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शनि. मई 16th, 2026

बिग ब्रेकिंग: बालोद में स्कूल वैन हादसा, एक बच्ची की मौत, कई घायल

जानकारी के अनुसार, आजाद पब्लिक स्कूल डौण्डी की वैन छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने मरारटोला जा रही थी। इसी दौरान मरारटोला नाला के पास पुल से वैन नीचे गिर गई। वैन में कुल 21 बच्चे सवार थे।

🚨 नशे में क्लीनर चला रहा था वैन

प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि वैन चालक की जगह क्लीनर वाहन चला रहा था, जो शराब के नशे में था। इस गंभीर लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

🏥 108 से पहुंचाया गया अस्पताल

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को 108 एंबुलेंस के माध्यम से डौण्डी उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

⚫ मृत बच्ची की पहचान

हादसे में जान गंवाने वाली बालिका की पहचान वेदांसी, पिता स्वर्गीय चिम्मन लाल साहू के रूप में हुई है। मासूम की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

👮 पुलिस जांच में जुटी

डौण्डी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक की भूमिका की भी जांच होगी।


यह हादसा एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

लाल आतंक का अंधेरा छंटा: गोगुंडा में पहली बार जला बल्ब, 78 साल बाद पहुँची बिजली

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की दुर्गम पहाड़ियों पर बसा गोगुंडा गांव आज ऐतिहासिक पल का गवाह बना। आजादी के 78 वर्ष बाद, करीब 650 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गांव में पहली बार बिजली का बल्ब जला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि चार दशकों से विकास से कटे इस क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण भी है।

अंधेरे का अंत: ढिबरी से बिजली तक

सूरज ढलते ही जो गांव कभी घने जंगलों और नक्सलियों के सन्नाटे में डूब जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई और घरों की रौनक लौट आई है। मिट्टी के तेल की ढिबरी और टॉर्च के सहारे जीवन बिताने वाले ग्रामीणों की आंखों में आज खुशी के आंसू हैं।

गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का ने भावुक होकर कहा,
“हमने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीते जी गांव में बिजली देख पाएंगे। आज लगता है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर है।”

सुरक्षा और विकास का संगम

यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे सुरक्षाबलों और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा।

  • सुरक्षा कवच: Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) की 74वीं बटालियन और पुलिस के सहयोग से क्षेत्र में कैंप स्थापित किया गया, जिससे नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना ध्वस्त हुआ।

  • दुर्गम राहें हुईं आसान: जहां पहले 5 घंटे पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता था, अब वहां विकास कार्यों की गाड़ियां पहुंच रही हैं।

  • प्रशासनिक पहल: कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से शुरू की गईं।

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना सामाजिक और आर्थिक बदलाव की शुरुआत है।
“हमारा लक्ष्य जिले के अंतिम छोर तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाना है। सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।”

वहीं 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे ने बताया कि कैंप स्थापना के बाद क्षेत्र में स्थायित्व आया है और यह रोशनी शांति और प्रगति का नया अध्याय लिखेगी।

एक नई सुबह की शुरुआत

गोगुंडा में जला यह पहला बल्ब केवल बिजली का प्रतीक नहीं, बल्कि दशकों के भय और अलगाव पर लोकतंत्र की जीत का संकेत है। बस्तर के बदलते स्वरूप की यह कहानी बताती है कि जब सुरक्षा और विकास साथ चलते हैं, तो सबसे दुर्गम पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।

अब गोगुंडा का अंधेरा स्थायी रूप से छंट चुका है—और वहां बस भविष्य की चमक बाकी है।

सुकमा के पोटाकेबिनों में गूंजेगी AI की गूंज: अब सुदूर वनांचल के बच्चे भी बनेंगे ‘टेक-स्मार्ट’

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्र सुकमा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा सुदूर क्षेत्रों के पोटाकेबिन (आवासीय विद्यालयों) में अध्ययनरत बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा शुरू की जा रही है।

इस महत्वाकांक्षी पहल को जमीन पर उतारने के लिए लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

शिक्षक बनेंगे माध्यम, बच्चे छुएंगे आसमान

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को AI के आधुनिक टूल्स और तकनीकों का प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को AI की मूलभूत जानकारी, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और डिजिटल नवाचार से परिचित कराएंगे।

शहरों से मुकाबले की तैयारी

इस पहल से सुदूर वनांचल के बच्चे भी तकनीक के क्षेत्र में शहरी छात्रों के समान अवसर प्राप्त कर सकेंगे। अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल प्रयोगशालाओं और तकनीकी प्रयोगों के माध्यम से सीखने का नया दौर शुरू होगा।

बेहतर भविष्य की नींव

AI की शिक्षा से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मक सोच में वृद्धि होगी। साथ ही भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

