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शनि. मई 16th, 2026

जिला अस्पताल पहुँचे संभाग आयुक्त, वार्ड-ओपीडी का लिया जायजा, मरीजों से की बातचीत

बालोद | दुर्ग संभाग के संभाग आयुक्त S. N. Rathore ने शुक्रवार को जिला चिकित्सालय बालोद का आकस्मिक निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों और कक्षों में पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर कलेक्टर Divya Umesh Mishra, एसडीएम Nutan Kanwar, मुख्य अस्पताल अधीक्षक Dr. R. K. Shrimali सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान संभाग आयुक्त ने जिला चिकित्सालय के ओपीडी, सामान्य रोगी कक्ष, नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग, आपातकालीन कक्ष, पुरुष एवं महिला मेडिकल वार्ड सहित कई विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने ईएनटी विभाग के ओपीडी में उपस्थित चिकित्सकों से मरीजों की जांच के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी भी ली।

राठौर ने पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने मरीज निर्मल से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों और अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारियों को मरीजों का समुचित उपचार करने के साथ उनके प्रति मधुर और आत्मीय व्यवहार रखने की भी समझाइश दी।

निरीक्षण के दौरान संभाग आयुक्त ने अधिकारियों को जिला चिकित्सालय परिसर में प्रतीक्षालय और कैंटीन निर्माण के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

नकल पर सख्ती: बालोद में बोर्ड परीक्षा केंद्रों का उड़नदस्ता दल ने किया औचक निरीक्षण

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा आयोजित हाई स्कूल मुख्य परीक्षा 2026 के तहत बालोद जिले में जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिले के कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया गया।

उड़नदस्ता दल ने शासकीय बुनियादी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालोद (पाररास), शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय बालोद, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय बालोद तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय लाटाबोड़ में पहुंचकर परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान किसी भी परीक्षा केंद्र में नकल का कोई प्रकरण सामने नहीं आया। सभी केंद्रों में परीक्षा शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित होती पाई गई।

जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी, सहायक परियोजना समन्वयक लेख राम साहू, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी  उमा ठाकुर, जिला खेल समन्वयक सपन जेना, व्यायाम शिक्षक सुरेश शांडिल्य एवं व्यायाम शिक्षक आदिला खान शामिल रहे।

बालोद में भीषण आग: किसान के बाड़े में खड़े 3 ट्रैक्टर और एक कार जलकर खाक

Chhattisgarh: बालोद जिले के गुंडरदेही थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेरुद में शुक्रवार को भीषण आगजनी की घटना सामने आई है। यहां एक किसान के बाड़े में खड़े तीन ट्रैक्टर और एक कार आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गए।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसान राजेश यदु के बाड़े में खड़ी कृषि वाहनों में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और बाड़े में रखे तीनों ट्रैक्टर और एक कार को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया।

 

घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक वाहन बुरी तरह जल चुके थे। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।

 

मामले की जानकारी मिलते ही गुंडरदेही पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आग लगने के कारणों को लेकर जांच की जा रही है।

बालोद को खेल अधोसंरचना की बड़ी सौगात: 1300 लाख की परियोजनाएं स्वीकृत, बनेंगे स्टेडियम व इंडोर हॉल

बालोद। खेल प्रतिभाओं से समृद्ध बालोद जिले के लिए गर्व का क्षण है। विधानसभा के हालिया बजट सत्र में जिले को खेल अधोसंरचना के लिए कुल 1300 लाख रुपये (13 करोड़ रुपये) की बड़ी सौगात मिली है। इस स्वीकृति से जिले में आधुनिक खेल सुविधाओं का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

क्या-क्या होगा निर्माण?

दल्लीराजहरा में इंडोर मल्टीपरपज हॉल निर्माण हेतु 500 लाख रुपये स्वीकृत

वर्ष 2026-27 के लिए 200 लाख रुपये का प्रावधान

 

जिला स्तरीय बहुउद्देश्यीय स्टेडियम निर्माण हेतु 800 लाख रुपये स्वीकृत

वर्ष 2026-27 के लिए 200 लाख रुपये का प्रावधान

इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन सहित विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए आधुनिक मंच मिलेगा।

जनप्रतिनिधियों के प्रयास रंग लाए

जिले में खेल सुविधाओं की मांग को लेकर भाजपा नेता राकेश यादव तथा छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं भाजपा जिला महामंत्री सौरभ लूनिया लगातार प्रयासरत थे।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, खेल मंत्री अरुण साव तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात और पत्राचार कर जिले की खेल आवश्यकताओं को प्रमुखता से रखा।

 

लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि बजट सत्र में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति मिली, जिसे जिले की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

