Nbcindia24/वीरेन्द्र भारद्वाज/दल्लीराजहरा । महिला प्रकोष्ठ जिला साहू संघ बालोद के सचिव द्रोपती साहू ने श्रावण मास के महत्व को बताते हुए कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन सावन मास में हुआ था। इस मंथन से विष निकला तो चारो ओर हाहाकार मच गया। संसार की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने विष को कंठ में धारण कर लिया। विष की वजह से कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाये। विष का प्रभाव कम करने के लिए सभी देवी देवताओ ने भगवान शिव को जल अर्पित किए, जिससे उन्हें राहत मिली इस से वे प्रसन्न हुए। तभी से हर वर्ष सावन मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा चल रही है। सावन में क्यों होती है भगवान शिव की पूजा।
जाने इसका धार्मिक महत् हिंदू धर्म के अनुसार, श्रावण या सावन माह भगवान शिव को समर्पित है। देवो के देव महादेव की उपासना के लिए यह माह सबसे उत्तम माना गया है।सावन में सच्ची श्रद्धा के साथ शिव पूजन से मानव के सभी दुख दर्द दूर हो जाते है।
शिव भक्त सावन में ही कावड़ लेकर जाते है।जो एक माह तक चलता हैं। सावन में शिव ने किया था विषपान।
जिला साहू संघ महिला प्रकोष्ठ के सचिव द्रोपती साहू ने श्रावण मास के महत्व को बताया ।

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