AI प्रशिक्षक वेनिक सेरो ने बताया कि उद्देश्य यह है कि सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी वही तकनीकी अवसर मिलें जो महानगरों के विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं।

पोटाकेबिनों में बदलेगी पढ़ाई की सूरत

अब पोटाकेबिन स्कूलों में डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया जाएगा। AI की मदद से कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाया जाएगा और छात्र नवाचार आधारित प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तकनीक की यह दस्तक शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक पहल मानी जा रही है, जो आने वाले समय में सुकमा के बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।

सुकमा में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई: नक्सलियों के गढ़ में ढहाया स्मारक, इलाके में तेज सर्चिंग अभियान

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा| छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिला में सुरक्षाबलों का एंटी-नक्सल अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में जवानों ने नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में निर्मित एक स्मारक को ध्वस्त कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई को नक्सलियों के मनोबल पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

चिंतागुफा क्षेत्र में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई थाना चिंतागुफा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कडतीपारा में की गई। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान नक्सलियों द्वारा निर्मित एक स्मारक मिला, जिसे वे अपने प्रचार-प्रसार और संगठन की मौजूदगी दिखाने के लिए आधार स्तंभ के रूप में उपयोग कर रहे थे।

CRPF की 2nd बटालियन का प्रहार

ऑपरेशन को Central Reserve Police Force (CRPF) की 2nd बटालियन के जवानों ने अंजाम दिया। कमांडेंट कमलेश कुमार के निर्देशन में टीम ने रणनीतिक तरीके से कार्रवाई करते हुए स्मारक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों द्वारा बनाए गए ऐसे स्मारक ग्रामीणों में दहशत फैलाने और अपने प्रभाव का प्रदर्शन करने का माध्यम होते हैं। इन्हें जमींदोज करना शासन-प्रशासन की पकड़ मजबूत करने और क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम कदम है।

क्षेत्र में सर्चिंग जारी

स्मारक ध्वस्त किए जाने के बाद आसपास के इलाकों में सर्चिंग और गश्त तेज कर दी गई है। सुरक्षाबलों की सक्रियता से नक्सली बैकफुट पर बताए जा रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य अंदरूनी इलाकों से नक्सली प्रभाव को समाप्त कर विकास कार्यों को गति देना है।

GOOD NEWS: सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट: प्रकृति की गोद में रोमांच और विकास का महाउत्सव

CHHATTISGARH बालोद। प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित ग्राम नारागांव (विकासखंड गुरूर) स्थित सियादेवी जलाशय इन दिनों उत्सव, उमंग और रोमांच से सराबोर है। तीन दिवसीय सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां प्रकृति, पर्यटन और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। हर ओर हरियाली, शांत जलराशि और रोमांचक गतिविधियों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

🚣 बैम्बू राफ्टिंग में दिखा जनप्रतिनिधियों का उत्साह

शुभारंभ अवसर पर विधायक संगीता सिन्हा, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष तोमन साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बैम्बू राफ्टिंग का आनंद लिया।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल तथा एडीशनल एसपी मोनिका ठाकुर सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने भी विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों में भाग लेकर पर्यटकों और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाया।

जलाशय की शांत लहरों पर बैम्बू राफ्टिंग का दृश्य आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।

🎯 एडवेंचर और उत्सव का शानदार संगम

फेस्ट में तीरंदाजी, एयर गन शूटिंग, वॉल क्लाइम्बिंग, टायर क्लाइम्बिंग, मोटर बाइक स्टंट, फ्लोटिंग बलून और हॉट एयर बलून जैसी गतिविधियों ने युवाओं और बच्चों को रोमांचित कर दिया।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने स्कूली बच्चों के साथ म्यूजिकल बॉल खेलकर कार्यक्रम में आत्मीयता का रंग घोला, जिससे आयोजन और भी जीवंत हो उठा।

🌄 पर्यटन हब बनने की ओर सियादेवी

अपने संबोधन में विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि सियादेवी जलाशय तेजी से एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के लिए पर्यटन कॉम्प्लेक्स निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
पूर्व राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग सदस्य यशवंत जैन ने आयोजन को जिले के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

🎶 संस्कृति और स्वाद का संगम

फेस्ट में स्व-सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय कलाकारों ने सुमधुर गीत-संगीत से माहौल को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम स्थल पर लगे स्टॉलों में ठेठरी, खुरमी जैसे पारंपरिक व्यंजन और ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी।

🌱 रोजगार और विकास के नए द्वार

सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट न केवल पर्यटन को नई पहचान दे रहा है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित कर रहा है।
प्रकृति की गोद में रोमांच, संस्कृति और स्वाद का यह संगम आने वाले समय में बालोद जिले की नई पहचान बन सकता है।

