“डर से विश्वास तक की यात्रा”।
धर्मेन्द्र सिंग बीजापुर…
छत्तीसगढ़/बीजापुर के घने जंगल जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चा में रहते थे अब एक नई पहचान गढ़ने जा रहे हैं।
यहां लगने वाला “सकल नारायण मेला” अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बदलाव, विश्वास और शांति की मिसाल बनता जा रहा है।
नक्सल साये से आस्था के उजाले तक
एक समय था जब इन जंगलों में कदम रखना भी खतरे से खाली नहीं था। नक्सल प्रभाव के चलते यह इलाका लंबे समय तक भय और असुरक्षा का केंद्र बना रहा।
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, सुरक्षा बलों की सक्रियता और प्रशासन की रणनीति के चलते नक्सल असर कम हुआ है।
और इसी बदलाव के बीच अब यहां हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने वाला है।

🕉️ क्या है सकल नारायण मेला?
यह मेला भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप की पूजा को समर्पित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहाड़ी पर स्थित गुफा में विशेष शक्ति है, जहां भीषण गर्मी में भी गुफा के भीतर ठंडक बनी रहती है, गुफा की मिट्टी को चमत्कारी माना जाता है, दूर-दराज से श्रद्धालु मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं, यही रहस्य और आस्था का संगम इस मेले को खास बनाता है।
रहस्यमयी गुफा: आस्था का केंद्र
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है पहाड़ी पर बनी वह प्राचीन गुफा, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन विश्वास उन्हें हर मुश्किल पार करा देता है। लोगों का मानना है कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मेले को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है,और सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती कर पहाड़ी रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, हर स्तर पर कोशिश है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिले।
तीन राज्यों से उमड़ेगा जनसैलाब

इस बार मेले में सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और तेलंगाना से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। नक्सल प्रभाव कम होने के कारण इस बार भीड़ पहले से ज्यादा होने के आसार हैं।
बदलाव की नई कहानी
सकल नारायण मेला अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जहां डर की जगह विश्वास ने ले रही है।
👉 जहां कभी नक्सलियों का साया था…
👉 वहीं अब आस्था, शांति और एकता का सबसे बड़ा मेला सजने जा रहा है।
बीजापुर के जंगल अब एक नई पहचान बना रहे हैं ।

