76 शहीदों की स्मृति में बना गौरव स्मारक, सीआरपीएफ डीजी ने किया उद्घाटन
नक्सलवाद के काले साये से आज़ाद हुआ सुकमा: ताड़मेटला में शहीदों की याद में बना स्मारक
सुकमा धर्मेन्द्र सिंह
सुकमा जिले के ताड़मेटला क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बदलते बस्तर और जीतते लोकतंत्र की कहानी बयां कर रही है। सोमवार को ताड़मेटला में उन 76 वीर जवानों की स्मृति में नवनिर्मित शहीद स्मारक का उद्घाटन किया गया, जिन्होंने 2010 के भीषण नक्सली हमले में देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

दहशत के केंद्र में अब ‘शौर्य’ का प्रतीक
यह वही ताड़मेटला है, जिसे कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था। इसी क्षेत्र के पास सुकमा के पहले कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने बंधक बनाकर रखा था, जिससे पूरा देश दहल उठा था। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
कलेक्टर की मौजूदगी: विकास की नई दस्तक
नक्सल मुक्त होने के बाद पहली बार वर्तमान कलेक्टर अमित कुमार स्वयं इस संवेदनशील क्षेत्र में पहुँचे। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी
यह स्मारक हमारे जवानों के अदम्य साहस और ग्रामीणों के विश्वास की जीत है। सुकमा अब विकास और शांति की नई इबारत लिख रहा है।”
ऐतिहासिक संदर्भ: 2010 के हमले में शहीद हुए 76 जवानों को समर्पित।
सफलता: सुरक्षाबलों के निरंतर प्रयास से ताड़मेटला अब नक्सलियों के प्रभाव से मुक्त।

प्रशासनिक पहुँच: सालों बाद किसी उच्च अधिकारी का बिना किसी बड़े सैन्य तामझाम के गाँव पहुँचना क्षेत्र में लौटी शांति का प्रमाण है।
अब सुकमा की पहचान गोलियों की गूँज से नहीं, बल्कि विकास की पदचापों से हो रही है। ताड़मेटला का यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को जवानों की शहादत और क्षेत्र की बहादुरी की याद दिलाता रहेगा।
सुकमा जिले के ताड़मेटला इलाके में 2010 में नक्सली हमले में जान गंवाने वाले 76 सुरक्षाकर्मियों को समर्पित एक शहीद स्मारक का उद्घाटन सोमवार को किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।इस शहीद स्मारक का लोकार्पण छत्तीसगढ़ को सशस्त्र नक्सलियों से मुक्त घोषित किए जाने के लगभग एक सप्ताह बाद किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि यह स्मारक हमले वाली जगह के करीब, गडगडमेटा गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर के नजदीक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, राज्य के अतिरिक्त महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर क्षेत्र) सुंदरराज पट्टिलिंगम और सीआरपीएफ, राज्य पुलिस तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने हमले की बरसी पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और औपचारिक रूप से इस स्मारक को जनता को समर्पित किया।सबसे

घातक सुरक्षा हमलों में से एक06 अप्रैल 2010 को तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले (यह इलाका अब सुकमा जिले में आता है) के गडगडमेटा और ताड़मेटला गांवों के मध्य जंगलों में हुए एक नक्सली हमले में 76 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। इनमें सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के 75 जवान और राज्य पुलिस का एक हवलदार शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक था। सुंदरराज ने बताया कि जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर इस स्मारक का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि सुकमा सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ, अन्य केंद्रीय सशस्त्र बलों और स्थानीय निवासियों ने सर्वोच्च बलिदान दिए हैं। छत्तीसगढ़ को विशेष रूप से चार दशकों से भी अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जूझ रहे बस्तर क्षेत्र को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित कर दिया गया।

