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शनि. मई 16th, 2026

रायपुर में दर्दनाक हादसा: सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 3 मजदूरों की मौत

राजधानी रायपुर में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शहर के रामकृष्ण हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार के रूप में हुई है। तीनों रायपुर के सिमरन सिटी क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए तीनों मजदूरों को अंदर उतारा गया था। इसी दौरान टैंक में मौजूद जहरीली गैस की वजह से एक-एक कर तीनों की हालत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर दम घुटने को मौत का कारण माना जा रहा है।

घटना के बाद मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सेप्टिक टैंक में उतारा गया। साथ ही, प्रशिक्षित कर्मचारियों की बजाय सामान्य मजदूरों से यह जोखिम भरा काम कराया गया।

जानकारों के मुताबिक, सेप्टिक टैंक की सफाई अत्यंत खतरनाक कार्य होता है, जिसे निर्धारित सुरक्षा मानकों और उपकरणों के साथ ही किया जाना चाहिए। इसमें गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य सुरक्षा किट का उपयोग अनिवार्य होता है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं परिजन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

जहाँ कभी खामोशी में गूंजती थी गोलियों की आवाज… अब वहीं गूंजेगा भक्ति का शंखनाद

“डर से विश्वास तक की यात्रा”।

धर्मेन्द्र सिंग बीजापुर…

छत्तीसगढ़/बीजापुर के घने जंगल जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चा में रहते थे अब एक नई पहचान गढ़ने जा रहे हैं।
यहां लगने वाला “सकल नारायण मेला” अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बदलाव, विश्वास और शांति की मिसाल बनता जा रहा है।

नक्सल साये से आस्था के उजाले तक

एक समय था जब इन जंगलों में कदम रखना भी खतरे से खाली नहीं था। नक्सल प्रभाव के चलते यह इलाका लंबे समय तक भय और असुरक्षा का केंद्र बना रहा।
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, सुरक्षा बलों की सक्रियता और प्रशासन की रणनीति के चलते नक्सल असर कम हुआ है।

और इसी बदलाव के बीच अब यहां हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने वाला है।

🕉️ क्या है सकल नारायण मेला?

यह मेला भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा को समर्पित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहाड़ी पर स्थित गुफा में विशेष शक्ति है, जहां भीषण गर्मी में भी गुफा के भीतर ठंडक बनी रहती है, गुफा की मिट्टी को चमत्कारी माना जाता है, दूर-दराज से श्रद्धालु मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं, यही रहस्य और आस्था का संगम इस मेले को खास बनाता है।

रहस्यमयी गुफा: आस्था का केंद्र

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है पहाड़ी पर बनी वह प्राचीन गुफा, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन विश्वास उन्हें हर मुश्किल पार करा देता है। लोगों का मानना है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मेले को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है,और सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती कर पहाड़ी रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, हर स्तर पर कोशिश है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिले।

तीन राज्यों से उमड़ेगा जनसैलाब

इस बार मेले में सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और तेलंगाना से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। नक्सल प्रभाव कम होने के कारण इस बार भीड़ पहले से ज्यादा होने के आसार हैं।

बदलाव की नई कहानी

सकल नारायण मेला अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जहां डर की जगह विश्वास ने ले रही है।

👉 जहां कभी नक्सलियों का साया था…
👉 वहीं अब आस्था, शांति और एकता का सबसे बड़ा मेला सजने जा रहा है।

बीजापुर के जंगल अब एक नई पहचान बना रहे हैं ।

बालोद में ‘मुरुम घोटाला’! किसानों के श्रमदान पर फर्जी बिल, 3.17 लाख की बंदरबांट का आरोप

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत और श्रमदान से तैयार हुए धान खरीदी केंद्र को कागजों में ‘घोटाले’ में बदल देने का आरोप लगा है।

मामला भर्रीटोला (43) सेवा सहकारी समिति से जुड़ा है, जहां समिति प्रबंधक भिखम लाल साहू और प्राधिकृत अधिकारी कुसुमकसा भाजपा नेता योगेंद्र सिन्हा पर पद के दुरुपयोग का आरोप है। बताया जा रहा है कि समिति के प्रबंधक के साथ मिलीभगत कर 3 लाख 17 हजार रुपये का फर्जी बिल लगाया गया और रकम निकाल ली गई।

 कैसे हुआ ‘खेल’?

