न्यूज़ डेस्क बालोद।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला से सामने आई यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। डौंडी क्षेत्र के 17 साल के छात्र राजवीर बघेल ने 10वीं की परीक्षा में असफल होने के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। जिस उम्र में सपने बनने चाहिए, उस उम्र में एक बच्चा इतना टूट गया कि उसे जिंदगी ही बोझ लगने लगी।
बताया जा रहा है कि राजवीर कुछ दिन पहले अपनी मौसी के घर जगन्नाथपुर सांकरा गांव शादी में गया हुआ था। 29 अप्रैल को जब 10वीं-12वीं का रिजल्ट आया, तो उसने मोबाइल पर अपना परिणाम देखा। उसी पल से उसके व्यवहार में बदलाव आ गया। वह चुप रहने लगा, उदास रहने लगा, लेकिन शायद किसी ने उस चुप्पी के पीछे छिपे तूफान को नहीं समझा।
अगले दिन वह अपने भाई के साथ घर लौट आया, लेकिन मन का बोझ उसके साथ ही आया। सुबह जब काफी देर तक उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो परिजनों ने खिड़की से देखा… और जो सामने था, उसने सब कुछ खत्म कर दिया। राजवीर फांसी के फंदे पर झूल चुका था। एक पल में पूरे परिवार की दुनिया उजड़ गई।
घर वालों के अनुसार, राजवीर पिछले साल भी 10वीं में असफल हुआ था और इस बार भी वह पास नहीं हो पाया। उसकी कॉपी से एक नोट भी मिला, जिसमें उसने अपने परिवार के लिए प्यार तो जताया, लेकिन साथ ही यह दर्द भी लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। यही सोच उसके लिए इतनी भारी हो गई कि उसने जिंदगी से ही हार मान ली।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है…
- क्या सच में परीक्षा में फेल होना इतना बड़ा अपराध है?
- क्या नंबर ही किसी की जिंदगी की कीमत तय करते हैं?
आज भी हमारे समाज में अंक और रिजल्ट को इतना बड़ा बना दिया गया है कि बच्चे असफलता को सहन ही नहीं कर पाते।
सच्चाई यह है कि एक परीक्षा में फेल होना जिंदगी का अंत नहीं होता। हर साल लाखों बच्चे असफल होते हैं, लेकिन वही बच्चे आगे चलकर नई राह बनाते हैं, सफल होते हैं। असफलता सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। जरूरत है तो बच्चों को यह समझाने की कि गिरना गलत नहीं, गिरकर उठना जरूरी है।
माता-पिता और समाज को भी यह समझना होगा कि बच्चों को दबाव नहीं, सहारा चाहिए। उन्हें डर नहीं, हौसला चाहिए। क्योंकि कई बार एक छोटी सी उम्मीद, एक समझदारी भरी बात… किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है।
राजवीर अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन उसकी यह दर्दनाक कहानी शायद किसी और बच्चे को टूटने से बचा ले… यही इस खबर का सबसे बड़ा संदेश है।

