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प्यार, ज़हर और बच्चों की गवाही: जब मां की साजिश ने खुद ही लिख दी सजा

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि भरोसे के कत्ल, रिश्तों की टूटन और मासूम सच की जीत की कहानी है। एक ऐसा अपराध, जिसे आत्महत्या का जामा पहनाने की पूरी तैयारी थी, लेकिन दो मासूम बच्चों की आंखों ने उस रात का सच देख लिया था।

बीमारी से टूटा घर, मोबाइल ने बढ़ाई दरार

दर्री थाना क्षेत्र के लाटा बस्ती में रहने वाले अरुण सिंह (42) का परिवार कभी खुशहाल था। पत्नी बंटी देवी (38), 14 वर्षीय बेटा और 11 वर्षीय बेटी—सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन डेढ़ साल पहले जिंदगी ने करवट ली। अरुण सिंह को पैरालिसिस अटैक आया। ऊपर से टीबी की बीमारी। काम छूट गया, शरीर ने साथ छोड़ दिया और वह खाट पर आ गए।

यहीं से कहानी में एक और किरदार की एंट्री हुई—मोबाइल फोन। बीमारी के दौरान बंटी देवी किसी दूसरे पुरुष के संपर्क में आ गई। बातों का सिलसिला बढ़ा, शक गहराया और फिर घर में रोज़ का कलह शुरू हो गया। अरुण सिंह असहाय थे, लेकिन सब कुछ समझ रहे थे।

27 जनवरी की रात: जब भरोसे के गिलास में ज़हर था

27 जनवरी की रात बंटी देवी ने एक खौफनाक फैसला लिया। उसने अपने बेटे को यह कहकर बाजार भेजा कि पेड़-पौधों में कीड़े लग गए हैं, कीटनाशक लाना है। बेटा मासूमियत में ज़हर घर ले आया—अनजाने में अपने ही पिता की मौत का सामान।

रात को बंटी देवी ने कीटनाशक को गिलास में घोला और अपने पति अरुण सिंह को पिला दिया।

कुछ ही देर में अरुण की हालत बिगड़ने लगी। रात करीब डेढ़ बजे वे तड़पने लगे। बच्चों ने मां से अस्पताल चलने की गुहार लगाई, लेकिन मां ने सुबह तक इंतजार करने को कहा। दादी-चाचा को बुलाने से भी रोक दिया गया। पूरी रात अरुण सिंह दर्द से जूझते रहे।

सुबह हुई देरी, मौत बन गई पक्की

सुबह 6 बजे जब अरुण सिंह को निजी अस्पताल ले जाया गया, तब बहुत देर हो चुकी थी। हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा रेफर किया गया, लेकिन शुक्रवार 30 जनवरी को उनकी मौत हो गई।

बंटी देवी हर किसी से एक ही बात कहती रही—

“अरुण ने खुद ज़हर पी लिया था, मुझे अस्पताल पहुंचने के बाद पता चला।”

शायद यह कहानी सच मान ली जाती…
अगर दो मासूम गवाह चुप रह जाते।

बच्चों ने तोड़ी मां की चुप्पी

पिता की मौत के बाद बेटा और बेटी टूट गए। लेकिन उन्होंने वह सच बता दिया, जिसे कोई सुनने की उम्मीद नहीं कर रहा था।

बेटी ने बताया कि उसने खिड़की से देखा था—

“मां पापा को गिलास में कुछ घोलकर पिला रही थी।”

बेटे ने बताया कि वही कीटनाशक उसने मां के कहने पर लाकर दिया था।

यह सच जब मृतक के छोटे भाई तक पहुंचा, तो वह दोनों बच्चों को लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के पास पहुंचा।

साजिश बेनकाब, मां गिरफ्तार

पुलिस ने बच्चों से अलग-अलग पूछताछ की। बयान मेल खा गए। कहानी पूरी हो चुकी थी। शुक्रवार देर शाम बंटी देवी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

शनिवार सुबह पुलिस ने महिला को घर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराया और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

प्यार बना हत्या की वजह?

जांच में यह भी सामने आया कि बंटी देवी का किसी अन्य पुरुष से करीबी संपर्क था। पुलिस को संदेह है कि पति की बीमारी, जिम्मेदारियों से बोझ और गैर मर्द के प्यार ने उसे इस खौफनाक रास्ते पर धकेल दिया।

फिलहाल पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में जुटी है।

अंत में सवाल वही…

क्या प्यार इंसान को इतना अंधा कर देता है कि वह अपने बच्चों के पिता की हत्या कर दे?

Nbcindia24

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