खिलाड़ियों के सपनों को मिलेंगे पंख

नई खेल अधोसंरचना तैयार होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के खिलाड़ियों को जिला स्तर पर ही बेहतर प्रशिक्षण सुविधा मिलेगी। इससे:

 

प्रतिभाओं को बाहर बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा

स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव होगा

युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और करियर के अवसर बढ़ेंगे

 

स्वीकृति मिलने पर सौरभ लूनिया ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, खेल मंत्री, वित्त मंत्री, भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन एवं जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और बालोद को मिली यह सौगात आने वाले वर्षों में ऐतिहासिक साबित होगी।

 

निश्चित ही, यह फैसला बालोद को खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। 🏆

दल्लीराजहरा: 1955 से आज तक खनन का सफर, भिलाई इस्पात संयंत्र की धड़कन बनी लौह अयस्क खदानों का इतिहास

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित दल्लीराजहरा की लौह अयस्क खदानों ने न केवल औद्योगिक विकास की इबारत लिखी, बल्कि श्रमिक आंदोलनों और सामाजिक परिवर्तन की भी मिसाल कायम की। वर्ष 1955 में खनन कार्य की शुरुआत के साथ यह क्षेत्र देश के औद्योगिक मानचित्र पर उभरा और आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है।

1955: औद्योगिक युग की शुरुआत
सन् 1955 में जब भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की स्थापना हुई, तब उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए दल्लीराजहरा की खदानों का विकास किया गया। 1959 में भिलाई इस्पात संयंत्र में उत्पादन शुरू हुआ और दल्लीराजहरा उसकी जीवनरेखा बन गया।

1960–1980: श्रमिक संघर्ष और सामाजिक जागरण
इन दशकों में खदानों में हजारों मजदूर कार्यरत रहे। बेहतर वेतन, सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर बड़े श्रमिक आंदोलन हुए। इस दौर में शंकर गुहा नियोगी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मजदूर आंदोलन ने नई दिशा पाई। दल्लीराजहरा देशभर में श्रमिक एकता और संघर्ष का प्रतीक बना।

1990–2000: तकनीकी आधुनिकीकरण
समय के साथ खनन प्रक्रिया में आधुनिक मशीनों और नई तकनीकों का उपयोग बढ़ा। जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई ।

2000 के बाद: नए विकल्प और बदलाव
छत्तीसगढ़ राज्य गठन (2000) के बाद औद्योगिक नीतियों में बदलाव आए। धीरे-धीरे भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति के नए स्रोत विकसित किए गए, जिससे दल्लीराजहरा की निर्भरता कम हुई। इसके बावजूद यह क्षेत्र ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है।

वर्तमान स्थिति
आज दल्लीराजहरा की खदानें सीमित उत्पादन के साथ संचालित हैं। क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार, पर्यटन और ऐतिहासिक पहचान को संजोने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ खदान नहीं, बल्कि संघर्ष, विकास और पहचान का प्रतीक है।

✍️ निष्कर्ष
1955 से शुरू हुआ दल्लीराजहरा माइंस का सफर केवल खनन तक सीमित नहीं रहा। यह औद्योगिक प्रगति, श्रमिक अधिकारों की लड़ाई और सामाजिक परिवर्तन की कहानी भी है। बदलते समय के साथ चुनौतियाँ जरूर आईं, लेकिन दल्लीराजहरा आज भी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बना हुआ है।

बिग ब्रेकिंग: बालोद में स्कूल वैन हादसा, एक बच्ची की मौत, कई घायल

जानकारी के अनुसार, आजाद पब्लिक स्कूल डौण्डी की वैन छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने मरारटोला जा रही थी। इसी दौरान मरारटोला नाला के पास पुल से वैन नीचे गिर गई। वैन में कुल 21 बच्चे सवार थे।

🚨 नशे में क्लीनर चला रहा था वैन

प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि वैन चालक की जगह क्लीनर वाहन चला रहा था, जो शराब के नशे में था। इस गंभीर लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

🏥 108 से पहुंचाया गया अस्पताल

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को 108 एंबुलेंस के माध्यम से डौण्डी उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

⚫ मृत बच्ची की पहचान

हादसे में जान गंवाने वाली बालिका की पहचान वेदांसी, पिता स्वर्गीय चिम्मन लाल साहू के रूप में हुई है। मासूम की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

👮 पुलिस जांच में जुटी

डौण्डी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक की भूमिका की भी जांच होगी।


यह हादसा एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

लाल आतंक का अंधेरा छंटा: गोगुंडा में पहली बार जला बल्ब, 78 साल बाद पहुँची बिजली

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की दुर्गम पहाड़ियों पर बसा गोगुंडा गांव आज ऐतिहासिक पल का गवाह बना। आजादी के 78 वर्ष बाद, करीब 650 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गांव में पहली बार बिजली का बल्ब जला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि चार दशकों से विकास से कटे इस क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण भी है।

