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शनि. मई 16th, 2026

आस्था और विश्वास का महापर्व मकर संक्रांति का पर्व छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम में भी हर्षोल्लास से मनाया

गरियाबंद @ आस्था और विश्वास का महापर्व मकर संक्रांति का पर्व छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम में भी हर्षोल्लास से मनायागया, प्रातः 4 बजे से ही लोग त्रिवेणी संगम में पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाए, त्रिवेणी संगम में बालू से शिवलिंग का निर्माण कर शिव जी की पूजा अर्चना कर पवित्र संगम में दीप प्रज्वलित कर भगवान श्री राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे है।

माघ माह की प्रतिपदा तिथि में मंगलवार को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है, सूर्य जब धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इस संक्रांति को ही मकर संक्रांति कहते हैं, पंचांग व ज्योतिष शास्त्रत्त् के अनुसार 19 वर्ष बाद इस बार मकर संक्रांति पर जो अद्भुत संयोग बनने जा रहा है, माघ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा है, मकर संक्रांति पर सबसे पहले पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग बन रहा है, इसके बाद पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग है।

इस मंदिर में अगर निःसंतान महिला को बैगा अपने पैरो से महिलाओं पर चलते हुए आगे बढ़े तो महिला को होती है संतान की प्राप्ति :आइए जाने कहा पर है ऐसी मान्यता

धर्मेंद्र यादव धमतरी @ जिले के गंगरेल में स्थित माँ अंगारमोती मंदिर में अगर निसंतान महिला को बैगा अपने पैरो से महिलाओं पर चलते हुए आगे बढ़े तो महिला को संतान की प्राप्ति होती है हर साल दीवाली के बाद पहले शुक्रवार को इसी मन्नत के साथ दूर दराज से बड़ी संख्या में महिलाएं आती है.आज संतान के लिये आधुनिकतम टेस्ट ट्यूब और आईवीएफ तकनीक के दौर में.. ये अनूठी लेकिन सिद्ध मान्यता है जो हैरान करने वाली है.

छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अपने बांधो के लिये जाना जाता है. लेकिन जब गंगरेल बांध नहीं बना था. तो वहां बसे गांवो में शक्ति स्वरूपा मां अंगारमोती इस इलाके की अधिष्ठात्री देवी थी.. बांध बनने के बाद वो तमाम गांव डूब ने लगे थे. लेकिन माता के भक्तो ने अंगारमोती माता की गंगरेल के तट पर फिर से स्थापना कर दी.जहां साल भर भक्तों का ताता लग रहता है और और मन्नत को लेकर दर्शन करने आते हैं.लेकिन पूरे साल में एक दिन ऐसा है जो दीपावली पर्व के बाद का पहला शुक्रवार होता है जो सबसे खास होता है. इस दिन यहां भव्य मेला लगता है जहां हजारो पहुंचते है. आदिवासी परंपराओ के साथ पूजा और रीतियां निभाई जाती है साथ ही इस दिन बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी पहुंचती हैं जो निः संतान होते हैं कोई मां कहने वाला नहीं है.

ऐसी मान्यता है निःसंतान महिलाएं मंदिर के सामने हाथ में नारियल अगरबत्ती नींबू लिये कतार में खड़ी होती है.सभी निः संतान महिलाओं को इंतजार रहता है कि कब मुख्य बैगा पुजारी मंदिर के लिये पहुंचेंगे साथ ही दूसरी तरफ वो तमाम बैगा होते हैं जिन पर देवी मां सवार होती है चारो तरफ ढोल नगाड़ो की गूंज में वो झूमते हुए बेसुध मंदिर की तरफ बढ़ते चले आते हैं.बैगाओ को आते देख कतार में खड़ी सारी महिलाएं पेट के बल दंडवत लेट जाती है और सारे बैगा उनके उपर से गुजरते है.जी बता दें जिस भी महिला के उपर बैगा का पैर पड़ता है. उसे संतान के रूप में माता अंगार मोती का आशीर्वाद मिलता है.. उनकी गोद भी भर जाती है उनके आंगन में भी किलकारी गूंजती है. इस आशीर्वाद को पाने दूर दराज से निः संतान महिलाएं पहुंचती है।

