छत्तीसगढ़/ बालोद जिले में कोदो की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है, खासकर वनांचल क्षेत्रों में। इसकी मुख्य वजह है कम लागत में अधिक लाभ और इसकी बढ़ती मांग। जिले के गुरूर विकासखंड में कोदो की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। जिले के वनग्राम बड़भूम, पेटेचुवा, दुग्गा बाहरा, कर्रेझर आदि गांवों के अनेक किसानों द्वारा कोदो की खेती की जा रही है। इसकी मुख्य वजह है कम खर्च और मेहनत से समुचित लाभ और इसकी बढ़ती मांग।
कोदो की खेती के फायदे:
कम लागत और मेहनत से अधिक लाभ
उच्चहन भूमि का उपयोग करके कम लागत में अधिक लाभ
धान की तुलना में कम दवाई और खाद की आवश्यकता
पौष्टिक अनाज जिसमें फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक विटामिन व खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं
सरकारी समर्थन:
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (रफ्तार) के तहत किसानों को कोदो की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है
प्रति एकड़ 11 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है
किसानों का अनुभव:
किसान धनीराम ने बताया कि कोदो की खेती से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है और वे अब 3 एकड़ भूमि पर कोदो की खेती कर रहे हैं।
कोदो की खेती न केवल किसानों के लिए लाभदायक है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। यह वजन कम करने, हृदय रोग और मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करता है।
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