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शनि. मई 16th, 2026

बालोद को खेल अधोसंरचना की बड़ी सौगात: 1300 लाख की परियोजनाएं स्वीकृत, बनेंगे स्टेडियम व इंडोर हॉल

बालोद। खेल प्रतिभाओं से समृद्ध बालोद जिले के लिए गर्व का क्षण है। विधानसभा के हालिया बजट सत्र में जिले को खेल अधोसंरचना के लिए कुल 1300 लाख रुपये (13 करोड़ रुपये) की बड़ी सौगात मिली है। इस स्वीकृति से जिले में आधुनिक खेल सुविधाओं का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

क्या-क्या होगा निर्माण?

दल्लीराजहरा में इंडोर मल्टीपरपज हॉल निर्माण हेतु 500 लाख रुपये स्वीकृत

वर्ष 2026-27 के लिए 200 लाख रुपये का प्रावधान

 

जिला स्तरीय बहुउद्देश्यीय स्टेडियम निर्माण हेतु 800 लाख रुपये स्वीकृत

वर्ष 2026-27 के लिए 200 लाख रुपये का प्रावधान

इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन सहित विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए आधुनिक मंच मिलेगा।

जनप्रतिनिधियों के प्रयास रंग लाए

जिले में खेल सुविधाओं की मांग को लेकर भाजपा नेता राकेश यादव तथा छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं भाजपा जिला महामंत्री सौरभ लूनिया लगातार प्रयासरत थे।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, खेल मंत्री अरुण साव तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी से मुलाकात और पत्राचार कर जिले की खेल आवश्यकताओं को प्रमुखता से रखा।

 

लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि बजट सत्र में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति मिली, जिसे जिले की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

 

खिलाड़ियों के सपनों को मिलेंगे पंख

नई खेल अधोसंरचना तैयार होने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के खिलाड़ियों को जिला स्तर पर ही बेहतर प्रशिक्षण सुविधा मिलेगी। इससे:

 

प्रतिभाओं को बाहर बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा

स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव होगा

युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और करियर के अवसर बढ़ेंगे

 

स्वीकृति मिलने पर सौरभ लूनिया ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, खेल मंत्री, वित्त मंत्री, भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन एवं जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और बालोद को मिली यह सौगात आने वाले वर्षों में ऐतिहासिक साबित होगी।

 

निश्चित ही, यह फैसला बालोद को खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। 🏆

दल्लीराजहरा: 1955 से आज तक खनन का सफर, भिलाई इस्पात संयंत्र की धड़कन बनी लौह अयस्क खदानों का इतिहास

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित दल्लीराजहरा की लौह अयस्क खदानों ने न केवल औद्योगिक विकास की इबारत लिखी, बल्कि श्रमिक आंदोलनों और सामाजिक परिवर्तन की भी मिसाल कायम की। वर्ष 1955 में खनन कार्य की शुरुआत के साथ यह क्षेत्र देश के औद्योगिक मानचित्र पर उभरा और आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है।

1955: औद्योगिक युग की शुरुआत
सन् 1955 में जब भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की स्थापना हुई, तब उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए दल्लीराजहरा की खदानों का विकास किया गया। 1959 में भिलाई इस्पात संयंत्र में उत्पादन शुरू हुआ और दल्लीराजहरा उसकी जीवनरेखा बन गया।

1960–1980: श्रमिक संघर्ष और सामाजिक जागरण
इन दशकों में खदानों में हजारों मजदूर कार्यरत रहे। बेहतर वेतन, सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर बड़े श्रमिक आंदोलन हुए। इस दौर में शंकर गुहा नियोगी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मजदूर आंदोलन ने नई दिशा पाई। दल्लीराजहरा देशभर में श्रमिक एकता और संघर्ष का प्रतीक बना।

1990–2000: तकनीकी आधुनिकीकरण
समय के साथ खनन प्रक्रिया में आधुनिक मशीनों और नई तकनीकों का उपयोग बढ़ा। जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई ।

2000 के बाद: नए विकल्प और बदलाव
छत्तीसगढ़ राज्य गठन (2000) के बाद औद्योगिक नीतियों में बदलाव आए। धीरे-धीरे भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति के नए स्रोत विकसित किए गए, जिससे दल्लीराजहरा की निर्भरता कम हुई। इसके बावजूद यह क्षेत्र ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है।