राज्य स्थापना दिवस -2024 -रंगारंग कार्यक्रमों के साथ राज्य स्थापना दिवस का हुआ समापन,राज्य स्थापना से ही हुआ बस्तर में विकास के नये दौर की शुरुआत- सांसद श्री कश्यप

उत्कृष्ट कार्य निर्वहन करने वाले 22 कर्मचारी हुए पुरस्कृत,स्कूल शिक्षा विभाग के स्टॉल एवं शासकीय आदर्श विद्यालय को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मिला प्रथम स्थान छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद ही छत्तीसगढ़ का विकास और बस्तर का विकास हुआ है-सांसद श्री कश्यप

एनबीसी इंडिया 24 न्यूज दंतेवाड़ा @ ज़िला मुख्यालय के हृदय स्थल मेढ़का डोबरा में आयोजित राज्य स्थापना दिवस का समापन समारोह विगत रात्रि आयोजित किया गया था। इस मौके पर बस्तर लोक सभा क्षेत्र सांसद महेश कश्यप ने मुख्य अतिथि की आसंदी से उपस्थित जनों से संबोधित करते हुए कहा कि 01 नवंबर सन 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण के बाद ही बस्तर में विकास का नया दौर शुरू हुआ और इसमें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई का महत्वपूर्ण योगदान है तत्पश्चात पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में दन्तेवाड़ा जैसे क्षेत्र का अभूतपूर्व विकास किया गया। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र में पक्की सड़कें, बिजली , पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में नयी इबारत लिखी गई।

 

सांसद  महेश कश्यप ने आगे कहा कि आज अभिनव प्रयोगों के चलते दंतेवाड़ा आदर्श जिला बनने की दिशा में अग्रसर हो रहा है। जिले में शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रयोग हुए हैं उनकी सराहना प्रधानमंत्री ने भी की है। लड़कियों की शिक्षा की दिशा में जिले में उल्लेखनीय पहल भी हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में तैयारी कराने के लिए प्रशासन द्वारा दिशा, एजुकेशन हब, छूलो आसमान, जैसे संस्थाओं के माध्यम से आज स्थानीय विद्यार्थी सफलता की नयी शिखर को छू रहे हैं।

कुल मिलाकर जो शिक्षा के क्षेत्र में जो पहल की जा रही है उससे वो दिन दूर नहीं, जब जिले के अधिक से अधिक बच्चे आईएएस, आईपीएस जैसे बड़े पद प्राप्त कर पाएंगे। पूर्व वर्षो की स्थिति एवं वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे वह प्रधानमंत्री आवास योजना हो अथवा स्वच्छ भारत मिशन, या धान खरीदी या फिर महतारी वंदन योजना हर योजनाओं को प्राथमिकता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ लागू किया जा रहा है जिसके सुखद परिणाम देखने को मिल रहे है। इसी प्रकार श्री कश्यप ने जिले में जैविक कृषि कार्यो की भी प्रशंसा की।

इसके पूर्व अपने स्वागत प्रतिवेदन में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने भी राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज यहां विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाए गए है अतः आमजन विभागों द्वारा योजनाओं के संबंध में दी जा रही जानकारी लेवें और पात्र हितग्राही योजनाओं का लाभ ले सकते हैं इसके अलावा विभिन्न स्व सहायता समूह द्वारा निर्मित स्थानीय उत्पाद भी स्टॉलों में उपलब्ध है और आवश्यकतानुसार आम नागरिक उसे अवश्य खरीदें। इसके साथ ही मुख्य अतिथि द्वारा समस्त विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया गया।

नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयनित छात्र ओमजी चौधरी को दिया गया 50 हजार रुपये का चेक, उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारी हुए पुरस्कृत,सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आदर्श विद्यालय ने बाजी मारी।राज्य स्थापना दिवस पर जिले के निवासी छात्र ओमजी चौधरी के नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयन होने पर मुख्य अतिथि द्वारा 50 हजार रुपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र दिया गया। इसके अलावा विभिन्न विभागों में कार्यरत 22 अधिकारी, कर्मचारी उत्कृष्ट कार्य निर्वहन करने के लिए सम्मानित हुए।महिला बाल विकास विभाग द्वारा सक्षम योजना के तहत सरिता नाग, असली कश्यप, सुको तेलाम, रेखा भास्कर को योजना के तहत कुल राशि 5 लाख 60 हजार रुपये का चेक प्रदाय किया गया।

इस क्रम में समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग एवं वरिष्ठजनों को 46 विभिन्न प्रकार के उपकरण दिया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शासकीय आदर्श विद्यालय प्रथम, सेजेस दन्तेवाड़ा द्वितीय, तथा कन्या परिसर पातररास को तृतीय स्थान मिला। इसके अलावा स्टॉलों में प्रथम स्थान स्कूल शिक्षा विभाग, महिला बाल विकास विभाग को दूसरा, तथा आदिवासी विकास विभाग को तीसरा स्थान दिया गया।

सांकरा में सर्व यादव समाज ने धुमधाम से मनाया गोवर्धन पूजा

धर्मेंद्र यादव धमतरी/नगरी @ जिले के विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा के साहड़ा देव स्थल पर सर्व यादव समाज द्वारा पुरखों से चली आ रही परम्परा गोवर्धन पूजा धुमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में आमंत्रित सभी गांव के देवी देवता शामिल हुऐ साथ ही सर्व यादव समाज सांकरा द्वारा सर्व प्रथम स्थल पर सभी पदाधिकारियों सहित ग्रामवासीयों की उपस्थिति में साहड़ा देव की विधिवत पुजा अर्चना की गई।जिसके बाद सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में मौहाबहरा का शुभारंभ किया गया ।

इस कार्यक्रम के दौरान सर्व यादव समाज सांकरा द्वारा छोटे छोटे बच्चों को भगवान कृष्ण,बलराम की भव्य वेशभूषा धारण वस्त्र में गांधी चौक से साहड़ा देव स्थल तक यादव समाज बाजा गाजा के साथ नाचते और गाते हुए पहुंचे। गांव के देवी देवताओं द्वारा साहड़ा देव स्थल पहुंचकर गोवर्धन पूजा परम्परागत रूप से निर्वहन करते हुए सभी देवी देवताओं का पुजा अर्चना कर गोवर्धन पूजा संपन्न हुआ ।

इस अवसर पर भव्य कार्यक्रम स्थल पर यादव समाज सांकरा क्षेत्र के सभी पदाधिकारी सहित जनप्रतिनिधि भी पहुंचे हुए थे साथ ही साथ समस्त ग्रामवासी भी सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे,सभी उपस्थित जनसंगम में श्रद्धा और उत्साह भव्य रूप में देखने को नजर आया।

इस सिद्धपीठ से कोई श्रृद्धालु निराश नही लौटता,दूरदराज के लोगो का यहां लगता है तांता

धर्मेंद्र यादव @ धमतरी जिले के इलाकों मे देवी शक्तियो का हमेशा से ही वास रहा है पर गंगरेल तट पर विराजे वन की देवी अंरगारमोती माता की महिमा ही निराली है…इस सिद्धपीठ से कोई श्रृद्धालु निराश नही लौटता , यही वजह है कि हर नवरात्र मे आस्था की ज्योत जलाने इलाके के अलावा दूरदराज के लोगो का यहां तांता लग जाता है…धमतरी मे गगंरेल के पहाडो बीच मे विराजित मां अंगारमोती का यह भव्य दरबार बीते 6 सौ सालो के इतिहास को अपने अन्दर समेटे हुए है.

