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सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन : मुदवेंडी घटना और हसदेव परियोजना के खिलाफ लामबंद हुए आदिवासी

 

बीजापुर / आशीष पदमवार / सरगुजा संभाग के हसदेव अरण्य क्षेत्र मे कोयला खनन मे अवैधानिक कार्य बंद कर, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को छत्तीसगढ़ मे आबंटित कोयला खदान को रद्द करने और बीजापुर जिले के गंगालूर तहसील के मुदवेंडी गांव में छः महीने के मासूम की हत्या पर न्यायिक जांच और और कार्रवाई की मांग को लेकर सर्व आदिवासी ।

 

समाज ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम पवन प्रेमी को ज्ञापन सौंपा: 

 

सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि सरगुजा संभाग के हसदेव अरण्य जो की पांचवी अनुसूची क्षेत्र मे आता हैं। जिसको राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को कोयला आपूर्ति के लिए आबंटित कर दिया गया है। जिसके अंतर्गत परसा ईस्ट, केटे बासन क्षेत्र सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों मे नियमों और कानूनों का खुला उलंघन कर खनन कार्य किया जा रहा है। ग्राम सभा की सहमति के बिना बहुमूल्य वनों की कटाई, एवं प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट किया जा रहा है। इसके साथ ही आदिवासी सांकृतिक विरासत को भी नष्ट किया जा रहा हैं यह 170000 हेक्टेयर क्षेत्र मे फैला सघन वन क्षेत्र है। 

 

21 दिसम्बर, 2023 को हसदेव के सरगुजा में परसा ईस्ट केते बसन कोयला खदान परियोजना के फेस-II में 91 हेक्टेयर वन भूमि में पेड़ों में कटाई शुरू हुई और प्रभावित आदिवासी समुदाय के 7 लोगों जिसमे गांव के सरपंच भी शामिल है उन्हें जबरन पुलिस उनके घरों से उठा कर ले गई और देर रात तक हिरासत में रखा। कटाई पूरे तीन दिनों तक चली और इस बीच पूरे गांव में पुलिस का पहरा बैठाया गया और एक तरह से पूरे गांव को बंधक बनाकर रखा गया, दमनपूर्वक घाटबर्रा गांव के जंगलों में 15 हजार पेड़ काट डाले गए। आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से इन वनों के संरक्षक है, उनके साथ अमानवीय व्यवहार करके, कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए उनके जंगलों को उजाड़ा जाना उनके अस्तित्व पर कुठाराघात है।

 

इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। घाटबर्रा की ग्राम सभा को 2013 में सामुदायिक वन अधिकार का अधिकार पत्रक मिला था। लेकिन गैर कानूनी तरीके से वन अधिकार कानून, 2006 का उल्लंघन कर घाटबर्रा के सीएफआर को निरस्त किया गया। घाटबर्रा के वनों को काटा जा रहा है। यह न्यायसंगत नहीं है। घाटबर्रा की ग्राम सभा ने अब तक खनन के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु विधिवत कोई भी सहमति नहीं दी है, इसके बाद भी जबरन दमनात्मक कार्यवाही करके वनों को काटा जा रहा है। यह पेसा कानून 1996 और भूमि अधिग्रहण कानून,2013के ग्राम सभा संबंधी प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।

 

गंगालूर तहसील अंतर्गत बुर्जी पंचायत के मुदवेंडी गांव ने बीते 1 जनवरी 2024 को सुरक्षा बलों द्वारा 6 महीने के मासूम की गोली मार कर हत्या की गई है। इस घटना में मृतक मासूम की माता के बाएं हाथ के दो उंगलियों में चोट आई है। घटना की सर्व आदिवासी समाज तीव्र निंदा करता है तथा घटना की न्यायिक जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करता है।

 

इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष कमलेश पैंकरा, लक्ष्मीनारायण गोटा, गुज्जा राम पवार, सीता राम माझी, सीएस नेताम, महेंद्र काका, अमित कोरसा, जग्गू तेलामी, दशरथ कश्यप, विनिता बघेल, सावित्री जुर्री, रानू सोरी, राम लाल कर्मा, सुरेश नेताम, शिव पुनेम, विनय उइका, टीकेश्वरी वट्टी, अंबिका वट्टी, गंभीर तेलाम, सोनारू राम, धीरेंद्र वेंजाम, पाकलु कोरसा, बचलू राम, मंगल वेको, सुरेश कडती, धनेश कुंजाम सहित सैकड़ों समाज के प्रतिनिधियों मौजूद थे।

Nbcindia24

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