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Wed. Apr 22nd, 2026

Nbcindia24/छत्तीसगढ़/ कल रविवार को छत्तीसगढ़ क्रांति सेना द्वारा “जबर हरेली रैली” निकाल छत्तीसगढ़ की पहली तिहार हरेली को बालोद जिला मुख्यालय में भव्य रूप में मनाने जा रहा है इस दौरान जिला मुख्यालय स्थित स्टेडियम से छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को बिखेर अनेक रंगों में रंग कला संस्कृति की प्रस्तुति देते हुए पूरे नगर का भ्रमण कर स्कूल मैदान में पहुंचेंगे जहां शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला संयोजक शशि भूषण चंद्राकर ने बताया की हरेली छत्तीसगढ़ की सबले पहली तिहार आय जेला हमर संघठन के सेनानी मन सब मिलके जबर ढंग ले मनाए बर जाथन अऊ हमर ये आयोजन खेल मैदान ले निकल्हि जेंमे छत्तीसगढ़ के जम्मो छत्तीसगढ़ी नाचा-गाना सुवा, ददरिया,कर्मा, पंथी, राऊत नाचा, गेड़ी, आनगादेव, बस्तरिया नाचा, अखाड़ा, कमार नाच, के नाचा होवत गाड़ा बैल के रैली निकल्हि जेनहा जम्मो बालोद ला घुमहि अऊ स्कूल मैदान में पहुँचहि।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना जिला बालोद के ब्लॉक अध्यक्ष शुभाष साहू ने बतलाया हमर छत्तीसगढ़िया भाई बहिनी मन हमरे छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ कला ला भुला के परदेशिया मन के संस्कति ला अपना थे ये हम होय नई देन जेकरे सेती हमर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के सेनानी मन हमर संस्कृति का ला बचाए बर आगू आए हे, हमर छत्तीसगढ़ में हमर छत्तीसगढ़िया मन के शोषण होथे हमार अधिकार अऊ हक मार परदेशिया मन राज करत हे ये अब हम होए नई देन हमर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के हमर सेनानी मन येकर बर लगातार लड़ाई लड़त आथे जेकर बर जेल घलो जाथे अऊ जाबो फेर हमर छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़िया भाई बहिनी मनके हक अऊ अधिकार के लड़ाई लड़े बर नही छोड़न।

हरेली छत्तीसगढ़ का सबसे पहला त्यौहार माना जाता है हर वर्ष इस पर्व को सावन महीने के अमावस्या तिथि को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा को प्रदर्शित करता है इस दिन सुबह से ही ग्रामीण अंचलों में किसान फावड़ा, कुदारी, नांगर, गैति विभिन्न औजार सहित अपने गाय बैलों को धो-धाकर चावल के आटे से बने चीले की रोटी चढ़ा विशेष पूजा अर्चना कर इस पर्व को मना घर के दरबाजे के सामने निम पत्ते का ढाल को लगाते है।

हरेली पर्व पर गेड़ी का भी खासा महत्व है प्रत्येक घर में गेड़ी का निर्माण किया जाता है जिसपर युवा बच्चे चढ़कर खेलते है कहीं-कहीं गेड़ी दौड़ प्रतियोगिता भी रखी जाती है। इसके आलवा गांवों में बैल दौड़ प्रतियोगिता भी होता है।

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