वर्तमान स्थिति
आज दल्लीराजहरा की खदानें सीमित उत्पादन के साथ संचालित हैं। क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार, पर्यटन और ऐतिहासिक पहचान को संजोने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ खदान नहीं, बल्कि संघर्ष, विकास और पहचान का प्रतीक है।

✍️ निष्कर्ष
1955 से शुरू हुआ दल्लीराजहरा माइंस का सफर केवल खनन तक सीमित नहीं रहा। यह औद्योगिक प्रगति, श्रमिक अधिकारों की लड़ाई और सामाजिक परिवर्तन की कहानी भी है। बदलते समय के साथ चुनौतियाँ जरूर आईं, लेकिन दल्लीराजहरा आज भी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बना हुआ है।

बिग ब्रेकिंग: बालोद में स्कूल वैन हादसा, एक बच्ची की मौत, कई घायल

जानकारी के अनुसार, आजाद पब्लिक स्कूल डौण्डी की वैन छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने मरारटोला जा रही थी। इसी दौरान मरारटोला नाला के पास पुल से वैन नीचे गिर गई। वैन में कुल 21 बच्चे सवार थे।

🚨 नशे में क्लीनर चला रहा था वैन

प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि वैन चालक की जगह क्लीनर वाहन चला रहा था, जो शराब के नशे में था। इस गंभीर लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

🏥 108 से पहुंचाया गया अस्पताल

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को 108 एंबुलेंस के माध्यम से डौण्डी उप स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

⚫ मृत बच्ची की पहचान

हादसे में जान गंवाने वाली बालिका की पहचान वेदांसी, पिता स्वर्गीय चिम्मन लाल साहू के रूप में हुई है। मासूम की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

👮 पुलिस जांच में जुटी

डौण्डी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। स्कूल प्रबंधन और वाहन चालक की भूमिका की भी जांच होगी।


यह हादसा एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

लाल आतंक का अंधेरा छंटा: गोगुंडा में पहली बार जला बल्ब, 78 साल बाद पहुँची बिजली

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की दुर्गम पहाड़ियों पर बसा गोगुंडा गांव आज ऐतिहासिक पल का गवाह बना। आजादी के 78 वर्ष बाद, करीब 650 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस गांव में पहली बार बिजली का बल्ब जला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि चार दशकों से विकास से कटे इस क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण भी है।

अंधेरे का अंत: ढिबरी से बिजली तक

सूरज ढलते ही जो गांव कभी घने जंगलों और नक्सलियों के सन्नाटे में डूब जाता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई और घरों की रौनक लौट आई है। मिट्टी के तेल की ढिबरी और टॉर्च के सहारे जीवन बिताने वाले ग्रामीणों की आंखों में आज खुशी के आंसू हैं।

गांव के बुजुर्ग माड़वी सुक्का ने भावुक होकर कहा,
“हमने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीते जी गांव में बिजली देख पाएंगे। आज लगता है कि हमारा गांव भी देश के नक्शे पर है।”

सुरक्षा और विकास का संगम

यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे सुरक्षाबलों और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा।

  • सुरक्षा कवच: Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) की 74वीं बटालियन और पुलिस के सहयोग से क्षेत्र में कैंप स्थापित किया गया, जिससे नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना ध्वस्त हुआ।

  • दुर्गम राहें हुईं आसान: जहां पहले 5 घंटे पैदल पहाड़ चढ़ना पड़ता था, अब वहां विकास कार्यों की गाड़ियां पहुंच रही हैं।

  • प्रशासनिक पहल: कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्कूल, आंगनबाड़ी और राशन दुकान जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से शुरू की गईं।

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि गोगुंडा में बिजली पहुंचना सामाजिक और आर्थिक बदलाव की शुरुआत है।
“हमारा लक्ष्य जिले के अंतिम छोर तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंचाना है। सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।”

वहीं 74वीं बटालियन के कमांडेंट हिमांशु पांडे ने बताया कि कैंप स्थापना के बाद क्षेत्र में स्थायित्व आया है और यह रोशनी शांति और प्रगति का नया अध्याय लिखेगी।

एक नई सुबह की शुरुआत

गोगुंडा में जला यह पहला बल्ब केवल बिजली का प्रतीक नहीं, बल्कि दशकों के भय और अलगाव पर लोकतंत्र की जीत का संकेत है। बस्तर के बदलते स्वरूप की यह कहानी बताती है कि जब सुरक्षा और विकास साथ चलते हैं, तो सबसे दुर्गम पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।

