगने के बाद बेटियाँ कु. नीलिमा, कु. वंदना ने शनिवार को अपने माता का पिंडदान कर चिता को अग्नि दे समाज की सोच को बदल दिया। मृत आत्मा को शांति प्रदान करने वा अंतिम संस्कार के लिए गांव के मधु ठाकुर,चेतन ठाकुर,मोहित राम ठाकुर, छगन लाल ‘सुदर्शन सार्वा, मन्नू लाल, सहित परिवार के अन्य लोग उपस्थित रहें। इस शोक की घड़ी मे श्रद्धांजलि संतप्त प्रकट करते हुये झम्मन लाल हिरवानी ने कहा कि समाज में अब बेटा व बेटी एक समान हैं। इसलिए बेटियों को किसी भी संस्कार से दूर नहीं रखना चाहिए और आज मासूम बेटी ने अपने स्वर्गवासी माता श्रीमती जामुन बाई को मुखाग्नि देकर एक समाज सराहनीय कार्य किया है।

देवी-देवताओं की रहस्यमय जेल और देवी की देव अदालत, कहाँ है यह मंदिर और क्या है इस मंदिर का रहस्य  

Nbcindia24/Chhattisgarh/Balod आमतौर पर थाना के बारे में आप सब जानते है,परन्तु हम आपको रहस्यों से भरी  एक अजीबोगरीब थाना के बारे में बतलाने जा रहे, जहां बड़े बुजुर्गों के कथना अनुसार नियम विरुद्ध गलत कृत्य करने वाले देवी देवताओं को प्रकृति की गोद में बसी मां थानावाली दण्डित कर सजा देती है।
एनबीसी इंडिया 24 यूट्यूब पर देखें हमारी स्पेशल रिपोर्ट |
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के नैनिहाल मां कौशल्या के छत्तीसगढ़ में अनगिनत रहस्य छूपा है, उन्हीं में से एक बालोद जिले के वनांचल क्षेत्र डौंडी ब्लाक स्थित ग्राम ठेमा बुजुर्ग, जहां विशाल अद्भुत दर्जनों बरगद पेड़ के नीचे प्रकृति की गोद में विराजमान है, आदिवासियों की आराध्य देवी बरगहिंया मां दंतेश्वरी की प्राचीन मंदिर, माता का यह मंदिर पहले आसपास 12 गांव के आस्था का केंद्र हुआ करता था, जो वर्तमान समय में बढ़कर 18 गांव की आस्था का केंद्र है, जहां हर अच्छे और शुभ कार्य करने से पहले 18 गांव के ग्रामीण माता के दरबार में पहुंच माथा टेक अनुमति व आशीर्वाद लेकर करते है।
भरतलाल विश्वकर्मा, सचिव- मां दंतेश्वरी मंदिर समिति ग्राम ठेमाबुज़ुर्ग

गांव के बड़े बुजुर्गों के कथन अनुसार ब्रिटिश शासन के दौरान महाराष्ट्र के लांजीगढ़ में मराईराजा का राज हुआ करता था और राजा मां दंतेश्वरी का परम भक्त था, जो अग्रेजो से त्रस्त होकर लांजीगढ़ में अपने चल अचल संपत्ति को  छोड़ कही चले गए, जिन्हें राजा के दीवान व सेना, देवी-देवताओं के साथ हाथी, घोड़ा, कुत्ते को लेकर महाराष्ट्र लांजीगढ़ से ढूंढने निकले और जहां भी पहुंचे कुछ ना कुछ निशान छोड़ते आगे बढ़ते गए, तब उस दिनों के जंगल व वर्तमान में बालोद जिले के ग्राम कामता गांव पहुंचे, जहां कुछ समय ठहरने और भोजन के बाद उनका काफिला आगे बढ़ घोरदा नदी पार कर ठेमाबुज़ुर्ग की ओर निकल पढ़े., इसलिए इस जगह को कामता गांव का नाम दिया गया।
सुकलुराम कोसमा, ग्रामीण ग्राम कामता

जब दीवान व देवी-देवताओं का काफिला कामता गाँव से आगे बढ़ा तो साथ आए एक कुत्ता जूठन पत्तल को चाटते वही रुक गया और वह कुत्ता पत्थर में तब्दील हो गया, जो आजतक रहस्य बना हुआ है…?

वही जब दीवान और सेना के साथ मां दंतेश्वरी का काफिला अद्भुत प्राकृतिक बरगद पेड़ों के नीचे ठेमा पहुंचा, तो पेड़ो की भौगोलिक सुंदरता को देख मां दंतेश्वरी आगे ना बढ़ यही रहने का निर्णय ले यही ठहर गई, तब से इस गांव का नाम ठेमा से ठेमाबुजुर्ग पड़ गया, तब से यहाँ के लोग प्रकृति की पूजा करते आ रहे हैं।
न्यायालय [अदालत] के बारे में आप सब जानते है, जहाँ अपराधी को सजा निर्दोष को न्याय मिलता है, पर आज हम आपको इस मंदिर की अजीबोगरीब रहस्जाय बतलाने जा रहे, जहां गांव के बड़े बुजुर्गों के कथना अनुसार देवी और देवताओं की आदलत लगती  है, जिसमे थाना और सिपाही भी हैं, जहाँ नियम विरुद्ध गलत कार्य करने वाले देवी-देवताओं या जादू टोना करने वाले शैतानों के खिलाफ स्वयं मां दंतेश्वरी सुनवाई कर सजा देती है, .जिन्हें थानावाली देवी भी कहते है, ग्रामीणों के अनुसार इस दौरान मंदिर का वातावरण कुछ अलग होता है, जिनके बारे में ग्रामीण कुछ बताने से परहेज कर माता के आदेशानुसार रहस्य रखने की बात कहते है, आपको बतलादे कि ब्रिटिश शासन के दौरान पहले क्षेत्र का थाना ठेमाबुजुर्ग में हुआ करता था, जिन्हें 1903 में डौंडी शिफ्ट किया गया|

मंदिर समिति के अध्यक्ष बतलाते हैं कि इस मंदिर में एक राज फिरनतीन देवी रहती है, जिनके सामने मंदिर समिति के पांच पंचों द्वारा पूजा अर्चना कर जिस किसी के लिए कोई मन्नत मांगता है, तो माता उनकी मन्नरे पूरी करती है।

बतला दे कि दिपावली के तुरंत बाद प्रथम रविवार को इसी मंदिर प्रांगण से क्षेत्र में पारंपरिक मड़ाई मिले की शुरुआत होती है, जहां आस पास 18 गांव के सबसे ज्यादा डांग डोरी के साथ देवी-देवता इस मंदिर के देव मंडई में शामिल होते है, वही दोनों नवरात्रि के दिनों में माता के इस मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किया जाता है, जहां दूरदराज से माता के भक्त व जनप्रतिनिधि भारी संख्या में माता के दरबार में पहुंच श्रद्धा सुमन अर्पित कर आशीर्वाद लेते हैं|
माता के प्रति लोगों की आस्था ही है कि क्षेत्र की विधायिका व मंत्री अनिला भेड़िया हर शुभ कार्य की शुरुआत से पहले माता के मंदिर पहुँच माथा टेकती है, 20 जनवरी 2021 को प्रदेश के मुख्या भूपेश बघेल ठेमाबुज़ुर्ग में आदिवासी समाज द्वारा आयोजित सम्मेलन में पहुँच, माता की दर्शन कर मंदिर परिसर में सामुदायिक भवन व तांदुला नदी में एक पूल की सौगात दिए।

इसी तरह सरकार और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों  के साथ आम लोगों का सहयोग मिलता रहेगा, तो जल्द ही मां दंतेश्वरी का यह मंदिर भव्य आस्था का केंद्र के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित होने की उम्मीद है |

मंदिर परिसर में विशाल दर्जनों बरगद के पेड़ पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनुपम उदाहरण है, जिन्हें देख आपको बार-बार आने का मन होगा  है |

किसान भाइयों को बतलाया गया किसान दिवस का महत्व।

Balod/ एचडीएफसी बैंक परिवर्तन व वृत्ति संस्था द्वारा कल 23 दिसम्बर को बालोद ब्लॉक के 2 गांव पैरी और करहीभदर में किसान दिवस मनाया गया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम सरपंच , विशेष अथिती एस के शर्मा सर उद्यानिकी विभाग, जनपद सदस्य एव गणमान्य नागरिको ने अपनी सहभागिता दिऐ।
कार्यक्रम के अंतर्गत उपस्थित किसान भाई बहनो को योजना से संबंधित जानकारी प्रदान किया गया साथ ही किसान दिवस का महत्व ,क्यु मनाया जाता है जैसी बातो की जानकारी संस्था प्रमुखो द्वारा दिया गया |

साथ ही किसान उत्पादक संगठन (FPO ) बनाने के फायदे तथा कार्यो की विस्तृत जानकारी भी दी गई ,उद्यानिकी विभाग प्रमुख एस के शर्मा जी व्दारा विभाग में चल रही विभिन्न योजनाओं से संबंधित जानकारी प्रदान किया गया
कार्यक्रम में ग्रामीण जन सहित वृत्ति संस्था से प्रोजेक्ट मैनेजर पुष्पेन्द्र यादव ,एग्रीकल्चर एक्सपर्ट शाहनवाज़ मंसुरी ,प्रवीण बागडे एवं ग्राम समन्वयको ने अपना योगदान दिया कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को भेंट स्वरूप कटहल के पौधे वितरण किए गए

अच्छी खबर:- बालोद जिले के दिव्यांग पर्वतारोही चित्रेश साहू को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 12 लाख 60 हजार रूपए देने की घोषणा ।

Nbcindia24/रायपुर, 14 दिसम्बर 2021/मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज रायपुर में आयोजित रन फॉर सीजी प्राइड के मंच से बालोद जिले के दिव्यांग पर्वतारोही श्री चित्रसेन साहू को 12 लाख 60 हजार रूपए प्रदान करने की घोषणा की है। श्री साहू को यह राशि छत्तीसगढ़ सरकार और सीएसआर मद से प्रदान की जाएगी।