अंधेरे का अंत: ढिबरी से बिजली तक

सूरज ढलते ही जो गांव कभी घने जंगलों और नक्सलियों के सन्नाटे में डूब जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई और घरों की रौनक लौट आई है। मिट्टी के तेल की ढिबरी और टॉर्च के सहारे जीवन बिताने वाले ग्रामीणों की आंखों में आज खुशी के आंसू हैं।

गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का ने भावुक होकर कहा,
“हमने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीते जी गांव में बिजली देख पाएंगे। आज लगता है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर है।”

सुरक्षा और विकास का संगम

यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे सुरक्षाबलों और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा।

  • सुरक्षा कवच: Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) की 74वीं बटालियन और पुलिस के सहयोग से क्षेत्र में कैंप स्थापित किया गया, जिससे नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना ध्वस्त हुआ।

  • दुर्गम राहें हुईं आसान: जहां पहले 5 घंटे पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता था, अब वहां विकास कार्यों की गाड़ियां पहुंच रही हैं।

  • प्रशासनिक पहल: कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से शुरू की गईं।

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना सामाजिक और आर्थिक बदलाव की शुरुआत है।
“हमारा लक्ष्य जिले के अंतिम छोर तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाना है। सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।”

वहीं 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे ने बताया कि कैंप स्थापना के बाद क्षेत्र में स्थायित्व आया है और यह रोशनी शांति और प्रगति का नया अध्याय लिखेगी।

एक नई सुबह की शुरुआत

गोगुंडा में जला यह पहला बल्ब केवल बिजली का प्रतीक नहीं, बल्कि दशकों के भय और अलगाव पर लोकतंत्र की जीत का संकेत है। बस्तर के बदलते स्वरूप की यह कहानी बताती है कि जब सुरक्षा और विकास साथ चलते हैं, तो सबसे दुर्गम पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।

अब गोगुंडा का अंधेरा स्थायी रूप से छंट चुका है—और वहां बस भविष्य की चमक बाकी है।

कर्तव्य पथ पर थम गई जिंदगी: बस की टक्कर से आरक्षक की मौके पर मौत

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बेहद मार्मिक खबर सामने आई है। कर्तव्य पथ पर निकले एक जवान की जिंदगी सड़क हादसे में थम गई। बालोद कोतवाली थाने में पदस्थ 35 वर्षीय आरक्षक ठनेश कुमार टेमार्य की सोमवार दोपहर ड्यूटी के दौरान दर्दनाक मौत हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार, ठनेश कुमार समंस वारंट तामील करने के लिए देवारभाट, जमरुवा और जगतरा गांव की ओर जा रहे थे। दोपहर करीब 1 बजे जब वे बालोद–झलमला मार्ग पर सिवनी मार्केट के सामने पहुंचे, तभी तेज बारिश के बीच लेफ्ट साइड से जा रही कांकेर बस को ओवरटेक करने के दौरान उनकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वे सड़क पर गिर पड़े और बस का ड्राइवर साइड का पहिया उनके सीने के ऊपर से गुजर गया।

हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक को गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया है। बस पखांजूर से दल्लीराजहरा होते हुए रायपुर की ओर जा रही थी।

2012 में हुई थी नियुक्ति, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मूल रूप से डौंडीलोहारा ब्लॉक के सहगांव निवासी ठनेश कुमार की पुलिस विभाग में नियुक्ति वर्ष 2012 में हुई थी। वे झलमला स्थित पुलिस कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके पिता नरोत्तम सिंह बालोद कलेक्टोरेट में प्यून के पद पर कार्यरत हैं।

ड्यूटी के दौरान बेटे की असमय मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। सहकर्मियों के अनुसार ठनेश बेहद शांत, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ जवान थे।

कर्तव्य निभाते-निभाते एक बेटा की मौत 

यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों के टूटने की कहानी है। समंस तामील करने निकला एक जवान घर वापस नहीं लौटा। पीछे छूट गए बूढ़े पिता की उम्मीदें और परिवार का सहारा ।

आकांक्षा’ के तहत 35 युवा चेन्नई रवाना

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह।

नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक सकारात्मक और प्रेरक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व और कलेक्टर Amit Kumar के मार्गदर्शन में संचालित ‘आकांक्षा – सशक्त युवा, सशक्त सुकमा’ परियोजना के तहत जिले के 35 युवा (16 युवतियां एवं 19 युवक) प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार हेतु चेन्नई के लिए रवाना हुए।

 