बताया जाता है 1972 में गंगरेल बांध बनाने के कारण आसपास के पूरे गांव डूब गए थे. उस वक्त माता गांव के बीहड़ में प्रकट होकर अलौकित कर दिया।इसके बाद भक्तो ने नदी के किनारे माता का दरबार बन दिया. मां विंध्यवासिनी और मनकेशरी की बहन माने जाने वाली मां अंगारमोती की कृपा सदियो से अपने भक्तो पर बरसते आ रही है ।आज भी गंगरेल स्थित अंगारमोती मंदिर में हर वर्ष दीवाली के बाद पहले शुक्रवार को मेला लगता है.

मान्यता है कि इस दिन निसंतान महिला अगर यहां पुजारी के पैरो से रौंदी जाए तो उसे संतान की प्राप्ति होती है.हर साल इस मेले में सैकड़ों निसंतान महिलाएं संतान सुख की कामना लेकर आती है.इस अनोखे मेले को देखने हजारों की संख्या में लोग भी पहुंचते हैं .पुरानी मान्यता के अनुसार निसंतान महिलाओं को मां अंगारमोती का आशीर्वाद मिल जाए.तो उसके आंगन में भी किलकारियां जरूर गूंजती है लेकिन इस आशीर्वाद के लिये उस प्रथा का पालन भी करना होता है।

इस परम्परा से हजारों महिलाओं की सुनी गोद मां ने भर दी है.पिछली बार करीब 300 महिलाएं आशीर्वाद मांगने लेटी हुई थी और इस बार संख्या करीब 500 होने की संभावना लगाई जा रहा है.बहरहाल नौ रूपों में पूजे जाने वाली मां का यह रूप उत्तर दिशा में दरबार लगाकर सदियों से इलाके की रक्षा करते आ रही है…. जहा हर दिन आस्था का सैलाब उमड़ रहा है लोग माता की भक्ति के रंग में सराबोर हो रहे है ।

यहां की प्रसिद्ध स्वयं भू माँ शीतला माई अपने भक्तो को देती है विशेष तरह का आशीर्वाद,मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

धर्मेंद्र यादव धमतरी @ शारदीय नवरात्र में शक्ति उपासना के महापर्व की शुरुआत हो चुकी है और पहले दिन से ही देवी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है।आस्था के बीच श्रद्धालुओं मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।वही धमतरी जिले के सिहावा के प्रसिद्ध स्वयं भू मां शीतला मंदिर में भक्तो की भीड़ उमड़ पड़ी है। वही शीतला पीठ पर नौ दिनों तक दुर्गा पाठ के साथ ही उल्लास और श्रद्धा के बीच नौ देवियों की पूजा होगी। बता दें शीतला शक्ति पीठ में इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में 2379 ज्योति है।इसमें घी के 217 व तेल के 2162 ज्योति जगमगा रहे है।

घट स्थापना के लिए ज्योति धारियो ने संकल्प भी लिया वही नवरात्रि में आदि शक्ति की उपासना से मनुष्य का जीवन कल्याण कारी हो जाता है।श्रद्धालु अपनी आस्था के दूर दराज से माता रानी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं बता दें छत्तीसगढ़ के साथ साथ उड़ीसा राज्य से भी भक्त माता के दर्शन और पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं और मां से अपने खुशहाल जीवन की कामना कर रहे हैं।

मां देती हैं विशेष तरह से आशीर्वाद

बता दें धमतरी जिले के सिहावा शीतला मंदिर की यह मान्यता है कि श्रद्धालु सच्चे मन से माता से अपनी मनोकामना मांगते हैं तो मां शीतला अपने ऊपर चढ़े चावल और फूल को गिराकर भक्तो को आशीर्वाद प्रदान करती है।

