Breaking
Mon. Apr 20th, 2026

नगरी ब्लॉक में अवैध ईंट भट्ठों – का कारोबार चरम पर है। खनिज विभाग को हर महीने लाखों रुपए का हो रहा राजस्व की हानि

 

 

धर्मेंद्र यादव धमतरी / नगरी ब्लॉक में अवैध ईंट भट्ठों – का कारोबार चरम पर है। खनिज विभाग को हर महीने लाखों रुपए – राजस्व की हानि हो रही है, मगर – अवैध ईंट भट्ठा संचालकों पर – कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे – संचालकों के हौसले बुलंद होते जा – रहे हैं। क्षेत्र में इन दिनों अवैध ईंट – भट्टों की बाढ़ आई हुई है।

 

 

कुम्हार जाति को मिलने वाली छूट = का लाभ रसूखदार लोग उठा रहें हैं – और लाल ईंट का अवैध निर्माण कर मोटी कमाई करने में कोई कसर नहीं – छोड़ रहे हैं। खनिज विभाग के अनुसार गिनती के ईंट भट्ठे के – संचालकों द्वारा विभागीय औपचारिकताएं पूरी की गई है, जबकि – ज्यादातर भट्ठे अवैध ढंग से संचालित हैं। बता दें कि शासन-प्रशासन द्वारा आए दिन खनिज विभाग को अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों पर कार्रवाई करने दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। ग्राम फरसिया में बहुतायत मात्रा में निर्माण जारी है।

 

 

इसी तरह पंडरीपानी, हरदीभाटा, जरहिडीही,बेलरगांव, सांकरा, छिपली, गाड़ियापारा, सहित आस-पास के कई ऐसे ईंट भट्ठों पर न तो प्रशासनिक लगाम लग पा रही है और न ही किसी तरह रॉयल्टी वसूली हो पा रही है। गांव-गांव में लोग ईंट बना रहे हैं, मगर खनिज विभाग की अनदेखी से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

 

 

ईट भट्ठा के लिए पहले खनिज विभाग व पर्यावरण से इसकी मंजूरी लेकर ईंट बनाने का कार्य किया जाता है, पर इस क्षेत्र के रसूखदारों द्वारा बिना स्वीकृति लिए ही ईंट भट्ठे का संचालन किया जा रहा है।

 

 

नगरी राजस्व अनुविभागीय अधिकारी पी के प्रेमी बताया की अभी तक इसकी जानकारी नहीं मिली है। जानकारी होने पर दोषी पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

 

 

जंगल से काटी गई लकड़ियों का उपयोग भी खुलेआम

 

 

 

अवैध रूप से संचालित इन ईंट भट्ठों में अवैध रूप से जंगल से काटी गई लकड़ियों का उपयोग भी खुलेआम किया जा रहा है। क्षेत्र में ईंट बनाने के लिए एक भी भट्ठे को मंजूरी नहीं दी गई है, बावजूद इसके खुलेआम ईंट भट्ठे संचालित हैं और इन भट्ठों से निकले ईंट का उपयोग निजी के साथ-साथ शासकीय भवन बनाने में भी किया जा रहा है।

Nbcindia24

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *