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रवि. मई 3rd, 2026

बालोद। जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के खराब परिणामों के बाद 11 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर निजी स्कूलों पर सख्ती दिखाई गई है, किन्तु सरकारी स्कूलों का क्या.? दोहरे मापदंड के आरोप लगने लगे हैं।

जिले में इस वर्ष परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं।
इतना ही नहीं, करीब 13 साल बाद पहली बार बालोद जिला 10वीं और 12वीं की टॉप-10 मेरिट सूची से बाहर हो गया है, जिसे जिले के लिए बड़ा शैक्षणिक झटका माना जा रहा है।

इन खराब परिणामों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा 11 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। नोटिस में संबंधित स्कूल प्रबंधन से कमजोर परिणामों का कारण पूछते हुए भविष्य में सुधार के लिए ठोस योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मान्यता समाप्त करने तक की चेतावनी भी दी गई है।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि जब हजारों छात्र फेल हुए हैं, तो जिम्मेदारी केवल निजी स्कूलों की ही क्यों तय की जा रही है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में भी शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहां शिक्षकों की कमी, संसाधनों का अभाव और निगरानी की कमजोर व्यवस्था जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं।

निलिमा श्याम जिला स्थायी शिक्षा समिति सदस्य

जिला स्थायी शिक्षा समिति सदस्य निलिमा श्याम ने विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था का प्रतिबिंब होता है, ऐसे में केवल निजी स्कूलों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी-दोनों प्रकार के स्कूलों की समान रूप से समीक्षा और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

इन निजी स्कूलों को जारी हुआ नोटिस
सर्वोदय अंग्रेजी माध्यम हाई स्कूल गुरुर, साई शिशु मंदिर गुण्डरदेही, नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय अर्जुंदा, नेहरू विद्यालय भाठागांव, श्री राम विद्या मंदिर पैरी, गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यापीठ बालोद, गुरुनानक विद्यालय दल्ली राजहरा, साई शिशु मंदिर दल्ली राजहरा, गांधी विद्या मंदिर दल्ली राजहरा तथा विवेकानंद हाई स्कूल डौण्डी।

इस पूरे मामले के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विभाग ने पूरे सत्र के दौरान प्रभावी मॉनिटरिंग की थी या फिर परिणाम आने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल, जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की भी जवाबदेही तय की जाएगी या यह कार्रवाई केवल निजी स्कूलों तक ही सीमित रह जाएगी।

 

 

Nbcindia24

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