स्वर्ग धाम सेवा समिति द्वारा रुद्री के रुद्रेश्वर घाट में 656 लावारिस लाशो का सामूहिक तर्पण और पिंडदान

धमतरी @ जिले में स्वर्ग धाम सेवा समिति द्वारा 656 लावारिस क्लासों के अंतिम संस्कार 2004 से करते आ रही है,वही आज स्वर्ग धाम सेवा समिति द्वारा रुद्री स्थित रुद्रेश्वर घाट में 656 लावारिस लाशो का सामूहिक तर्पण और पिंडदान किया गया. स्वर्ग धाम सेवा समिति के अशोक पवार ने बताया कि यह कार्य 2004 से निरंतर अब तक लगातार जारी है जो आगे भी ऐसे ही जारी रहेगा।

यह कार्य को तब से शुरू किया गया जब से धमतरी के जिला अस्पताल के गेट में एक महिला के लाश पड़ी हुई देखी और आसपास के लोगों से पूछा गया तो पता चला कि इस लाश का कोई वारिश नहीं है और इसका अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है तब से स्वर्ग धाम सेवा समिति द्वारा इस कार्य को किया जा रहा है.

17 सितंबर को बचेली और किरंदुल के माइंस खनन एरिया में पर्यटन एवं परिवहन गतिविधियों पर रहेगा प्रतिबंध

दंतेवाड़ा @ जिला कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन०एम०डी०सी०) की बचेली परियोजना एवं किरंदुल परियोजना के माइंस एरिया के भीतर औसत से ज्यादा वर्षा दर्ज की गयी है। चूँकि खनन क्षेत्र के समीपवर्ती पहाड़ के ऊपर स्थित है, जहाँ माइंस(खनन क्षेत्र) से असमय एवं अनायास ही लौह युक्त जल का प्रवाह देखा गया हैं।

फलस्वरूप समीपवर्ती नगर पालिका बचेली, नगर पालिका किरंदुल एवं ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हुए है। साथ ही वर्तमान में भी भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, माइंस खनन क्षेत्र के जगह-जगह पर लैंड स्लाइड होना भी पाया गया है। इस तारतम्य में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर, प्रत्येक वर्ष एन०एम०डी०सी० द्वारा अपने माइंस खनन क्षेत्र को बाहरी आगंतुकों के लिए खोला जाता है जहा पर बाहरी वाहनों एवं पर्यटकों का भारी संख्या में आवागमन होता है।

अतः आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 34 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, आगामी दिनांक 17 सितंबर 2024 (विश्वकर्मा जयंती) को राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन०एम०डी०सी०) की बचेली परियोजना एवं किरंदुल परियोजना के माइंस बाउंड्री (खनन क्षेत्र) के भीतर लौह उत्खनन एवं अनुषांगिक गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य परिवहन, पर्यटन इत्यादि गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया हैं। यह आदेश तत्काल प्रभावशाली है।

मां दंतेश्वरी प्रांगण में लगाये गये “क्यूआर कोड”,मंदिर के धार्मिक वैभव और ऐतिहासिकता की मिल रही है जानकारी

दंतेवाड़ा @ बस्तर की आराध्या मां दंतेश्वरी परिसर दंतेवाड़ा में जिला प्रशासन के द्वारा ’’क्यूआर कोड’’ लगाये गये है इसके माध्यम से मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मंदिर की ऐतिहासिकता और धार्मिक महत्व के बारे में अधिक से अधिक जानकारी जुटा सकते है।

इसके तहत 6 स्कैनर लगाए गए है जिन्हें गूगल के माध्यम से स्कैन कर मंदिर के इतिहास, शक्तिपीठ का विवरण, अन्नम देव की भूमिका, देवी महिमा एवं भैरमों की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा नवरात्रि एवं वार्षिक मेले का भी विवरण दिया जा रहा है। जाहिर है इससे मंदिर में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के मंदिर की धार्मिकता तथा ऐतिहासिकता से आसानी से परिचित हो रहे है।