श्री साहू ने छत्तीसगढ़ में नई सरकार के आगामी 17 दिसम्बर को 3 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘रन फॉर सीजी प्राइड’ (दौड़ स्वाभिमान और गर्व की) में हिस्सा लिया था। श्री चित्रसेन साहू ने मुख्यमंत्री श्री बघेल को सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि अब माउंट अकोंकागुआ की कठिन चढ़ाई कर छत्तीसगढ़ महतारी का नाम फिर से गौरवान्वित करने का पूरा प्रयास करूंगा।

देशभर में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से सर्वाधिक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ को मिला प्रथम पुरस्कार

16 नवम्बर से 12 दिसम्बर के बीच देशभर में बने डिजिटल हेल्थ आईडी में अकेले छत्तीसगढ़ की भागीदारी 35 प्रतिशत

 

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ को किया पुरस्कृत

 

Nbcindia24/रायपुर. 13 दिसम्बर 2021. हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से सर्वाधिक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत देश में 16 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे 2021 के दौरान छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 53 हजार 067 डिजिटल हेल्थ आईडी बनाए गए। देशभर में इस दौरान बनाए गए कुल एक लाख 52 हजार 942 आईडी में अकेले छत्तीसगढ़ की भागीदारी 35 प्रतिशत है। ये सभी आईडी राज्य के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में बनाए गए हैं।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम को बधाई दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने आज नई दिल्ली में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को पुरस्कृत किया। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने भी स्वास्थ्य कर्मियों की पीठ थपथपाते हुए इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि 16 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान राज्य के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सामान्य स्क्रीनिंग के साथ-साथ कैंसर जैसी बीमारियों की भी स्क्रीनिंग की गई। उन्होंने बताया कि इस दौरान वहां विशेष अभियान के तहत डिजिटल हेल्थ आईडी भी बनाए गए। इस आईडी में मरीज की बीमारी और इलाज से संबंधित सभी तरह की जानकारियां दर्ज रहेंगी। इससे मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का तुरंत पता लगाया जा सकता है।

16 नवंबर से 12 दिसंबर की अवधि में राज्य के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग की गई जिसमें 5 लाख 2 हजार 535 लोगों की हाइपरटेंशन, 4 लाख 87 हजार 640 लोगों की डाइबिटीज़, 3 लाख 65 हजार 991 लोगों की मुख कैंसर,1 लाख 62 हजार 992 लोगों का स्तन कैंसर एवं 1 लाख 15 हजार 476 लोगों में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की गई।

छत्तीसगढ़ के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में 53 हजार 67 डिजिटल आई.डी.कार्ड बनाए गये हैं। वहीं मध्यप्रदेश में 43 हजार 953 और ओडिशा में 17 हजार 342 डिजिटल हेल्थ आई.डी. बनाए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रभारी राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री आनंद साहू ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की ओर से पुरस्कार ग्रहण किया।

 

इस तरह बनवाएं डिजिटल हेल्थ आईडी

 

मोबाइल नंबर या आधार कार्ड के ज़रिए हेल्थ आईडी जनरेट किया जा सकता है । आधिकारिक वेबसाइट https://healthid.ndhm.gov.in/register से हेल्थ आईडी कार्ड बनाने के लिए पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। मोबाइल या आधार के ज़रिए हेल्थ आईडी बनाने के लिए अपना नाम, जन्म का वर्ष, लिंग, पता और मोबाइल नंबर/आधार नंबर की जानकारी देनी होगी।

कल की भविष्य को आज लीनेस क्लब चिरमिरी स्वास्थ एवं स्वच्छता के प्रति प्रेरित कर प्रादय की स्वच्छता किट।

Nbcindia24/मोहम्बद जावेद सिद्धिकी कोरिया/ लीनेस क्लब चिरमिरी की ” पहल ” से आज द्वारा स्वच्छता कार्यक्रम अंतर्गत बच्चों को स्वच्छता किट का प्रदाय किया गया।

नगर के छोटा बाजार अंबेडकर वार्ड आंगनबाड़ी केंद्र में आज बच्चों को टूथ ब्रश,पेस्ट, साबुन, तेल एवमं कुरकुरे वितरण कर खाने से पहले अच्छे से हैंड वॉश करने जागरूक किया गया। वही ब्रश करने, नाखून छोटे रखने साफ सुथरा कपड़ा पहनने से शांत व शरीर स्वस्थ होने की जानकारी देते हुए। स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने कचरा को कूड़ेदान में डालने घर के आसपास सफाई रखने, प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने एवं विद्यालय को साफ सुथरा रखने प्रेरित किया।

लीनेस क्लब की अध्यक्ष ली. कल्पना केशवानी जी के उपस्थित के साथ साथ क्लब की सदस्य ली.ममता सिन्हा,ली. रश्मि वधावन, ली. आभा गुप्ता,एवम ली. सुमन गुप्ता सक्रिय रही।