अब गोगुंडा का अंधेरा स्थायी रूप से छंट चुका है—और वहां बस भविष्य की चमक बाकी है।

आकांक्षा’ के तहत 35 युवा चेन्नई रवाना

सुकमा | धर्मेन्द्र सिंह।

नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक सकारात्मक और प्रेरक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व और कलेक्टर Amit Kumar के मार्गदर्शन में संचालित ‘आकांक्षा – सशक्त युवा, सशक्त सुकमा’ परियोजना के तहत जिले के 35 युवा (16 युवतियां एवं 19 युवक) प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार हेतु चेन्नई के लिए रवाना हुए।

 

लाइवलीहुड कॉलेज परिसर से हरी झंडी दिखाकर युवाओं के दल को विदा किया गया। इस अवसर पर परिसर में उत्साह, आत्मविश्वास और नए सपनों की चमक साफ नजर आई।

 

एमओयू से खुला वैश्विक अवसरों का द्वार

 

जिला प्रशासन ने निजी क्षेत्र में ठोस रोजगार अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्राइव मैनेजमेंट सर्विसेज, चेन्नई के साथ विशेष एमओयू किया है। इस साझेदारी के माध्यम से सुदूर वनांचल के युवाओं को अब राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की कंपनियों में कार्य करने का अवसर मिल रहा है।

 

यह पहल उन युवाओं के लिए नई राह खोल रही है, जो अब तक संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे रह जाते थे।

 

मुख्य बिंदु – एक नजर में

 

महिला सशक्तिकरण: चयनित 35 युवाओं में 16 युवतियों की भागीदारी, आत्मनिर्भर नारी की दिशा में मजबूत कदम।

 

आर्थिक सशक्तिकरण: जिले से बाहर पहली बार रोजगार का अवसर, जिससे स्थायी आय और आत्मसम्मान दोनों मिलेंगे।

 

प्रशासनिक दूरदर्शिता: कलेक्टर अमित कुमार ने इसे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव बताया।

 

कलेक्टर ने सभी चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल नौकरी दिलाने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास को नई उड़ान देने की पहल है। हमारा लक्ष्य है कि जिले का हर युवा हुनरमंद बने और उसे आजीविका के लिए श्रेष्ठ मंच मिले।

 

युवाओं की जुबानी – उम्मीद और गर्व

दूरस्थ अंचलों से आए युवाओं में इस अवसर को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।

 

सोड़ी बसंती (ग्राम आसिरगुड़ा, कोंटा) ने कहा, “मैं पहली बार घर से दूर जा रही हूं। अब मुझे रोजगार मिल गया है और मैं अपने परिवार की आर्थिक मदद कर पाऊंगी। यह मेरे जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण है।”

 

सोनिया नुप्पो (बोरगुड़ा) ने बताया, “जिला प्रशासन की यह पहल बहुत सराहनीय है। हम मुख्यमंत्री और पूरे प्रशासन के आभारी हैं, जिन्होंने हमारे भविष्य के बारे में सोचा।”

 

भविष्य की दिशा

 

सुकमा जिला प्रशासन आने वाले समय में रोजगार मेलों, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ नई साझेदारियों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला सुकमा अब “सशक्त, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरे जिले” की नई पहचान गढ़ रहा है।

 

इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर, लाइवलीहुड कॉलेज के प्रभारी अधिकारी कैलाश कश्यप एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

दोरनापाल की गलियों में जब खुद उतरा ‘प्रशासन’

खिल उठे बच्चों के चेहरे, जगी विकास की नई उम्मीद

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। दोरनापाल। आमतौर पर रविवार विश्राम का दिन माना जाता है, लेकिन सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के लिए यह दिन भी जनसेवा को समर्पित रहा। अवकाश के दिन उन्होंने दोरनापाल का मैदानी दौरा कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब प्रशासन फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरता है, तो विकास की रफ्तार स्वतः तेज हो जाती है।


अस्पताल में सख्ती भी, संवेदनशीलता भी

दोरनापाल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोरनापाल के औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर का व्यक्तित्व एक सख्त प्रशासक और जिम्मेदार अभिभावक—दोनों रूपों में नजर आया।

उन्होंने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, बिजली-पानी और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। भीषण गर्मी को देखते हुए मरीजों के लिए कूलर की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा लंबित जननी सुरक्षा योजना (JSY) भुगतान में तेजी लाने को कहा।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इलाज के लिए आए किसी भी जरूरतमंद को असुविधा न हो। साथ ही शत-प्रतिशत टीकाकरण और सुरक्षित संस्थागत प्रसव पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “स्वस्थ भविष्य की नींव आज की सजगता से ही रखी जाती है।”