कुर्सी घाट का विशाल भादो जात्रा,भंगाराममाई देवी देवताओं को करती है दंडित,उड़ीसा बस्तर सहित सात पाली के पहुंचते है देवी देवता

धर्मेंद्र यादव धमतरी @ जिले में अनोखी तरह की परंपरा मनाई जाती है । परंपरानुसार इस जात्रा में सात पाली के देवी देवताए उड़ीसा बस्तर से भी पहुंचते हैं।हम बात कर रहे हैं धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक से बोरई क्षेत्र की जहां भव्य और अनोखी देवी जात्रा मनाई जाती है ।यह जात्रा भादो मास में मनाया जाता है इसलिए यह भादो जात्रा के नाम से प्रसिद्ध है।सैकड़ों साल से चली आ रही यह जात्रा भंगाराम देवी के नाम से स्थापित है।बता दें यह जाता कुंवर पाठ को अगुआई में संपन्न होता है।इस जात्रा में उड़ीसा बस्तर सहित सात पाली से देवी देवताओं का आगमन होता है।

भंगाराम देवी देती है देवी देवताओं को सजा

मान्यता है कि भंगाराम देवी को न्याय की देवी कहा जाता है और यह जात्रा स्थल भंगाराम देवी का न्यायालय है। इस स्थल पर भंगाराम देवी न्यायाधीश के रूप में विराजमान होती हैं जिसके बाद जात्रा में पहुंचे सात पाली के देवी देवताओं से बारी बारी बयान बाजी होता है।बयान बाजी के बाद जो भी देवी देवता दोषी पाए जाते हैं उनको देवी भंगाराम के द्वारा कारागार(पाताल) में डाल दिया जाता है।इस प्रकार से भंगाराम देवी जात्रा में पहुंचे सारे देवी देवताओं का न्याय और फैसला करती है।जिसके बाद सभी देवी देवताओं का सह सम्मान बिदाई किया जाता है।

नगरी से उड़ीसा जाने वाले मार्ग में है यह स्थान

भंगाराम देवी के स्थल की बात करें तो धमतरी जिले के अंतिम छोर ग्राम बोरई के क्षेत्र में यह स्थापित है।यह स्थान नगरी से उड़ीसा जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थापित है।यह जात्रा स्थल जिसे कुर्सी घाट के नाम से जाता है।

पूर्वज काल से चला आरा है देव अदालत

मान्यता अनुसार यह जात्रा पूर्वजों के काल से मनाया जा रहा है।पूर्वजों का कहना है यह जात्रा एक देव अदालत है जिसमे देवी देवताओं का परीक्षा लिया जाता है।सात पालियों से आए सभी देवियों में से जो भी देवी समस्या का निवारण नहीं कर पाते हैं तो उस देवी को भंगाराममाइ के द्वारा सजा दी जाती है।इस जात्रा में हजारों की संख्या में जन सैलाब लगा रहता है।सभी देवी अपनी प्रतिभा को निखारते हुए भंगाराममांई के द्वार पर नृत्य करते हैं।फूल मालों से सज कर ढोल बाजे के साथ देवी देवताएं मंदिर के चारों ओर भ्रमण करते हैं।मान्यता है भंगाराममाई सबकी मनोकामना पूरी करती है।

इस जात्रा में देवी प्रमुख प्रफुलचंद्र ठाकुर,पुजारी चेतराम मरकाम,जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी,राजेश समरथ,पुनाराम ,आसाराम,जगत राम,सरपंच जागेश्वर ध्रुव,सरपंच सोनराज.वटी,नंदकिशोर ध्रुव, पंच देव सिंह ध्रुव,घसु राम मरकाम,पत्रकार चैन सिंह गहने थाना प्रभारी चक्रधर बाघ,प्रधान आरक्षक याद कुमार सिरदार,योगेंद्र सिंह कंवर ,भुवनेश्वर जोलडे आदि मौजूद रहे।