 

ग्रामीणों के अनुसार, भर्रीटोला समेत आसपास के गांवों—रजहिं, ककरेल, देवपांडुम, चिपरा और जुनवानी—के करीब 815 किसान कुसुमकसा स्थित सेवा सहकारी समिति में धान बेचने जाते हैं। दूरी ज्यादा होने से परेशान किसानों ने अपने गांव में ही खरीदी केंद्र खोलने की मांग की थी।

मांग पूरी होने पर किसानों ने खुद चंदा इकट्ठा किया, मुरुम मंगवाया और श्रमदान कर जमीन समतल की। यानी पूरा काम गांव वालों ने अपने दम पर किया।

लेकिन आरोप है कि इसी काम के नाम पर समिति प्रबंधक ने योगेन्द्र सिन्हा फर्म के नाम से 3.17 लाख रुपये का फर्जी बिल लगाकर चेक जारी कर दिया।

खुलासा और फिर ‘डैमेज कंट्रोल’

जब यह मामला ग्रामीणों के बीच उजागर हुआ तो विवाद बढ़ने लगा। दबाव बढ़ते ही प्रबंधक भिखम लाल साहू ने रकम वापस समिति के खाते में जमा करा दी। लेकिन सवाल यह है कि अगर गड़बड़ी नहीं थी, तो पैसे लौटाने की नौबत क्यों आई?

किसानों का आरोप

ग्रामीणों का साफ कहना है—

“जब हमने खुद चंदा और श्रमदान से काम किया, तो फिर लाखों रुपये का भुगतान किस बात का किया गया? यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है, इसकी जांच होनी चाहिए।”

प्रबंधक की सफाई

समिति प्रबंधक का कहना है कि उन्हें प्राधिकृत अधिकारी योगेंद्र सिन्हा द्वारा चेक दिया गया था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि मुरुम ग्रामीणों ने खुद डलवाया है। बाद में जानकारी मिलने पर राशि वापस जमा कर दी गई।

बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि सहकारी समितियों में संभावित भ्रष्टाचार के उस मॉडल की झलक है, जहां
👉 कागजों में काम दिखाकर पैसे निकाले जाते हैं
👉 ग्रामीणों की मेहनत पर ‘फर्जी बिल’ बनते हैं

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फिर से ‘रफा-दफा’ कर दिया जाएगा।

जब कलेक्टर खुद पहुंचे महुआ बीन रही ‘मंगली’ के द्वार

सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ बस्तर के सुदूर अंचलों में शिक्षा की लौ जलाने के लिए प्रशासन अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरकर भविष्य संवारने में जुटा है। कलेक्टर अमित कुमार के हालिया दौरे में एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि एक संवेदनशील नेतृत्व किस तरह बदलाव की नींव रखता है।

 

खेतों के बीच रुका काफिला, जागा भविष्य

गुरुवार को जब कलेक्टर मारोकी, मानकापाल, परिया और कुचारास जैसे दूरस्थ गाँवों के दौरे पर थे, तब उनकी नजर सड़क किनारे महुआ बीनती एक छोटी बच्ची पर पड़ी। भीषण गर्मी में जहां बच्चे महुआ इकट्ठा करने में व्यस्त थे, कलेक्टर ने अपना काफिला रुकवाया और सीधे खेतों के बीच पेड़ के पास पहुंच गए। कलेक्टर ने बड़े ही आत्मीय भाव से बच्ची से बात की। बच्ची ने अपना नाम मड़कामी मंगली बताया। जब उससे स्कूल न जाने का कारण पूछा गया, तो मासूमियत और अभाव की कहानी सामने आई।