लाइवलीहुड कॉलेज परिसर से हरी झंडी दिखाकर युवाओं के दल को विदा किया गया। इस अवसर पर परिसर में उत्साह, आत्मविश्वास और नए सपनों की चमक साफ नजर आई।

 

एमओयू से खुला वैश्विक अवसरों का द्वार

 

जिला प्रशासन ने निजी क्षेत्र में ठोस रोजगार अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्राइव मैनेजमेंट सर्विसेज, चेन्नई के साथ विशेष एमओयू किया है। इस साझेदारी के माध्यम से सुदूर वनांचल के युवाओं को अब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की कंपनियों में कार्य करने का अवसर मिल रहा है।

 

यह पहल उन युवाओं के लिए नई राह खोल रही है, जो अब तक संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे रह जाते थे।

 

मुख्य बिंदु – एक नजर में

 

महिला सशक्तिकरण: चयनित 35 युवाओं में 16 युवतियों की भागीदारी, आत्मनिर्भर नारी की दिशा में मजबूत कदम।

 

आर्थिक सशक्तिकरण: जिले से बाहर पहली बार रोजगार का अवसर, जिससे स्थायी आय और आत्मसम्मान दोनों मिलेंगे।

 

प्रशासनिक दूरदर्शिता: कलेक्टर अमित कुमार ने इसे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव बताया।

 

कलेक्टर ने सभी चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल नौकरी दिलाने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान देने की पहल है। हमारा लक्ष्य है कि जिले का हर युवा हुनरमंद बने और उसे आजीविका के लिए श्रेष्ठ मंच मिले।

 

युवाओं की जुबानी – उम्मीद और गर्व

दूरस्थ अंचलों से आए युवाओं में इस अवसर को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।

 

सोड़ी बसंती (ग्राम आसिरगुड़ा, कोंटा) ने कहा, “मैं पहली बार घर से दूर जा रही हूं। अब मुझे रोजगार मिल गया है और मैं अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पाऊंगी। यह मेरे जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण है।”

 

सोनिया नुप्पो (बोरगुड़ा) ने बताया, “जिला प्रशासन की यह पहल बहुत सराहनीय है। हम मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासन के आभारी हैं, जिन्होंने हमारे भविष्य के बारे में सोचा।”

 

भविष्य की दिशा

 

सुकमा जिला प्रशासन आने वाले समय में रोजगार मेलों, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ नई साझेदारियों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला सुकमा अब “सशक्त, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे जिले” की नई पहचान गढ़ रहा है।

 

इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर, लाइवलीहुड कॉलेज के प्रभारी अधिकारी कैलाश कश्यप एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

जिला पंचायत में विकास योजनाओं की मैराथन समीक्षा निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण करने के निर्देश लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। जिला पंचायत सभाकक्ष में सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मुकुन्द ठाकुर ने जनपद पंचायत सुकमा अंतर्गत संचालित विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, सचिव तथा मैदानी अमला उपस्थित रहे। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की समीक्षा

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2024-26 तक के लंबित स्वीकृत आवासों को एक सप्ताह के भीतर पूर्ण स्वीकृति प्रदान करने के निर्देश दिए गए। प्रथम किश्त प्राप्त आवासों में एक सप्ताह के भीतर कार्य प्रारंभ कर एक माह के भीतर प्लिंथ टैगिंग पूर्ण करने को कहा गया। द्वितीय किश्त प्राप्त आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण करने तथा वर्ष 2016 से 2023 तक के अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।

मनरेगा अंतर्गत निर्देश

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत लंबित मजदूरी भुगतान शीघ्र करने, सभी श्रमिकों का ईकेवाईसी पूर्ण कर एनएमएमएस के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित कार्यों के लिए 90 दिवस का मस्टरोल जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लेबर बजट अंतर्गत सभी कार्यों को युक्तधारा पोर्टल पर शत-प्रतिशत अपलोड करने को कहा गया।

 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पर जोर

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लखपति दीदी योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में कम से कम दो ग्रामों का सैचुरेशन सुनिश्चित करने तथा सभी ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत महिला स्व-सहायता समूह गठन के निर्देश दिए गए।

 

स्वच्छता एवं अन्य योजनाओं की समीक्षा

बैठक में आरजीसी योजना के अप्रारंभ कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने तथा प्रगतिरत निर्माण कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 28 फरवरी 2026 तक सभी पात्र परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजने, ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराने, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा शत-प्रतिशत शौचालय उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आगामी ग्राम सभा में स्वच्छता एवं खुले में शौच मुक्त ग्राम के लिए शपथ वाचन अनिवार्य रूप से कराने को भी कहा गया। बैठक में जनपद सीईओ सुकमा सुश्री निधि प्रधान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।