कांकेर/नारायणपुर।
बस्तर के घने और खतरनाक जंगलों में एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चल रहे डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए भीषण आईईडी विस्फोट में चार बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवा दी। यह हादसा थाना छोटेबेठिया क्षेत्र के अंतर्गत कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर हुआ।
शनिवार सुबह डीआरजी (District Reserve Guard) की टीम एरिया डॉमिनेशन और सर्च ऑपरेशन के लिए जंगलों की ओर रवाना हुई थी। टीम आत्मसमर्पित नक्सलियों के बताए ठिकाने पर डंप बारूद बरामद करने पहुँची थी। जवान बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे थे, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इलाके में हर कदम पर खतरा छिपा हो सकता है।
इसी दौरान, जैसे ही टीम एक संदिग्ध स्थान पर पहुँची और वहां छिपाए गए विस्फोटक डंप को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की, तभी अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भयानक था कि पूरा इलाका दहल उठा।
इस दर्दनाक घटना में मौके पर ही तीन जवान — इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले — शहीद हो गए। वहीं, गंभीर रूप से घायल कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा को एयरलिफ्ट कर रायपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर कई आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किए गए हैं। इससे साफ है कि माओवादी अब भी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जंगलों में छिपाकर रख रहे हैं।
यह घटना इस बात का भी संकेत है कि भले ही कई नक्सली आत्मसमर्पण कर अहम जानकारी दे रहे हैं, लेकिन जंगलों में पहले से छिपाए गए आईईडी अब भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बल लगातार ऐसे छिपे हुए बारूदी जाल को खोजकर निष्क्रिय करने में जुटे हैं।

