जबलपुर/बरगी डैम
मध्यप्रदेश के बरगी डैम का शांत पानी इन दिनों चीखों, सिसकियों और अधूरी कहानियों का गवाह बना हुआ है। जहां कभी परिवार खुशियों के पल बिताने आते थे, वहीं अब हर लहर किसी अपनों को खो देने का दर्द समेटे लौट रही है। दो दिन पहले हुआ यह हादसा अब एक गहरी त्रासदी में बदल चुका है-और हर बीतते घंटे के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ती जा रही हैं।
हादसे से पहले नाव में सवार लोग हंसी-खुशी तस्वीरें ले रहे थे, कोई बच्चों को संभाल रहा था, तो कोई प्रकृति का आनंद ले रहा था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल जिंदगी यूं पलट जाएगी। अचानक तेज हवा चली, पानी में उथल-पुथल बढ़ी, और नाव संतुलन खो बैठी। कुछ ही सेकंड में सब कुछ खत्म हो गया-चीखें, हाथों की पकड़, और सांसों की डोर।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और गोताखोरों की टीम लगातार पानी के अंदर जिंदगी की तलाश कर रही है। इसी बीच एक ऐसा सुराग मिला जिसने दिलों की धड़कनें और तेज कर दीं-हादसे की जगह से दूर पानी में तैरते मिले कपड़े, चप्पलें और बच्चों के खिलौने। ये सामान सिर्फ चीजें नहीं, बल्कि उन जिंदगियों के निशान हैं जो अब शायद लौटकर नहीं आएंगी।
डैम के किनारे खड़े परिजनों की आंखें हर निकलते शव पर टिक जाती हैं। कोई अपने बेटे का नाम पुकार रहा है, तो कोई पति की एक झलक पाने को बेचैन है। हर बार जब पानी से कोई शव बाहर आता है, तो एक परिवार की दुनिया उजड़ जाती है।
मां-बेटे की आई तस्वीर ने देश को झकझोरा
इस हादसे की सबसे दिल दहला देने वाली तस्वीर तब सामने आई जब एक मां अपने मासूम बच्चे को सीने से लगाए ही पानी में समा गई। जब गोताखोरों ने उन्हें बाहर निकाला, तो बच्चे के छोटे-छोटे हाथ अब भी मां की साड़ी को थामे हुए थे-मानो मौत भी उस रिश्ते को तोड़ नहीं पाई। वहां मौजूद हर आंख नम थी, हर दिल भारी था।
हादसा या लापरवाही
प्रशासन की शुरुआती जांच में लापरवाही की बू साफ महसूस हो रही है-नाव में जरूरत से ज्यादा लोग, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं, और चेतावनियों की अनदेखी। लेकिन इन सब सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल वही है-क्या इन जानों की कीमत सिर्फ लापरवाही की एक रिपोर्ट बनकर रह जाएगी?
मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, और कई लोग अब भी लापता हैं। रेस्क्यू टीम उम्मीद और हकीकत के बीच जूझ रही है। हर गोताखोर जब पानी में उतरता है, तो सिर्फ एक उम्मीद लेकर-शायद इस बार किसी की सांसें बची मिल जाएं… लेकिन अक्सर हाथ आता है सिर्फ सन्नाटा।
बरगी डैम का यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि कई अधूरी कहानियों का अंत है। यह उन सपनों का टूटना है, जो सुबह घर से निकले थे और शाम तक लौटने वाले थे… लेकिन अब कभी नहीं लौटेंगे।
