दंतेवाड़ा में सड़क के अभाव में सिस्टम लाचार
10 किमी खाट पर ढोकर अस्पताल पहुंचाया गया मरीज, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
धर्मेन्द्र सिंह दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़)। आजादी के दशकों बाद भी बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस कदर है, इसकी एक और मार्मिक तस्वीर दंतेवाड़ा जिले से सामने आई है। पोरोहिड़मा गांव में सड़क नहीं होने के कारण एक गंभीर रूप से बीमार ग्रामीण को एम्बुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी। मजबूरन परिजनों और ग्रामीणों ने मरीज को खाट पर लादकर करीब 10 किलोमीटर पैदल सफर तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, तब जाकर उसे अस्पताल ले जाया जा सका।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पोरोहिड़मा गांव निवासी मुचकि जोगा पिछले एक सप्ताह से गंभीर रूप से बीमार थे। बीते दिन उनकी हालत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने तत्काल ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस पहुंचने में असमर्थ रही।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने लकड़ी और रस्सी की मदद से खाट को अस्थायी पालकी का रूप दिया और मरीज को कंधे पर उठाकर अस्पताल के लिए निकल पड़े। पथरीले, कीचड़ भरे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए ग्रामीणों ने लगभग 10 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया। मुख्य मार्ग तक पहुंचने के बाद ही वाहन की व्यवस्था हो सकी।
ग्रामीणों का दर्द: “आज तक नहीं बनी सड़क”
गांव के निवासी सुनील सोढ़ी ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा—
“हमारे गांव में आज तक सड़क नहीं बनी है। जब भी कोई बीमार पड़ता है या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना होता है, तो हमें इसी तरह खाट पर लादकर ले जाना पड़ता है। कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हर चुनाव में वादा होता है, पर हालात नहीं बदलते।”
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। न तो एम्बुलेंस पहुंच पाती है और न ही अन्य वाहन।
सिस्टम पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर बस्तर के अंदरूनी इलाकों में स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था की पोल खोलती है। एक ओर सरकार विकास, डिजिटल इंडिया और ग्रामीण सड़कों के जाल बिछाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आज भी कई गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को इसी तरह अपने बीमार परिजनों को कंधों पर ढोना पड़ेगा?
इंतजार
ग्रामीणों ने मांग की है कि पोरोहिड़मा गांव तक जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह जान जोखिम में डालकर अस्पताल न पहुंचाना पड़े।
