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Fri. Apr 17th, 2026

राहुल ठाकुर गरियाबंद में हुए मुठभेड़ पर स्पेशल रिपोर्ट @ मनोज समेत ओडिसा में सक्रिय 3 अहम किरदार मारे गए…..

अब पढ़ें विस्तार से…….

गुरुवार को हुए मुठभेड़ में मारा गया मनोज, उर्फ भास्कर, उर्फ बालकृष्ण, चलपती की तरह ही उड़ीसा स्टेट कमेटी का मेंबर था, जिस पर 6 राज्यों का 1.80 करोड़ इनाम था, इसके साथ मारे गए प्रमोद उर्फ पांडु भी उड़ीसा केडर का लीडर था, जिस पर 1.20 करोड़ का अलग अलग राज्यों द्वारा इनाम था, उड़ीसा और पूर्वी छत्तीसगढ़ में वारदात को अंजाम देंने में रेडियो और अन्य हथियार बनाने वाले टेक्निकल टीम का विमल भी मारा गया, शेष 7 में से ज्यादातर ओडिसा और पूर्वी छत्तीसगढ़ में सक्रिय थे।

एक नजर ओडिसा स्टेट कमेटी की संरचना पर

ओडिसा कमेटी में तीन सीसी मेंबर में फिलहाल गणेश उईके जिंदा है, उसके दो हाथ कहे जाने वाले चलपती और मनोज उर्फ बालकृष्ण गरियाबंद में ढेर हुए, स्टेट कमेटी में 7 नाम शामिल थे, जिनमें से 4 यानी प्रमोद, कार्तिक, जयराम और विमल को गरियाबंद पुलिस ढेर कर चुकी है, शेष 3 बचे हैं, इसी तरह इस जेड एम कमेटी के 2 में से एक सत्यम गावड़े भी इसी साल जनवरी 2025 में मारा जा चुका है, ओडिसा में दल को खड़ा करने वाले 12 में से 7 मुठभेड़ में मारे गए है।

पिछले 8 माह में गरियाबंद डिविजन में सक्रिय 28 नक्सली मारे जा चुके है, वहीं 21 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है, ऐसे में अब बार्डर पर नक्सलियों का 70 फीसदी उन्मूलन माना जा रहा, इस इलाके में 5 एरिया कमेटी सक्रिय है, जिसमें अब सबसे ज्यादा संख्या सुनाबेड़ा एरिया कमेटी में मौजूद है, यह कमेटी ओडिसा नूवापाड़ा जिला क्षेत्र में सबसे ज्यादा सक्रिय है, हालांकि शीर्ष नेतृत्व के सफाया से अब ये एरिया कमेटी भी कमजोर पड़ जायेगा।

टेक्निकल टीम ने पुख्ता इनपुट दिए 400 जवानों के साथ ऑपरेशन लॉन्च,अमरेश मिश्रा, आईजी, रायपुर रेंज ने बताया कैसे किया ऑपरेशन लॉन्च

बस्तर में बढ़ते दबाव की वजह से नक्सली अब गरियाबंद में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे थे, क्योंकि यह इलाका उनके लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, यहां मुठभेड़ कम होती है, इसी कारण गरियाबंद पुलिस लगातार नक्सलियों को ट्रैस करने की कोशिश कर रही थी, जंगल और पहाड़ों में सरप्राइज ऑपरेशन किए जा रहे हैं, इस दौरान करीब 12-13 बार फोर्स का नक्सलियों से सामना हुआ, मुठभेड़ भी हुई, लेकिन कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी, पुलिस जंगल से लेकर बॉर्डर तक मुखबिरों से लगातार संपर्क बनाए हुए थी, और नक्सलियों की मूवमेंट की जानकारी जुटाई जा रही थी, तकनीकी टीम भी नक्सलियों को ट्रैक करने की कोशिश कर रही थी।

बुधवार यानी 10 तारीख को दोपहर में टेक्निकल टीम से सूचना मिली कि….

बड़ी संख्या में नक्सली मैनपुर के मटाल पहाड़ियों में छिपे हुए हैं, टीम ने सटीक लोकेशन साझा की, जो सबसे बड़ी सूचना थी, बीते 4 महीने से बालकृष्णा की इस क्षेत्र में सक्रियता की सूचनाएं मिलती रही थी, इस बार एडवांस तकनीक से उसकी मौजूदगी के प्रमाण इकट्ठा किए गए थे, सूचना मिलते ही एसपी के साथ मिलकर एक बड़ा ऑपरेशन प्लान किया गया, 400 से ज्यादा जवानों की 10 टीम बनाई गई और उन्हें शाम ढलते ही अलग-अलग रास्तों से मटाल की ओर रवाना किया गया, भारी बारिश भी हो रही थी, इसके बीच जवान जंगल से होते हुए मटाल पहाड़ के पास पहुंचे और चारों ओर से पहाड़ को घेरने लगे, इसमें E 30, कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ की संयुक्त टीम थी, कहा जाता है, गरियाबंद में E 30 के जवान सबसे खतरनाक माने जाते है, और नक्सली भी इनसे थर थर कांपते है, तभी नक्सलियों को जवानों के आने की भनक लग गई, उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी, जवानों ने तुरंत पोजीशन लेकर जवाबी कार्यवाही की।

पुलिस के आला अधिकारी लगातार जवानों के संपर्क में थे, और मौके से जानकारी लेते हुए उन्हें जरूरी निर्देश भी देते रहे….

गुरुवार रात तक फायरिंग जारी रही, इस दौरान नक्सलियों ने धमाका भी किया, अंधेरे और बारिश के कारण हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, जवानों के लिए यह बेहद कठिन परिस्थिति थी, पुलिस के अधिकारी भी पूरी रात वार रूम में बैठे रहे और लगातार जवानों से बातचीत करते रहे, शुक्रवार सुबह एक बार फिर फायरिंग शुरू हुई, लेकिन नक्सली भाग निकले, ऑपरेशन के बाद 10 नक्सलियों के शव जवानों के द्वारा रिकवर किए गए, इनमें सेंट्रल कमेटी का सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालकृष्णा भी शामिल है, इस ऑपरेशन के बाद से फोर्स का मोरल हाई है।

 

गरियाबंद से राहुल ठाकुर की स्पेशल रिपोर्ट…….

Nbcindia24

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