📍 सियादेवी अब सिर्फ जलाशय नहीं, बल्कि पर्यटन और विकास की नई उड़ान का प्रतीक बनता जा रहा है।

बड़ी खबर: बीजापुर में नक्सली नेटवर्क को एक और बड़ा झटका

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। उसूर थाना क्षेत्र के ताड़पाला हिल्स में सुरक्षा बलों ने सघन सर्च ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर, गन पावडर और माओवादी उपयोग का अन्य सामान बरामद किया है।

 

डिमाइनिंग कार्रवाई के दौरान 13 प्रेशर IED और एक डायरेक्शनल IED को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

 

इसके अलावा क्षेत्र में बनाए गए माओवादी स्मारक को भी ध्वस्त कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हुई है और ग्रामीणों के बीच विश्वास का संदेश गया है।

 

फिलहाल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा बल अलर्ट मोड पर हैं।

बीजापुर में भरोसे की पहल: कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान भी

बीजापुर। जिले के थाना मोदकपाल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंगुड़ में सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। CRPF की 62वीं वाहिनी और थाना मोदकपाल पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान के दौरान माओवादियों द्वारा बनाए गए 06 माओवादी स्मारकों को ध्वस्त कर दिया।

 

सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई को क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

कार्रवाई के बाद ग्राम पंगुड़ में चलित थाना भी लगाया गया, जहां ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और उनका निराकरण किया गया। साथ ही साइबर फ्रॉड और ओटीपी ठगी से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।

 

सुरक्षा बलों की इस पहल से ग्रामीणों में उत्साह और विश्वास का माहौल देखने को मिला है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि क्षेत्र में शांति और विकास को लेकर अभियान आगे भी जारी रहेगा।

बदलता सुकमा: जहाँ गूंजती थी बंदूकों की दहाड़, अब बल्ले से बरस रहे चौके-छक्के

लाल आतंक का छट रहा अंधेरा, जवानों ने बदली नागाराम की तस्वीर

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा कभी गोलियों की आवाज़ और बारूद की गंध से दहला रहने वाला बस्तर का सुदूर इलाका अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र नागाराम में सीआरपीएफ 74वीं वाहिनी द्वारा आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट ने यह संदेश दिया कि अब सुकमा हिंसा के साये से निकलकर विकास और शांति की नई पिच पर मजबूती से ‘बैटिंग’ कर रहा है।

यह वही सुकमा है, जहाँ कभी नक्सली घटनाओं के कारण शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था। बच्चे घरों में सिमट जाते थे, स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और युवाओं के सपने भय के साए में दब जाते थे। नक्सल हिंसा में शहीद हुए जवानों और निर्दोष ग्रामीणों की यादें आज भी लोगों के दिलों में ताज़ा हैं। ऐसे माहौल में नागाराम जैसे गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन अपने आप में ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।

शहीदों की स्मृति में सजा खेल का मैदान

सीआरपीएफ 74वीं वाहिनी के कमांडेंट हिमांशु पांडे के निर्देशन में यह आयोजन बुरकापाल के शहीदों की स्मृति में किया गया। मैच शुरू होने से पहले जवानों और ग्रामीणों ने 24 अप्रैल 2017 को बुरकापाल में शहीद हुए 25 वीर जवानों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह आयोजन इस बात का प्रतीक बना कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं गई। आज उसी बलिदान का परिणाम है कि अंदरूनी गांवों के युवा निडर होकर मैदान में उतर रहे हैं और खेल के माध्यम से नई पहचान गढ़ रहे हैं।

मैदान पर दिखा युवाओं का जोश

टूर्नामेंट में सुदूर वनांचल की चार टीमों ने हिस्सा लिया। खिलाड़ियों को सीआरपीएफ की ओर से खेल किट और जर्सी प्रदान की गई। फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा।

  • विजेता: चिंतलनार की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 हजार रुपये और ट्रॉफी अपने नाम की।

  • उपविजेता: केरलपेंदा की टीम दूसरे स्थान पर रही, जिन्हें 5 हजार रुपये और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।

  • बेस्ट बैट्समैन और बेस्ट बॉलर को भी विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए।

मैदान में युवाओं का जोश और दर्शकों की तालियों की गूंज ने माहौल को उत्सव में बदल दिया।

 स्थानीय युवा खिलाड़ी, नागाराम

“पहले इन रास्तों पर चलने में डर लगता था, लेकिन आज हम यहां खुलकर खेल रहे हैं। क्रिकेट ने हमें नई पहचान दी है और सपने देखने का हौसला भी।”

भय से भरोसे तक का सफर

कभी शाम ढलते ही सन्नाटे में डूब जाने वाले नागाराम और आसपास के गांवों में अब खेल के जरिये सुरक्षाबलों और ग्रामीणों के बीच भरोसे का पुल मजबूत हो रहा है। युवाओं के हाथों में बंदूक की जगह क्रिकेट का बल्ला थमाना, बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में बड़ा संकेत है।