आंगनबाड़ी में दिखी आत्मीयता

दौरे का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब कलेक्टर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे। यहां उन्होंने औपचारिकता से हटकर बच्चे ‘प्रियल’ का वजन स्वयं जांचा। बच्चों के बीच बैठकर उनसे बातचीत की और चॉकलेट बांटकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।

‘तिरंगा भोजन’ और ‘सुपोषण चौपाल’ की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले का कोई भी बच्चा कुपोषण का शिकार न हो, यह प्रशासन की प्राथमिकता है। जर्जर आंगनबाड़ी भवनों के जीर्णोद्धार के निर्देश देते हुए बच्चों की सुरक्षा और पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।


पीडीएस गोदाम और राजस्व व्यवस्था पर पैनी नजर

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) गोदाम में चावल की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की। स्टैक की गई बोरियों का सैंपल चेक कर शत-प्रतिशत भंडारण और ई-केवाईसी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण राशन मिल सके।

राजस्व विभाग के निरीक्षण में नए तहसील कार्यालय के लिए उपयुक्त स्थान चयन की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा गया।


सजग और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

गोदामों में अनाज की गुणवत्ता से लेकर अस्पताल की सुविधाओं और बच्चों के पोषण तक—हर स्तर पर की गई यह पहल जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर प्रस्तुत करती है। दोरनापाल की गलियों में प्रशासन की यह मौजूदगी न सिर्फ व्यवस्था की सख्ती दिखाती है, बल्कि विकास की नई उम्मीद भी जगाती है।


निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी

दौरे के दौरान तहसीलदार योपेन्द्र पात्रे, सीएमएचओ डॉ. आर.के. सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सुकमा के पोटाकेबिनों में गूंजेगी AI की गूंज: अब सुदूर वनांचल के बच्चे भी बनेंगे ‘टेक-स्मार्ट’

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्र सुकमा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा सुदूर क्षेत्रों के पोटाकेबिन (आवासीय विद्यालयों) में अध्ययनरत बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा शुरू की जा रही है।

इस महत्वाकांक्षी पहल को जमीन पर उतारने के लिए लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

शिक्षक बनेंगे माध्यम, बच्चे छुएंगे आसमान

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को AI के आधुनिक टूल्स और तकनीकों का प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को AI की मूलभूत जानकारी, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और डिजिटल नवाचार से परिचित कराएंगे।

शहरों से मुकाबले की तैयारी

इस पहल से सुदूर वनांचल के बच्चे भी तकनीक के क्षेत्र में शहरी छात्रों के समान अवसर प्राप्त कर सकेंगे। अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल प्रयोगशालाओं और तकनीकी प्रयोगों के माध्यम से सीखने का नया दौर शुरू होगा।

बेहतर भविष्य की नींव

AI की शिक्षा से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मक सोच में वृद्धि होगी। साथ ही भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

AI प्रशिक्षक वेनिक सेरो ने बताया कि उद्देश्य यह है कि सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी वही तकनीकी अवसर मिलें जो महानगरों के विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं।

पोटाकेबिनों में बदलेगी पढ़ाई की सूरत

अब पोटाकेबिन स्कूलों में डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया जाएगा। AI की मदद से कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाया जाएगा और छात्र नवाचार आधारित प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तकनीक की यह दस्तक शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक पहल मानी जा रही है, जो आने वाले समय में सुकमा के बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।

सुकमा में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई: नक्सलियों के गढ़ में ढहाया स्मारक, इलाके में तेज सर्चिंग अभियान

धर्मेन्द्र सिंह सुकमा| छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिला में सुरक्षाबलों का एंटी-नक्सल अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में जवानों ने नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में निर्मित एक स्मारक को ध्वस्त कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई को नक्सलियों के मनोबल पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

चिंतागुफा क्षेत्र में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई थाना चिंतागुफा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कडतीपारा में की गई। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान नक्सलियों द्वारा निर्मित एक स्मारक मिला, जिसे वे अपने प्रचार-प्रसार और संगठन की मौजूदगी दिखाने के लिए आधार स्तंभ के रूप में उपयोग कर रहे थे।

