सुकमा शहादत की नींव पर खड़ा हुआ नक्सल मुक्त भविष्य दोरनापाल में ‘शहीद स्मारक’ का लोकार्पण
बुरकापाल के अमर शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, डीआईजी और कलेक्टर ने वीरों के बलिदान को किया नमन
सुकमा धर्मेन्द्र सिंह/ सुकमा जिला आज नक्सलवाद के काले साये से मुक्त होकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। इस शांति और सुरक्षा के पीछे उन वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान है, जिन्होंने बुरकापाल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में राष्ट्र की एकता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसी कड़ी में आज शुक्रवार को 74वीं बटालियन मुख्यालय, दोरनापाल में वर्ष 2017 की बुरकापाल घटना में शहीद हुए 25 वीर जवानों की स्मृति में नवनिर्मित शहीद स्मारक का गरिमामय लोकार्पण किया गया।
सम्मान और गौरव का पल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित ने विधिवत पूजा-अर्चना कर स्मारक का अनावरण किया। इस दौरान वातावरण अत्यंत भावुक और श्रद्धामय रहा। उपस्थित अधिकारियों और जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने वीर साथियों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखकर उनकी अमर स्मृति को नमन किया।

संघर्ष से शांति तक का सफर
लोकार्पण के अवसर पर वर्ष 2017 की उस हृदयविदारक घटना को याद किया गया, जब दोरनापाल-जगरगुंडा मार्ग निर्माण के दौरान नक्सलियों ने कायराना हमला किया था। अधिकारियों ने बताया कि एक समय यह क्षेत्र नक्सलवाद का गढ़ था, जहाँ सड़क बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था।
आज अगर सुकमा नक्सल मुक्ति की दिशा में खड़ा है, तो इसका श्रेय उन जवानों को जाता है जिन्होंने जगरगुंडा मार्ग के पत्थर-पत्थर को अपने खून से सींचा है।
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कहा कि सुकमा अब नक्सलवाद के दंश से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे जवानों ने जो शहादत दी है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज बुरकापाल के वीरों की याद में स्मारक का लोकार्पण कर हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं
बुरकापाल घटनास्थल पर भी दी श्रद्धांजलि
दोरनापाल में कार्यक्रम के पश्चात डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, कमांडेंट हिमांशु पांडे और कमांडेंट कुमार मयंक सीधे बुरकापाल स्थित वास्तविक घटनास्थल पर पहुँचे। वहां स्थित स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को याद किया गया। उपस्थित सभी जवानों ने संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