हिमांशु पांडे, कमांडेंट, सीआरपीएफ 74वीं वाहिनी

कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा, “अब सुकमा और बस्तर बदल रहे हैं। गांवों में शांति का माहौल है और युवा विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारा प्रयास है कि खेल और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जाए।”

सुकमा के जंगलों में अब सिर्फ सुरक्षा अभियान ही नहीं, बल्कि उम्मीदों की नई सुबह भी नजर आने लगी है। क्रिकेट की ‘ठक-ठक’ ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव संभव है—जब सुरक्षा, विश्वास और विकास साथ चलें।

आज शराब दुकान खोलने के विरोध में कांग्रेसियों का प्रदर्शन

बालोद। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शराब दुकान खोले जाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। बालोद नगर के गंजपारा स्थित शराब दुकान के बाहर कांग्रेसियों द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गांधी जी की पुण्यतिथि जैसे पावन दिन पर शराब दुकान खोला जाना भावनाओं के खिलाफ है। इसी को लेकर वे दुकान बंद कराने की मांग कर रहे हैं।

 

सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात है।

 

CG: मां की गोद से दूधमुंही बच्ची उठा ले गया बंदर, कुएं में फेंका, डायपर बना लाइफ जैकेट

मां की गोद से 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को उठा ले गया बंदर, कुएं में फेंका
डायपर बना लाइफ जैकेट, कथा सुनने आई नर्स ने सीपीआर देकर बचाई नन्ही जान

जांजगीर-चांपा दुर्गेश यादव । छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के नैला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिवनी में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बंदर मां की गोद से महज 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को छीनकर पास के कुएं में फेंक गया। यह घटना पूरे गांव में दहशत और सनसनी का कारण बन गई।

हालांकि, किस्मत और इंसानी सूझबूझ ने इस बार एक मासूम की जान बचा ली। बच्ची ने डायपर पहन रखा था, जो पानी में उसके लिए लाइफ जैकेट साबित हुआ। ग्रामीणों की तत्परता और मौके पर मौजूद एक नर्स की त्वरित कार्रवाई से बच्ची को नया जीवन मिल गया।

मां की गोद से छीन ले गया बंदर
जानकारी के अनुसार ग्राम सिवनी निवासी अरविंद राठौर की पत्नी अपनी 20 दिन की बेटी को गोद में लेकर खाना खिला रही थीं। तभी अचानक एक बंदर वहां आया और बच्ची को झपटकर लेकर भाग गया। मां की चीख-पुकार सुनते ही परिजन और ग्रामीण बंदर के पीछे दौड़े।

करीब 10 से 15 मिनट तक बंदर बच्ची को लेकर इधर-उधर भागता रहा। इसके बाद बच्ची नजरों से ओझल हो गई, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई।

कुएं में तैरती मिली बच्ची
खोजबीन के दौरान ग्रामीणों की नजर पास स्थित एक कुएं पर पड़ी, जहां बच्ची पानी में तैरती हुई दिखाई दी। बताया जा रहा है कि बच्ची करीब 10 मिनट तक कुएं के पानी में रही और उसने कुछ पानी भी पी लिया था, लेकिन डायपर की वजह से वह पूरी तरह पानी में नहीं डूबी।

बाल्टी से निकाला बाहर, नर्स बनी देवदूत
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने बाल्टी की मदद से बच्ची को कुएं से बाहर निकाला। उसी समय गांव में कथा सुनने आई नर्स राजेश्वरी राठौर मौके पर मौजूद थीं। उन्होंने बिना समय गंवाए तुरंत बच्ची को सीपीआर देना शुरू किया। कुछ ही क्षणों में बच्ची की सांसें लौट आईं। यह दृश्य देख परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

अस्पताल में हालत स्थिर
प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और उसे किसी गंभीर चोट का खतरा नहीं है।

पिता बोले — यह एक चेतावनी है
बच्ची के पिता अरविंद राठौर ने बताया कि वे मड़वा पावर प्लांट में कार्यरत हैं और घटना के समय ड्यूटी पर थे। उन्होंने कहा,
“गांव में बंदर अक्सर दिखाई देते हैं, लेकिन ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। अगर गांव वालों और नर्स की मदद नहीं मिलती, तो कुछ भी हो सकता था। हम भगवान और सभी मददगार लोगों के आभारी हैं।”

उन्होंने सभी से अपील की कि छोटे बच्चों को कभी अकेला या असुरक्षित न छोड़ें।

चमत्कार भी, चेतावनी भी
यह घटना जहां एक ओर चमत्कारिक बचाव की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी भी देती है।