CRPF की 2nd बटालियन का प्रहार

ऑपरेशन को Central Reserve Police Force (CRPF) की 2nd बटालियन के जवानों ने अंजाम दिया। कमांडेंट कमलेश कुमार के निर्देशन में टीम ने रणनीतिक तरीके से कार्रवाई करते हुए स्मारक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों द्वारा बनाए गए ऐसे स्मारक ग्रामीणों में दहशत फैलाने और अपने प्रभाव का प्रदर्शन करने का माध्यम होते हैं। इन्हें जमींदोज करना शासन-प्रशासन की पकड़ मजबूत करने और क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम कदम है।

क्षेत्र में सर्चिंग जारी

स्मारक ध्वस्त किए जाने के बाद आसपास के इलाकों में सर्चिंग और गश्त तेज कर दी गई है। सुरक्षाबलों की सक्रियता से नक्सली बैकफुट पर बताए जा रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य अंदरूनी इलाकों से नक्सली प्रभाव को समाप्त कर विकास कार्यों को गति देना है।

GOOD NEWS: सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट: प्रकृति की गोद में रोमांच और विकास का महाउत्सव

CHHATTISGARH बालोद। प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित ग्राम नारागांव (विकासखंड गुरूर) स्थित सियादेवी जलाशय इन दिनों उत्सव, उमंग और रोमांच से सराबोर है। तीन दिवसीय सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां प्रकृति, पर्यटन और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। हर ओर हरियाली, शांत जलराशि और रोमांचक गतिविधियों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

🚣 बैम्बू राफ्टिंग में दिखा जनप्रतिनिधियों का उत्साह

शुभारंभ अवसर पर विधायक संगीता सिन्हा, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, उपाध्यक्ष तोमन साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बैम्बू राफ्टिंग का आनंद लिया।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल तथा एडीशनल एसपी मोनिका ठाकुर सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने भी विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों में भाग लेकर पर्यटकों और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाया।

जलाशय की शांत लहरों पर बैम्बू राफ्टिंग का दृश्य आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।

🎯 एडवेंचर और उत्सव का शानदार संगम

फेस्ट में तीरंदाजी, एयर गन शूटिंग, वॉल क्लाइम्बिंग, टायर क्लाइम्बिंग, मोटर बाइक स्टंट, फ्लोटिंग बलून और हॉट एयर बलून जैसी गतिविधियों ने युवाओं और बच्चों को रोमांचित कर दिया।
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने स्कूली बच्चों के साथ म्यूजिकल बॉल खेलकर कार्यक्रम में आत्मीयता का रंग घोला, जिससे आयोजन और भी जीवंत हो उठा।

🌄 पर्यटन हब बनने की ओर सियादेवी

अपने संबोधन में विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि सियादेवी जलाशय तेजी से एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के लिए पर्यटन कॉम्प्लेक्स निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
पूर्व राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग सदस्य यशवंत जैन ने आयोजन को जिले के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

🎶 संस्कृति और स्वाद का संगम

फेस्ट में स्व-सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय कलाकारों ने सुमधुर गीत-संगीत से माहौल को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम स्थल पर लगे स्टॉलों में ठेठरी, खुरमी जैसे पारंपरिक व्यंजन और ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी।

🌱 रोजगार और विकास के नए द्वार

सियादेवी इको टूरिज्म फेस्ट न केवल पर्यटन को नई पहचान दे रहा है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित कर रहा है।
प्रकृति की गोद में रोमांच, संस्कृति और स्वाद का यह संगम आने वाले समय में बालोद जिले की नई पहचान बन सकता है।

📍 सियादेवी अब सिर्फ जलाशय नहीं, बल्कि पर्यटन और विकास की नई उड़ान का प्रतीक बनता जा रहा है।

बड़ी खबर: बीजापुर में नक्सली नेटवर्क को एक और बड़ा झटका

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। उसूर थाना क्षेत्र के ताड़पाला हिल्स में सुरक्षा बलों ने सघन सर्च ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर, गन पावडर और माओवादी उपयोग का अन्य सामान बरामद किया है।

 

डिमाइनिंग कार्रवाई के दौरान 13 प्रेशर IED और एक डायरेक्शनल IED को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

 

इसके अलावा क्षेत्र में बनाए गए माओवादी स्मारक को भी ध्वस्त कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हुई है और ग्रामीणों के बीच विश्वास का संदेश गया है।

 

फिलहाल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा बल अलर्ट मोड पर हैं।