धर्मेन्द्र सिंह सुकमा। नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्र सुकमा में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा सुदूर क्षेत्रों के पोटाकेबिन (आवासीय विद्यालयों) में अध्ययनरत बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा शुरू की जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी पहल को जमीन पर उतारने के लिए लाइवलीहुड कॉलेज सुकमा में पोटाकेबिन स्कूलों के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
शिक्षक बनेंगे माध्यम, बच्चे छुएंगे आसमान
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को AI के आधुनिक टूल्स और तकनीकों का प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को AI की मूलभूत जानकारी, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और डिजिटल नवाचार से परिचित कराएंगे।
शहरों से मुकाबले की तैयारी
इस पहल से सुदूर वनांचल के बच्चे भी तकनीक के क्षेत्र में शहरी छात्रों के समान अवसर प्राप्त कर सकेंगे। अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल प्रयोगशालाओं और तकनीकी प्रयोगों के माध्यम से सीखने का नया दौर शुरू होगा।
बेहतर भविष्य की नींव
AI की शिक्षा से विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मक सोच में वृद्धि होगी। साथ ही भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
AI प्रशिक्षक वेनिक सेरो ने बताया कि उद्देश्य यह है कि सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी वही तकनीकी अवसर मिलें जो महानगरों के विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं।
पोटाकेबिनों में बदलेगी पढ़ाई की सूरत
अब पोटाकेबिन स्कूलों में डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया जाएगा। AI की मदद से कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाया जाएगा और छात्र नवाचार आधारित प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तकनीक की यह दस्तक शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक पहल मानी जा रही है, जो आने वाले समय में सुकमा के बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।