 

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों या जागरूकता के अभाव में शिक्षा की मुख्यधारा से न छूटे। महुआ बीनने वाले हाथ कलम थामेंगे, तभी सुकमा का असली विकास होगा। लगातार पालक-शिक्षक बैठक आयोजित किया जा रहा है। शिक्षक भी लगातार ड्राप आउट बच्चों के घर जाकर समझा रहे हैं।

 

चौपाल नहीं, सीधा घर तक पहुंची सरकार

प्रशासन का मानवीय चेहरा तब और प्रखर हुआ जब कलेक्टर मंगली से बात कर नहीं रुके, बल्कि उसके माता-पिता से मिलने सीधे उसके घर पहुंच गए।

 संवाद और संवेदनशीलता उन्होंने पालकों को समझाया कि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे उनके बच्चों का जीवन संवर सकता है।

 समस्या का समाधान उन्होंने पालक से पूछा कि बच्चे को स्कूल भेजने में कोई दिक्कत है क्या! 

 सकारात्मक परिणाम कलेक्टर की समझाइश और आत्मीयता का असर यह हुआ कि मंगली के माता-पिता उसे तुरंत स्कूल भेजने के लिए राजी हो गए।

 

मौके पर ही दिए दाखिले के निर्देश

कलेक्टर अमित कुमार ने केवल संवाद नहीं किया, बल्कि तत्काल समाधान भी सुनिश्चित किया। उन्होंने मौके पर मौजूद बीआरसी को निर्देश दिए कि मंगली के साथ-साथ वहां मौजूद एक अन्य बालक माड़वी देवा का भी नियमित स्कूल जाना सुनिश्चित किया जाए और उन्हें आवासीय विद्यालय में भर्ती किया जाए। इस अवसर पर जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर भी उपस्थित थे। प्रशासन के इस जमीनी और भावनात्मक प्रयास की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

बालोद में जंगली सुवर का हमला, दंपत्ति गंभीर घायल.. आत्मरक्षा में सुवर की मौत

बालोद। जिले के गुरूर वन परिक्षेत्र अंतर्गत भानपूरी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब खेत में काम कर रहे पति-पत्नी पर अचानक एक जंगली सुवर ने हमला कर दिया। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

मिली जानकारी के अनुसार दंपत्ति अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी जंगल की ओर से आए जंगली सुवर ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से घबराए दंपत्ति ने अपनी जान बचाने के लिए सुवर से संघर्ष किया और किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की। इसी दौरान हुए संघर्ष में जंगली सुवर की मौके पर ही मौत हो गई।

 

घटना के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल दंपत्ति को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरूर ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण दोनों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

 

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

BREAKING NEWS बालोद में प्रशासन का बुलडोजर एक्शन

आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ आज सुबह करीब 6 बजे से प्रशासन की टीम अलग-अलग टुकड़ों में कार्रवाई कर रही है। अभियान की जानकारी मिलते ही कई दुकानदार मौके पर पहुंचने लगे हैं, वहीं कुछ स्थानों पर कार्रवाई को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली है।

फिलहाल बालोद के गंजपारा से जेल क्षेत्र तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है। व्यापारियों के संभावित विरोध को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत का जलवा, न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर बना चैंपियन

टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल: भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब जीता

टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 255 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया।

भारत की ओर से संजू सैमसन ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 46 गेंदों में 89 रन बनाए, जबकि ईशान किशन ने तेज़ 54 रन की पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की दमदार पारियों की बदौलत टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के सामने बड़ा लक्ष्य रखा।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं पाई और 19 ओवर में 159 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह ने घातक गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट झटके, जबकि अक्षर पटेल ने 3 विकेट लेकर कीवी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

इस जीत के साथ ही भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा और फाइनल में भी टीम ने एकतरफा अंदाज में मुकाबला जीत लिया।

T 20 वर्ल्ड कप फाइनल: 124 रन पर न्यूजीलैंड के 6 विकेट गिरे, भारत की जीत करीब

आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड पर पूरी तरह दबाव बना लिया है। 256 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा कर रही न्यूजीलैंड की टीम 13 ओवर में 124 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी है।

 

भारतीय गेंदबाजों की सधी हुई गेंदबाजी के सामने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज टिक नहीं पा रहे हैं। टीम को शुरुआत से ही झटके लगे और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे, जिससे कीवी टीम बैकफुट पर आ गई है।

 

अब न्यूजीलैंड को जीत के लिए तेज गति से रन बनाने की जरूरत है, जबकि भारत को मैच जीतने के लिए सिर्फ चार विकेट और लेने हैं।

 

इससे पहले भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 255 रन बनाकर न्यूजीलैंड के सामने 256 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए फाइनल में मजबूत स्कोर खड़ा किया।

T20 World Cup 2026 IND vs NZ Final: भारत ने न्यूजीलैंड को दिया 256 रन का लक्ष्य, कीवी टीम दबाव में

T20 वर्ल्ड कप फाइनल: भारत ने न्यूजीलैंड को दिया 256 रन का लक्ष्य, कीवी टीम दबाव में

 

अहमदाबाद

आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में भारत और न्यूजीलैंड के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रोमांचक मुकाबला खेला जा रहा है। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड के सामने 256 रनों का विशाल लक्ष्य रखा है, जो टी-20 विश्व कप फाइनल के इतिहास के सबसे बड़े स्कोरों में से एक माना जा रहा है। 

 

भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। संजू सैमसन, ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर भारत ने 20 ओवर में लगभग 255 रन बनाए। 

लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। शुरुआती ओवरों में ही भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बना दिया और कीवी टीम के कई विकेट जल्दी गिर गए। करीब 8 ओवर के बाद न्यूजीलैंड का स्कोर लगभग 72 रन पर 4 विकेट था, जबकि टीम को जीत के लिए अभी लंबा लक्ष्य हासिल करना बाकी है। 

 

भारतीय गेंदबाज अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या ने शुरुआती सफलता दिलाकर टीम को मजबूत स्थिति में ला दिया है। न्यूजीलैंड की ओर से टिम साइफर्ट ने तेज अर्धशतक लगाकर टीम को संभालने की कोशिश की। 

 

फिलहाल मुकाबला रोमांचक मोड़ पर है 256 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही न्यूजीलैंड की टीम 10.5 ओवर में 102 रन पर 5 विकेट गंवा चुकी है।

 

नक्सल प्रभावित सुकमा से उभरी सफलता की नई किरण “अदिति राम” ने सीए फाउंडेशन प्रथम प्रयास में किया उत्तीर्ण

धर्मेंद्र सिंह

Chhattisgarh सुकमा/ वर्षों तक नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान से जूझते रहे सुकमा जिले से अब सफलता की प्रेरक कहानियां सामने आने लगी हैं। इसी कड़ी में सुकमा निवासी शिक्षक अगस्टीन राम की पुत्री कु. अदिति राम ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की प्रतिष्ठित सीए फाउंडेशन परीक्षा प्रथम प्रयास में उत्तीर्ण कर जिले का नाम रोशन किया है।

 

अदिति राम की इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अदिति ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और कड़ी मेहनत, अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के बल पर यह सफलता हासिल की।

 

अदिति के पिता अगस्टीन राम, जो स्वयं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, ने भावुक होकर कहा कि यह उनकी बेटी की मेहनत और लगन का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि अदिति आगे भी सीए की आगामी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर परिवार और सुकमा जिले का नाम देशभर में रोशन करेंगी।

 

गौरतलब है कि सुकमा जिला लंबे समय तक नक्सल हिंसा और शैक्षणिक पिछड़ेपन की पहचान से जूझता रहा है, लेकिन अब यहां के युवा शिक्षा के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। अदिति राम की यह सफलता इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल है।

 

अदिति की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि उनकी सफलता सुकमा के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।